scriptBig fundamental lapses in the hospital building | 45 करोड़ की लागत से बने अस्पताल भवन में बड़ी बुनियादी चूकें | Patrika News

45 करोड़ की लागत से बने अस्पताल भवन में बड़ी बुनियादी चूकें

स्वास्थ्य सेवाओं और सुविधाओं को नया आयाम देने के लिहाज से तैयार कराए गए 45 करोड़ रुपए की लागत के नए अस्पताल भवन में बुनियादी खामियों की भरमार है। समय रहते दूर नहीं किया गया तो व्यावहारिक रूप से पूरी क्षमता के साथ अस्पताल का संचालन मुश्किल होगा। यह हालात तब हैं जब सुविधाओं और व्यवस्थाओं के नाम पर निर्माण कार्य करीब डेढ़ साल तक पिछड़ चुका है।

मोरेना

Updated: November 18, 2021 08:24:41 pm

रवींद्र सिंह कुशवाह, मुरैना. कोरोना संक्रमण का खतरा कम होने और सब कुछ पर पटरी पर आने के बावजूद इस साल मार्च से काम पूरा होने का समय हर बार 10-15 दिन बढ़ाया जा रहा है। ऐसा करते हुए आठ माह से ज्यादा समय बीत चुका है। अभी भी अस्पताल प्रबंधन यह कह पाने की स्थिति में नहीं है कि नया अस्पताल भवन पूरी क्षमता और कुशलता के साथ कब तक चालू करवा लिया जाएगा। काम के वर्तमान स्तर को देखते हुए दिसंबर के अंत तक भी अस्पताल भवन का हस्तांतरण मुश्किल दिख रहा है। ऐसे में अस्पताल भवन की लागत पर भी असर पड़ सकता है वहीं जिले के लोगों को सुविधाएं और सेवाएं भी समय पर नहीं मिल पा रही हैं। हालांकि कोरेाना काल में बढ़े मरीजों के दबाव और बाद में डेंगू के खतरे के बीच नवीन अस्पताल भवन के एक हिस्से में 120 बिस्तर का मेडिकल वार्ड शुरू करवा दिया गया है। लेकिन उससे आसपास के क्षेत्र में गंदगी भी फैल रही है। इसके अलावा इलेक्ट्रिफिकेशन का कार्य भी अभी अधूरा पड़ा है। काम की गति को देखकर लगता है कि इसमें भी नवंबर का पूरा माह लग सकता है। ऐसे में अस्पताल भवन के पूरी तरह से सुसज्जित होकर हस्तांतरण की प्रक्रिया दिसंबर के अंत या जनवरी के शुरू तक खिंच सकती है।
जिला अस्पताल का नया भवन
मुरैना जिला अस्पताल का नया भवन
आईसीयू में आपात द्वार पर उदासीनता
नवीन अस्पताल भवन में गाइनिक, मेडिकल, सर्जरी, पीकू एवं एसएनसीयू सहित करीब आधा दर्जन आइसीयू बनाए गए हैं। लेकिन आपात स्थिति में सुरक्षा के इंतजामों की घोर अनदेखी की गई है। जबकि मई 2016 में जिला अस्पताल के एसएनसीयू में शॉर्ट सर्किट से लगी आग के बाद बड़ी मुश्किल से बच्चों के बचाया जा सका। इस हादसे सबक लेकर एसएनसीयू में दूसरा दरवाजा खोला गया था। लेकिन नवीन भवन में भी केवल एक ही दरवाजा रखा गया है। ऐसी चूक प्रत्येक आइसीयू में की गई है। जबकि यहां करीब 28 बिस्तर की व्यवस्था रहेगी।
अलग से टॉयलेट तक नहीं
नवीन भवन में चिकित्सकों, ड्यूटी स्टॉफ और मरीजों के लिए कॉलन टॉयलेट का निर्माण कराया गया है। यह व्यावहारिक रूप से समस्या का मामला है। इस पर निर्माण एजेंसी के समक्ष स्वास्थ्य प्रशासन ने आपत्ति भी दर्ज कराई है, लेकिन एजेंसी ने नक्शे के अनुसार निर्माण की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया है। नया अस्पताल भवन शुरू होने पर यह बड़ी विसंगति सामने आने वाली है।
ड्यूटी रूम के स्थल निर्धारण पर भी विवाद
नवीन अस्पताल भवन में चिकित्सक और स्टॉफ नर्स का ड्यूटी रूम बगल में ही रखे गए हैं। जानकारों का मानना है कि ड्यूटी चिकित्सक और स्टॉफ के कक्ष दूर रखे जाते हैं। कई बार हंगामा होने पर महिला कर्मचारियों को व्यावहारिक परेशानियों का सामना करना पड़ जाता है।
फायर सेफ्टी सिस्टम ऑपरेटर नहीं
अस्पताल भवन में फायर सेफ्टी सिस्टम स्थापित किया गया है। लेकिन अभी कनेक्शन नहीं हो पाया है। इसके अलावा उसे संचालित करने वाले कर्मचारी भी नहीं आ पाए हैं। यही स्थिति अस्पताल में लगवाई छह लिफ्ट के लिए है। इलेक्ट्रिशियन भी उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा भी कर्मचारियों की कमी है।
80 से ज्यादा का चाहिए सपोर्टिंग स्टाफ
जिला अस्पताल के नवीन भवन को पूरी क्षमता के साथ संचालित करने के लिए 80ज्यादा का सपोर्टिंग स्टॉफ चाहिए। इसमें तीन शिफ्ट में करीब 18 कर्मचारी तो लिफ्ट में ही लगेंगे। इसके इलावा फायर सेफ्टी सिस्टम, आक्सीजन पाइंट आदि के अलावा सुरक्षा के लिए कर्मचारी चाहिए।
अस्पताल का नंबर गणित
45 करोड़ रुपए की लागत से हो रहा है निर्माण।
3 मंजिला भवन आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगा।
6 लिफ्ट लगाई गई हैं मरीजों व आने-जाने वालों के लिए।
700 के करीब मरीज अभी भर्ती हैं जिला अस्पताल में।
70 के करीब चिकित्सक पदस्थ हैं जिला अस्पताल में।
कथन-
-जिला अस्पताल का नवीन भवन तो अच्छा बना है, लेकिन जनता के हित में जल्द शुरू कराया जाना चाहिए। आईसीयू सहित अन्य बुनियादी समस्याएं भी दूर होनी चाहिए। सुरक्षा पर खास फोकस स्वास्थ्य दुष्यंत श्रीवास्तव, एडवोकेट, मुरैना

नवीन भवन में कुछ व्यावहारिक और बुनियादी खामियां सामने आई हैं। आईसीयू में दो की जगह एक ही दरवाजा रखा गया है, टॉयलेट भी कॉमन कर दिए हैं। इस संबंध में वरिष्ठ स्तर पर मामला संज्ञान में भी लाया गया है, सुधार होने की उम्मीद है।
डॉ. विनोद गुप्ता, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, मुरैना

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