पुलिस कर्मचारियों को मिले रिवार्ड के 16 लाख


11 महीने से पेंडिंग पड़ी थी इनाम की धनराशि

 

 

By: Vivek Shrivastav

Published: 19 Jan 2019, 08:30 AM IST

मुरैना. अपराधियों की गिरफ्तारी पर घोषित रिवार्ड तथा वारंटों की तामील पर मिलने वाले पुरस्कार के रूप में 16 लाख रुपए की धनराशि पुलिस कर्मचारियों के खाते में आई है। इस राशि का पिछले 10-11 माह से कर्मचारियों को इंतजार था। खास बात यह कि कुछ कर्मचारियों को तो इनाम के रूप में बड़ा अमाउंट मिला है।
वारंटियों की गिरफ्तारी पर घोषित रिवार्ड की राशि लंबे समय से पुलिस कर्मचारियों को नहीं मिल रही थी। क्योंकि इसके लिए विभागीय स्तर पर कोई प्रयास नहीं किया जा रहा था। इसी तरह वारंटों की तामील कराने पर मिलने वाले इनाम की राशि भी लंबित पड़ी हुई थी। बताया गया है कि अलग-अलग समयावधि के वारंटों की तामील कराने पर पुलिस अधीक्षक स्तर से इनाम की राशि तय की जाती है। लेकिन यह पैसा कर्मचारियों को लंबे समय से नहीं मिल रहा था। हाल ही में निवृतमान पुलिस अधीक्षक अमित सांघी ने रिवार्ड और वारंट तामीली के इनाम की धनराशि का कैलकुलेेशन कराया तो पता चला कि यह 16 लाख रुपए है। इसके बाद उन्होंने विभागीय स्तर पर प्रयास किया तो पूरा पैसा कर्मचारियों के खातों में आ गया। इनाम की राशि खातों में आने के बाद कर्मचारी खुश हैं।


हवलदार को मिले 42 हजार


बड़ी संख्या में वारंट तामील कराने वाले कुछ पुलिस कर्मचारियों को इनाम के रूप में बड़ी धनराशि प्राप्त हुई है। इस लिहाज से कोतवाली में पदस्थ हवलदार किशन सिंह पहले नंबर पर हैं। उन्हें वारंट तामील कराने के लिए 42 हजार रुपए का इनाम मिला है। यह राशि खाते में आने के बाद वे उत्साहित हैं। इसी तरह कुछ और कर्मचारियों को भी इनाम के रूप में 20-30 हजार रुपए मिले हैं।

 

कैदी वार्ड के विस्तार की योजना ठंडे बस्ते में


जिला अस्पताल में कैदी वार्ड के विस्तार की योजना ठंडे बस्ते में पड़ी हुई है। जबकि इस वजह से कैदियों के उपचार में जेल प्रबंधन के समक्ष अक्सर व्यावहारिक परेशानियां सामने आती रही हैं। कैदियों को भर्ती रखकर उन्हें उपचार देने के लिए जिला अस्पताल में जो वार्ड है, उसमें सिर्फ दो पलंग उपलब्ध हैं। ऐसे में यदि कभी बीमार कैदियों की संख्या अधिक हो जाती है तो उन्हें भर्ती रखने में दिक्कत होती है। उल्लेखनीय है कि जिला जेल के अलावा अंबाह, जौरा व सबलगढ़ की उपजेलों से भी कई बार गंभीर बीमार कैदी यहां उपचार के लिए आते हैं। समस्या यह है कि यदि दो से अधिक कैदियों को भर्ती रखने की जरूरत पड़ जाए तो कई बार पहले से भर्ती कैदियों को डिस्चार्ज करना पड़ता है। फिर चाहे भले ही वे स्वस्थ न हुए हों। कुछ समय पहले कैदी वार्ड के विस्तार की योजना जिला अस्पताल प्रबंधन ने बनाई थी, लेकिन इस पर अभी तक अमल नहीं किया गया है।

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