बिहार के छोटे से गांव से निकल इसरो की परीक्षा के टॉपर बने रजत कुमार-देखें वीडियो

रजत कुमार सिंह के मुताबिक देशभर के करीब साढ़े तीन लाख युवाओं ने इसरो की परीक्षा में हिस्सा लिया था जिनमें से 309 को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था।

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Updated: 13 Nov 2017, 09:39 PM IST

मुरादाबाद: एक बार फिर महानगर के एक लड़के ने पीतल नगरी का नाम रोशन किया है। जी हां हाल ही में सम्पन्न हुई इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन यानि इसरो के ऑल इंडिया टेस्ट में शहर की बुद्धि विहार कालोनी में रहने वाले रजत कुमार सिंह ने टॉप किया है। परीक्षा का परिणाम शनिवार को घोषित हुआ। जिसके बाद उनके परिवार और रिश्तेदारों में खुशी की लहर दौड़ गई है। इस परीक्षा में देश भर से साढ़े तीन लाख छात्रों ने भाग लिया था जिनमें से 309 को इंटरव्यू के लिए चुना गया था। इन सभी को पछाड़कर रजत ने इतिहास रच दिया।

पत्रिका से बातचीत में रजत ने इसके पीछे कड़ी मेहतन और परिवार का सहयोग बताया। आपको बता दें कि रजत कुमार सिंह मूल रूप से बिहार के सिताबदियारा गांव के रहने वाले हैं। यह गांव लोकनायक जयप्रकाश नारायण का पैतृक गांव है। जेपी आंदोलन के बाद से इस गांव का नाम एक बार फिर रजत कुमार सिंह के नाम से रोशन हुआ है।

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topper rajat

रजत कुमार सिंह के मुताबिक देशभर के करीब साढ़े तीन लाख युवाओं ने इस परीक्षा में हिस्सा लिया था। इस परीक्षा का परिणाम पता चलने के बाद बुद्धि विहार स्थित रजत के घर में खुशी की लहर दौड़ गई। परिवार के लोगों, दोस्तों और परिचितों ने घर पहुंचकर रजत का मुंह मीठा कराया। आईआईटी दिल्ली से मैकेनिकल ट्रेड से एमटेक कर रहे रजत ने इसरो की इस परीक्षा में पहले ही प्रयास में यह शानदार सफलता हासिल की।

रजत ने इससे पहले पंजाब से बीटेक किया है। अभी वे एमटेक प्रथम वर्ष में हैं और पहले ही प्रयास में उन्होंने सफलता प्राप्त की है। रजत ने प्रारंभिक शिक्षा महानगर के केसीएम स्कूल से की है। रजत के पिता अरुण कुमार सिंह निजी क्षेत्र की कंपनी गैलवेनो इंडिया में कार्यरत हैं। रजत का परिवार मूल रूप से बिहार के छपरा जिले के गांव सिताबदियारा का रहने वाला है।

फिलहाल अभी वे परिवार समेत बुद्धि विहार कालोनी में रह रहे हैं। रजत की बड़ी बहन राखी सिंह पंजाब नेशनल बैंक में हैं, जबकि छोटी बहन रजनीं सिंह भी इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहीं हैं, जबकि छोटा भाई वरुण सिंह अभी ग्यारहवीं की पढ़ाई केसीएम स्कूल से कर रहा है।

rajat with his mother

रजत ने बताया कि उनके पिताजी ने हमेशा उन्हें सरकारी रिसर्च सेंटर के लिए प्रेरित किया, जिस कारण उनके मन में भी रिसर्च के फील्ड में जाने की इच्छा जगी। उनका यह सपना आज पूरा हो गया। प्रारंभिक परीक्षा के बाद 309 परीक्षार्थी इंटरव्यू के लिए सेलेक्ट हुए थे। जिसमें इंटरव्यू में रजत को 83.11 नम्बर मिले।

रजत की माने तो इंटरव्यू पैनल ने उनसे एक सवाल किया कि इसरो का लास्ट मिशन फेल क्यों हुआ, रजत के जवाब से पैनल काफी प्रभावित हुआ था, यही नहीं अन्य परीक्षार्थियों के मुकाबले उनका इंटरव्यू सबसे अधिक समय तक चला था। रजत अब इसरो से जुड़कर देश के लिए और उपलब्धियां बटोरना चाहते हैं।

मंगलयान-2 से जुड़ेंगे रजत
रजत को अब इसरो में रहकर अंतरिक्ष विज्ञान समझने के साथ ही वहां ट्रेनिंग का भी मौका मिलेगा। इस दौरान वो कई बड़े प्रोजेक्ट से भी जुड़ेंगे। बताया जा रहा है वो मंगलयान टू के साथ भी जुड़ेंगे। इसके साथ ही रॉकेट डिजाइन और उसे अंतरिक्ष में सफलता पूर्वक भेजने में भी भूमिका निभाएंगे।

रजत भी वहीं पढ़े जहां जेपी ने की थी पढ़ाई
बता दें कि रजत सिताबदियारा लाला टोला के उसी स्कूल के छात्र हैं, जहां कभी देश में आंदोलन की अलख जगाने वाले लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने शिक्षा हासिल की थी।

देश की कठिन परीक्षा है इसरो
बैंगलुरु में रहकर पढ़ाई कर रहे रजत का बचपन छपरा के सिताब दियारा में ही गुजरा है। देश की कठिन परीक्षाओं मे से एक इसरो एग्जाम को रजत ने पहले ही प्रयास में न सिर्फ पास किया बल्कि टॉप कर सबको हैरान कर दिया है।

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