प्रदूषण रोकने के लिए अब ये काम करने जा रहा ये विभाग

प्रदूषण विभाग ने मंडल भर के बिना लाइसेंस चल रहे करीब साढ़े तीन सौ ईंट भट्टों को बंद कराने के लिए शासन को पत्र लिखा है।

By: jai prakash

Updated: 16 May 2018, 05:44 PM IST

मुरादाबाद: जनपद और आसपास के इलाकों में बढ़ रहे प्रदूषण को रोकने के लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और एनजीटी लगातार चेतावनी जारी कर रहा है। इसी के तहत अब स्थानीय प्रदूषण विभाग ने मंडल भर के बिना लाइसेंस चल रहे करीब साढ़े तीन सौ ईंट भट्टों को बंद कराने के लिए शासन को पत्र लिखा है। जिस पर आदेश मिलते ही प्रदूषण फैला रहे इन ईंट भट्टों को बंद करवाया जाएगा।

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बिना लाइसेंस चल रहे भट्टे

क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी आर.के. सिंह के मुताबिक मंडल में करीब साढ़े आठ सौ ईंट भट्टे हैं। इनमें से साढ़े तीन सौ ऐसे हैं जो बिना लाइसेंस के चल रहे हैं। इनकी रिपोर्ट शासन को भेजी गयी है। वहां से आदेश आते ही इन्हें बंद करा दिया जाएगा। उनके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन के मुतबिक ही ईंट भट्टे होने चाहिए। पहले के मुकाबले बड़ी संख्या में अब ईंट भट्टा मालिकों ने बदलाव किये हैं। इसमें चिमनी की उंचाई से लेकर कई चीजों में बदलाव से प्रदूषण का स्तर जरुर कुछ कम हुआ है। लेकिन बिना लाइसेंस भट्टा नहीं चलाया जा सकता। इसलिए इन भट्टों को बंद कराने की प्रक्रिया शुरू की गयी है।

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नम्बर वन रहा था प्रदूषण में शहर

यहां बता दें की मुरादाबाद देश के प्रदूषित शहरों में ऊपर की श्रेणी में है। पिछले साल अक्टूबर में शहर देश में सबसे प्रदूषित शहर कई दिन तक रहा था। जिसको लेकर एनजीटी ने भी स्थानीय अधिकारीयों को नोटिस देकर इस पर लगाम लगाने की बात कही थी। शहर की दूषित हवा का मानक भी खरनाक स्तर पर पहुंच गया था। जिसे मानव शरीर के लिए काफी घातक बताया गया। लेकिन कुछ दिन की सख्ती के बाद अभी भी कोई ठोस इंतजाम नहीं हुए हैं।

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ई कचरा पर नहीं लग रही लगाम

महानगर में सबसे ज्यादा प्रदूषण रामगंगा नदी में है। जिससे इसका अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया है। यहां बड़े पैमाने पर फैक्ट्रियों से निकला कचरा नदी में बहाया जा रहा है।इसके अलावा ई कचरा भारी मात्रा में रामगंगा नदी के आसपास जलाया जाता है। जिससे न सिर्फ नदी में प्रदूषण बढ़ रह है,बल्कि शहर में हवा भी जहरीली होती जा रही है। कई बार एनजीटी की सख्ती के बाद भी स्थानीय प्रशासन इस पर रोक नहीं लगा सका है।

 

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