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9.69 करोड़ के पॉलीहाउस पर ताला, दम तोड़ गई हाइटेक खेती की उम्मीद

इंडो-इजराइल एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट को मुरैना के नूराबाद में हाइब्रिड पौधों को किया जाना था विकसित।

मोरेना

Published: December 22, 2021 08:03:40 pm

ऋषि कुमार जायसवाल

मुरैना. अन्नदाता को उच्च गुणवत्ता वाली प्रमुख सब्जी फसलों की खेती के पौधे तैयार करने की महत्वाकांशी योजना ताले में कैद हो गई है। एककृत बागवानी विकास मिशन के तहत मुरैना जिले के नूराबाद क्षेत्र में 15 हैक्टेयर क्षेत्र में इंडो-इजराइल एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट के तहत सब्जियों के लिए उत्कृष्टता केन्द्र (पॉलीहाउस) खोला गया था। इसमें इजराइल की आधुनिक सिंचाई पद्धति, जल में घुलनशील उर्वरकों का प्रदर्शन, एकीकृत पौध संरक्षण प्रबंधन का प्रदर्शन, ग्रेडिंग, पैकैजिंग और कोल्ड चेन सहित फसल के बाद प्रबंधन संरचना की स्थापना करना है।

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9.69 करोड़ के पॉलीहाउस पर ताला, दम तोड़ गई हाइटेक खेती की उम्मीद

यहां तैयार किए हाइब्रिड सब्जियों के पौधों को संभाग के किसानों को उपलब्ध कराने थे, जिससे उनके लिए खेती फायदा का सौदा बन सके। लेकिन जिम्मेदारों की अनदेखी और लचर कार्यप्रणाली के सरकार के मंसूबों पर पानी फिर गया है। किसानों के इस केन्द्र का लाभ नहीं मिल पा रहा है।


केन्द्रीय कृषि मंत्री ने किया था शुभारंभ

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भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के तत्वावधान में इस उत्कृष्टता केन्द्र का शुभारंभ 25 सितंबर 2020 को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने किया था। केन्द्र को 9.69 करोड़ की लागत से विकसित किया गया था। यहां इजराइजल देश की आधुनिक तकनीकी से उच्च गुणवत्ता के पौधों के किस्म को विकसित किया जाना था। कम पानी की बेहतर पद्धति से भारतीय किस्मों के अनुकूल क्षेत्र अनुसार पहचान और प्रदर्शन, पौधों की आवश्यकता अनुसार आधुनिक सिंचाई पद्धति, जल में घुलनशील उर्वरकों का प्रदर्शन, एकीकृत पौध संरक्षण प्रबंधन का प्रदर्शन, ग्रेडिंग, पैकैजिंग और कोल्ड चेन सहित फसल के बाद प्रबंधन संरचना की स्थापना करना था।


उच्च गुणवत्ता के पौधे तैयार करना उद्देश्य

उत्कृष्टता केंद्र का मुख्य उद्देश्य मध्य प्रदेश में उपयुक्त कृषि जलवायु क्षेत्रों में चयनित उच्च गुणवत्ता वाली प्रमुख सब्जी फसलों की खेती के लिए आदर्श कृषि कार्यमाला को क्षेत्र की आवश्यकता अनुसार विकसित कर कृषकों को सेन्टर में प्रशिक्षित करना था। लेकिन उत्कृष्टता केन्द्र पर ताला पड़ा रहता है। इस केंद्र का मुख्य फोकस नर्सरी प्रबंधन के अन्तर्गत किसानों को लाभ पहुंचाने के लिए उच्च गुणवत्ता के पौधे क्षेत्र की आवश्यकता अनुसार तैयार कर रोपण के लिए कृषकों को उपलब्ध कराना है। साथ ही स्थानीय किसानों के लिए सब्जियों की छंटाई और ग्रेडिंग के लिए इनक्यूवेशन केन्द्र भी स्थापित किया जाएगा। इससे उद्यमी या उत्पादक अपने उत्पाद को प्रसंस्करण कर बाजार में ले जा सकेंगे।


2000 कृषकों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य

उत्कृष्टता केंद्र किसानों के लाभ के लिए सिंचाई और फर्टिगेशन, नर्सरी, केनोपी और मूल्य संवर्धन जैसे केन्द्रित क्षेत्रों पर आधारित एक प्रशिक्षण मॉडल तैयार करेगा। उत्कृष्टता केन्द्र द्वारा लगभग 2 हजार किसानों को प्रतिवर्ष प्रशिक्षित करने का भी लक्ष्य है, लेकिन कोई गतिविधि होती नजर नहीं आती।


इन सब्जियों के पौधे किए जाने हैं तैयार

इजराल के सहयोग से तैयार पॉलीहाउस में टमाटर, चैरी, ककड़ी और शिमला मिर्च फसल का उत्पादन किया जाना था। खुले क्षेत्र में कद्दू वर्गीय, गोभी वर्गीय, अगेती गोभी वर्गीय, धनिया, बैगन, मिर्च, खीरा आदि फसल का उत्पादन किया जाना है। मौसम स्टेशन,ग्रेडिंग सहित पैक हाउस, पैकिंग लाइन, भण्डारण आदि सुविधाएं भी विकसित की जानी थीं। लेकिन इस वक्त नर्सरी पर काम बंद है, ताला लगा है। वैज्ञानिक आधार पर कम पानी चाहने वाली वैरायटी को यहां विकसित करने की मंशा पर ग्रहण लग गया है।


मरम्मत के लिए टेंडर दरें स्वीकृत नहीं

जानकारों का कहना है कि उद्यानिकी विभाग में नई पद्धति अपनाने के लिए टेंडर दर निर्धारित हैं। लेकिन विभिन्न योजना में मरम्मत के लिए टेंडर की दरें स्वीकृत नहीं हैं। इस कारण इंडो-इजराइल एग्रीकल्चर प्रोजेक्ट धरातल पर नहीं उतर पाया है।

काम बंद है- सहायक संचालक उद्यानिकी

मुरैना सहायक संचालक उद्यानिकी अरुण कुमार गोयल का कहना है कि, काम बंद है, केंद्र पर ताला लगा है। गर्मियों में आंधी की वजह से पॉली हाउस की पॉलीथिन फट गई और ढांचा भी क्षतिग्रस्त हो गया, तब से अब तक उसमें काम शुरू नहीं हो पाया है। यहां किसानों के प्रशिक्षण का एक सत्र चला था लेकिन अव्यवस्था के कारण प्रशिक्षक और किसान दोनों ने ही इससे दूरी बना ली।


ऐसा केंद्र शुरू करने से क्या फायदा- किसान

मुरैना के किसान पूरन सिंह डंडोतिया ने बताया कि, नूराबाद में सब्जियों की उन्नत पौध तैयार करने के लिए एक केंद्र की स्थापना करने की जानकारी तो मिली थी। उसके बाद एक-दो बार जाकर देखा तो वहां कुछ दिखा नहीं। ऐसा केंद्र शुरू करने से क्या फायदा।

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