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मोरेना

24 हाईस्कूल व दो हायरसेकेंडरी स्कूल के लिए नहीं बने भवन, प्राइमरी और मिडिल की बिल्डिंग में हो रहा संचालन

– चार के लिए राशि आई जिनमें से एक की बिल्डिंग तैयार और तीन के हो चुके हैं टेंडर
– अधिकारी बोले बिल्डिंग निर्माण के लिए भेज चुके हैं शासन को प्रस्ताव, नहीं आई राशि, जिनकी राशि आई, उनके भवन निर्माण की प्रक्रिया जारी

मोरेनाJul 05, 2024 / 10:18 pm

Ashok Sharma

मुरैना. जिले के 26 ऐसे मिडिल स्कूल है जिनमें से 24 हाईस्कूल और दो हायर सेकंडरी स्कूल के लिए उन्नयन हुआ था। जिनमें से कुछ स्कूल ऐसे हैं जिनको डेढ़ दशक से भी अधिक समय हो गया लेकिन उनके लिए बिल्डिंग नहीं बन सकी है। आज भी ये स्कूल प्राइमरी व मिडिल स्कूल के पुराने व जर्जर भवनों में संचालित हो रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा मिशन के तहत इन स्कूलों की बिल्डिग स्वीकृति होनी थी। इनमें से चार्र स्कूलों के लिए राशि आई थी जिनमें से शासकीय हाईस्कूल रिठौना की बिल्डिंग बनकर तैयार हो गई है और शिक्षा विभाग को हैंडओवर भी हो गई है। वहीं शासकीय हायरसेकेंडरी स्कूल मुंगावली, शासकीय हायरसेकेंडरी स्कूल नूराबाद व नवीन हाईस्कूल मुरैना की बिल्डिंग निर्माण के लिए शासन से स्वीकृति मिल चुकी है, इनकी बिल्डिंग निर्माण का टेंडर हो चुका है। विभाग की मानें तो जिन स्कूलों के भवन नहीं हैं, उनके लिए हर साल जानकारी वरिष्ठ कार्यालय को भेज जा रही है लेकिन शासन स्तर से कोई अमल नहीं किया गया इसलिए स्कूलों के लिए नए भवन स्वीकृत नहीं हो सके। एक ही बिल्डिंग में संचालित होने पर प्राइमरी व मिडिल और हाईस्कूल की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है।
16 साल से प्राइमरी स्कूल के दो कमरों में संचालित है हासे स्कूल
शासकीय हायर सेकंडरी स्कूल मुंगावली 2008 में प्रायमरी स्कूल में शुरू हुआ था। आज 16 साल हो गए, स्कूल की बिल्डिंग नहीं बन सकी है, प्रायमरी स्कूल के मात्र दो कक्षों में स्कूल चल रहा है। स्थिति यह है कि दो कक्षाएं स्कूल बाहर खुले में लगानी पड़ती हैं। बारिश होने पर दो कमरों में ही कंबाइड कक्षाएं करनी पड़ती हैं जिससे शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। इस स्कूल में पिछली साल 291 विद्यार्थी थे अभी प्रवेश चल रहे हैं एवं 22 कर्मचारियों का स्टाफ मौजूद है। इस स्कूल के भवन की स्थिति भी बहुत दयनीय हैं। स्कूल की बाउंड्री चारों तरफ से क्षतिग्रस्त है, इसमें आवारा पशु घुस जाते हैं जो बच्चे व स्टाफ के साथ हादसा कारित कर सकते हैं।
बनना था स्कूल भवन, बना दिए अतिरिक्त कक्ष, लाखों रुपए अनुपयोगी साबित
