scriptChilling in the cold, 72 schools do not have buildings | ठंड में ठिठुरते नौनिहाल, 72 स्कूलों के पास नहीं हैं भवन | Patrika News

ठंड में ठिठुरते नौनिहाल, 72 स्कूलों के पास नहीं हैं भवन

- गर्मी में पेड़ के नीचे और बारिश में करनी पड़ती है छुट्टी
- खुले में संचालित हैं सरकारी स्कूल, शासन व प्रशासन का नहीं पसीजा दिल

मोरेना

Published: January 05, 2022 09:51:13 pm


मुरैना. शिक्षा के नाम पर सरकार करोड़ों का बजट हर साल पास करती है लेकिन मुरैना जिले के ७२ सरकारी स्कूल ऐसे हैं जिनको वर्षों बीत गए लेकिन शासन भवन नहीं दिला सका है। गर्मी हो ठंड बच्चे खुले में पढऩे को मजबूर हैं। बारिश में इन स्कूलों की छुट्टी करनी पड़ती है। इन दिनों भीषण सर्दी पड़ रही है। शीत लहर के बीच नोनिहाल ठिठुरते हुए स्कूल पहुंच रहे हैं और फिर खुले में बैठकर पढ़ते नजर आ रहे हैं।
मुरैना, अंबाह, पोरसा, जौरा, कैलारस, पहाडग़ढ़ और सबलगढ़ विकास खंड में ७२ स्कूल ऐसे हैं जो भवन विहीन हैं। इनके पास बिल्डिंग न होने पर बच्चे खुले में पढ़ रहे हैं। गर्मी में तो किसी तरह पेड़ के नीचे कक्षाएं लग जाती हैं लेकिन सर्दी व बारिश में ज्यादा परेशानी होती है। बारिश और कुछ समय सर्दी में भी छुट्टी करनी पड़ती है। इससे बड़ी विडंवना क्या होगी कि अधिकारी लगातार मॉनीटरिंग कर रहे हैं, उसके बाद भी इन नोनिहालों के बारे में किसी ने नहीं सोचा। कई बार बच्चे बीमार भी हुए हैं लेकिन उपचार कराने के बाद फिर से पढऩे उसी खुले मैंदान में पहुंच जाते हैं।
चारों तरफ पानी और शीत लहर व भीषण ठंड में ठिठुरते हुए दिखे बच्चे .........
जौरा विकास खंड के हनुमंत का पुरा मौजा सिहोरी स्कूल को पत्रिका प्रतिनिधि ने देखा। यहां वर्ष २०१३ से शासकीय प्राथमिक विद्यालय संचालित हैं। यहां से हर साल जानकारी विभाग को भेजी जाती है कि स्कूल भवन विहीन हैं। उसके बाद भी यथा स्थिति है। यहां १८ बच्चे अध्ययनरत हैं। बुधवार को यहां देखा कि चारों तरफ खेतों में फसल खड़ी थी, उसमें पानी चल रहा था और जबरदस्त शीत लहर चल रही थी और बच्चे ठिठुरते हुए खुले में बैठकर पढ़ रहे थे। इस स्कूल में१४ बच्चे हनुमंत का पुरा, चार बच्चे पास में ही स्थित जगन्नाथ का पुरा से आते हैं। यहां शिक्षक जीतेन्द्र सिंह नियमित स्कूल आ रहे हैं, भवन नहीं हैं फिर भी अपने कर्तव्य को निभा रहे हैं। खेतों में चारों तरफ पानी चल रहा है और बीच में खुली पड़ी जगह में स्कूल संचालित करके बच्चों को पढ़ा रहे हैं। शिक्षक जितेन्द्र सिंह का कहना हैं कि हर साल वार्षिक रिपोर्ट जाती है, उसमें यह जानकारी जाती है कि स्कूल के पास भवन नहीं हैं फिर भी पिछले नौ साल में स्कूल को भवन की व्यवस्था नहीं हो सकी है।
किस विकासखंड में कितने स्कूल भवन विहीन ......
विखं भवन विहीन स्कूल
मुरैना १६
अंबाह ०४
पोरसा १४
जौरा १६
कैलारस ०८
पहाडग़ढ़ ०९
भवन नहीं फिर भी खर्च कर हो जाते हैं लाखों रुपए ..........
सरकारी स्कूलों के मेंटीनेंस सहित अन्य मद में हर साल लाखों रुपए आते हैं। ये राशि वहीं खर्च की जा सकती हैं जिन स्कूलों की बिल्डिंग है लेकिन कुछ संस्था प्रमुख ऐसे हैं भवन नहीं होने के बाद भी उन्होंने धन राशि को ठिकाने लगा दिया है। पूर्व में जौरा बीआरसी मुन्नालाल यादव जिला शिक्षा अधिकारी व डीपीसी को जिंद पुरा स्कूल का प्रस्ताव दिया था जिसके पास भवन नहीं हैं फिर भी संस्था प्रमुख ने मेंटीनेंस की राशि खुदबुर्द कर दी। उक्त मामले में अधिकारियों ने अभी तक कोई कार्रवाई नहीं की है।
फैक्ट फाइल
- ७२ सरकारी स्कूलों के पास नहीं हैं भवन।
- ९६ हायरसेकेंडरी स्कूल हैं जिले में।
- ८६ हाईस्कूल हैं जिले में।
- ५५७ मिडिल स्कूल हैं जिले भर में।
- १५४१ प्रायमरी स्कूल हैं जिले भर में।
-१८५६ शिक्षक हैं हाईस्कूल व हायरसेकेंडरी में।
- ६००० से अधिक शिक्षक हैं पीएस व एम एस में।
कथन
- जिन स्कूलों की बिल्डिंग नहीं हैं, उनके प्रस्ताव राज्य शिक्षा केन्द्र को भेजे जा चुके हैं। वहां से स्वीकृति मिलने पर स्कूल भवनों के निर्माण की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।
ए के कुलश्रेष्ठ, सहायक यंत्री, जिला शिक्षा केन्द्र, मुरैना
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