तीन तलाक: ना हम सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला मानेंगे और न किसी सरकार का- मौलाना रईस अशरफी

मौलाना रईस अशरफी ने कहा ये अल्लाह का नियम है और इसे कोई नहीं बदल सकता

By: pallavi kumari

Published: 22 Aug 2017, 04:39 PM IST

मुरादाबाद: सुप्रीम कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए एक बार में तीन तलाक पर अगले छह महीने तक के लिए रोक लगा दी है। सुप्रीम ने कोर्ट ने कहा है कि संसद इसपर 6 महीने के भीतर कानून बनाए। संसद जब तक इस पर कानून नहीं लाती तब तक तीन तलाक पर रोक रहेगी। अगर 6 महीने के भीतर कानून नहीं बनता है तो ये तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आगे भी जारी रहेगा। जिसके बाद तमाम मुस्लिम धर्म गुरुओं और सियासी लोगों की बयान बाजी भी इस पर आना शुरू हो गयी है। सबकी अलग अलग राय है। लेकिन मुरादाबाद में जिला इमाम मौलाना रईस अशरफी बरेलवी ने तीन तलाक को लेकर स्पष्ट कर दिया है कि न हम सुप्रीम कोर्ट का कोई फैसला मानेंगे और न किसी सरकार का। तीन तलाक का फैसला अल्लाह का फैसला है और इसे कोई इंसान नहीं बदल सकता।


मौलाना रईस यहीं नहीं रूके उन्होंने तीन तलाक के लिए खुद औरतों को ही जिम्मेदार ठहराया और कहा की अगर वे अपने पति से निभा के चलती तो वो तलाक क्यूं देता। मौलाना के मुताबिक पत्नी से परेशान होकर ही आदमी तीन तलाक़ दे देता है। ये कोई पीड़ित नहीं है।
मौलाना के मुताबिक इस्लाम तीन तलाक का जो जिक्र है उसे एक एक बार में दिया जा सकता है। पहली बार तलाक में कुछ वक्त मियां बीबी अलग रहकर फिर से निकाह कर सकते हैं और दूसरी बार में भी। लेकिन अगर एक साथ तीन तलाक़ दे दिया तो फिर बीबी हलाला के बाद ही शौहर के साथ रह सकती है। मौलाना कड़ाई से इस्लाम की ढ़ाल पर तीन तलाक़ का बचाव कर रहे हैं। उनके मुताबिक इसमें कोई दखल नहीं दे सकता।


मौलाना रईस मुस्लिम तंजीमों की कई संस्थाओं से जुड़े हैं और उनका तीन तलाक को लेकर दिया गाय बयान काफी चौंकाने वाला है। फ़िलहाल अब सब की निगाहें मोदी सरकार की तरफ मुड़ गयी हैं।

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