सरकारी धन का किस तरह दुरुपयोग किया जा रहा है, इसका उदाहरण शासकीय हाईस्कूल हिंगोना खुर्द के अतिरिक्त कक्ष के निर्माण से लगाया जा सकता है। शासकीय हाईस्कूल हिंगोना खुर्द के लिए स्कूल भवन स्वीकृत होना था, वहां राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा मिशन ने वर्ष 2010-11 में क्राफ्ट रूम, लैब, लाइब्रेरी के निर्माण के लिए तीन अतिरिक्त कक्ष स्वीकृत कर दिए थे, जो वर्ष 2012 में बनकर तैयार हो गए थे। यहां स्कूल भवन नहीं बन सका। इन कक्षों के निर्माण पर लाखों रुपए खर्च हो गए लेकिन वह पैसा बेकार चला गया क्योंकि स्कूल के लिए जगह पर्याप्त नहीं होने से स्कूल संचालित नहीं हो पा रहा है। अतिरिक्त कक्षों में पड़ा सामान कबाड़ हो रहा है।
नौ बीघा जमीन एलॉट हुई थी, उस पर किया अतिक्रमण
शासकीय हाईस्कूल हिंगोना खुर्द के लिए नौ बीघा जमीन एलॉट हुई थी लेकिन शिक्षा विभाग के लोगों की लापरवाही के चलते यहां बिल्डिंग न बनाते हुए अतिरिक्त कक्ष बना दिए। इन कक्षों के अलावा पूरे नौ बीघा जमीन पर रहवासियों ने अतिक्रमण कर लिया है। किसी ने पक्का मकान, किसी ने झोपड़ी व कच्चा मकान बनाकर कब्जा कर लिया है। परिसर में कंडे भी तैयार किए जा रहे हैं। बिल्डिंग तैयार नहीं होने पर हाइस्कूल की छात्र छात्राओं की कक्षाएं शासकीय मिडिल स्कूल परिसर में लग रही हैं। हालांकि मिडिल स्कूल परिसर में पहले से प्रायमरी स्कूल, पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केन्द्र संचालित होने से जगह कम है लेकिन मजबूरी में हाईस्कूल संचालित किया जा रहा है। विभाग हाइस्कूल के लिए बिल्डिंग की व्यवस्था नहीं कर सका।
हैडपंप खनन कराकर निकाली एक लाख से अधिक की राशि
पिछले एक दशक से हिंगोना में हाईस्कूल संचालित नहीं हैं, उसके बाद भी कक्षों के सामने खुले में हैडपंप का बोर करा दिया गया है। उस बोर के खनन पर एक लाख से अधिक की राशि खर्च की जा चुकी है। विडंवना इस बात की है कि जब वहां स्कूल संचालित नहीं हैं तो फिर स्कूल के नाम से बोर कराने की क्या जरूरत थी। खास बात यह है कि नल जल योजना की टंकी अतिरिक्त कक्षों के सामने बनी हुई है, पानी के लिए वहां से नल कनेक्शन लिया जा सकता था।
विभाग के रिकॉर्ड में नहीं हैं हिंगोना हाईस्कूल
शिक्षा विभाग के पास हिंगोना हाईस्कूल के नवीन भवन को कोई रिकॉर्ड नहीं हैं, वहां सिर्फ इतना दर्ज है कि वर्ष 2010-11 में क्राफ्ट रूम, लाइब्रेरी, लैब के लिए अतिरिक्त कक्ष स्वीकृति हुए थे। उनके निर्माण के लिए कितनी राशि स्वीकृति हुई, किसने बनाए और किसने स्वीकृति दी, इसकी कोई फाइल विभाग के पास नहीं हैं। हाइस्कूल हिंगोना की फाइल के बारे में विभाग के जिम्मेदार कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
इन स्कूलों की बननी थी बिल्डिंग
शासकीय हाईस्कूल बिंडवा, हाईस्कूल तरसमां, जोंहाकला, नयापुरा, डंडोली, रिठौंना, भुआ का पुरा, नावली, जारह, छिछावली, माता बसैया, बर्रेंडा, जड़ेरुआ, भैंसोरा, लालौरकला, जींगनी, नवीन हाईस्कूल क्रमांक एक, गलेथा, खनेता, चिन्नौंनी चंबल, धोंधा, कैमारा कला, रामपहाड़ी, निटेहरा एवं शासकीय हायरसेकेंडरी स्कूल मुंगावली, कन्या हायरसेकेंडरी स्कूल नूराबाद शामिल हैं। इनमें से कुछ स्कूलों का उन्नयन होकर हायरसेकेंडरी स्कूल हो गए हैं।
फैक्ट फाइल
  • 24 हाईस्कूल व 2 हायरसेकेंडरी स्कूल के नहीं बन सके भवन।
  • 2008 में उन्नयन हुआ था मुंगावली हाईस्कूल का।
  • 2010-11 में स्वीकृति हुए थे हिंगोना खुर्द हाईस्कूल के अतिरिक्त कक्ष।
  • 2012 में बनकर तैयार हो गए थे हिंगोना हाईस्कूल के अतिरिक्त कक्ष।
  • 09 बीघा एलॉट हुई थी हिंगोना हाईस्कूल के लिए जमीन।
    कथन
  • वर्ष 2008 में हाईस्कूल शुरू हुआ था उसके करीब पांच-छह साल बाद हायरसेकेंडरी में उन्नयन हो गया है लेकिन बिल्डिंग के अभाव में प्रायमरी स्कूल के दो कमरों से काम चलाना पड़ रहा है। कमरे के अभाव में दो कक्षाएं बाहर खुले में लगानी पड़ती हैं और बारिश होने पर दो कमरों में ही कंबाइड करनी पड़ती हैं। समय समय पर वरिष्ठ अधिकारियों को लिखा गया है लेकिन बिल्डिंग का निर्माण नहीं हो सका है।
    सतेन्द्र सिंह जादौन, प्रभारी प्राचार्य, शासकीय हायरसेकेंडरी स्कूल, मुंगावली
  • हाईस्कूल के लिए बिल्डिंग स्वीकृति होनी थी लेकिन तीन अतिरिक्त कक्ष बना दिए हैं। नौ बीघा जमीन एलॉट की गई थी, वहां तीन कक्षों के अलावा पूरी जमीन पर अतिक्रमण है। जो अतिरिक्त कक्ष बनाए गए, वह भी जर्जर हालत में पहुंच गए हैं। पूर्व में प्राचार्य रहे उनके द्वारा कई बार पत्राचार किया गया लेकिन अतिक्रमण नहीं हट सका। इसलिए अभी तक मिडिल की बिल्डिंग में स्कूल संचालित कर रहे हैं।
    गीता मूढोतिया, प्रभारी प्राचार्य, शासकीहाईस्कूल, हिंगोना खुर्द
    आरएमएसए के एडीपीसी महेश मावई से सीधी बात
    पत्रिका: जिले के 26 हाईस्कूल व हायरसेकेंडरी स्कूलों के लिए भवन की व्यवस्था नहीं हैं, कैसे संचालित होते हैं।
    एडीपीसी: इनमें से रिठौना स्कूल की बिल्डिंग बन चुकी है, उसको हैंडओवर भी कर लिया है। वहीं मुंगावली, नूराबाद और नवीन हाइस्कूल मुरैना की बिल्डिंग निर्माण के लिए स्वीकृति मिल गई, इनके टेंंडर हो चुके हैं, अन्य की स्वीकृति नहीं मिली है।
    पत्रिका: स्कूलों की बिल्डिंग के लिए शासन को लिखा गया है क्या।
    एडीपीसी: हर साल वार्षिक प्रतिवेदन जाता है, उसमें जिन स्कूलों में बिल्डिंग नहीं हैं, उनको उल्लेख किया जाता है लेकिन शासन से अभी तक स्वीकृति नहीं मिली है।
    पत्रिका: हिंगोना खुर्द हाइस्कूल की बिल्डिंग के लिए नौ बीघा जमीन एलॉट हुई थी, उस पर लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है।
    एडीपीसी: वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर स्कूल बिल्डिंग की जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाया जाएगा।

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