जेडी की जांच में भी सीएमएचओ व अन्य दोषी, कार्रवाई सवालोंं के घेरे में

111 आशा कार्यकर्ताओं की नियम विरुद्ध चयन प्रक्रिया में कलेक्टर की जांच के बाद, सीएमएचओ सहित अन्य जेडी की जांच में भी दोषी पाए गए हैं। हालांकि जांच प्रतिवेदन मिशन संचालक व अन्य को भेजा जा चुका है या नहीं, इस पर संयुक्त संचालक जानकारी नहीं दे पाए। संबंधित सेक्शन प्रभारी उपलब्ध न होने की बात कही। चयन प्रक्रिया में दोषी ठहराए गए तत्कालीन सीएमओ को ही बाद में फिर प्रभार दे दिया गया।

By: Ravindra Kushwah

Published: 12 Feb 2021, 11:41 AM IST

मुरैना. ८८ ग्रामीण और 23 शहरी आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्तियां की गई थीं। नियमों का पालन नहीं होने से गलत नियुक्तियां मनमाने तरीके से की गई थीं। इसकी शिकायतें हुईं तो डीएसीएम (डिस्ट्रिक्ट कम्युनिटी मोबिलइाजर) के साथ वर्तमान सीएमएचओ पर भी उंगली उठाई गई थी। कई चरणों में हुई जांच और रिपोर्ट को हर स्तर पर दबाने के प्रयास हुए। लेकिन इसके बावजूद अक्टूबर 2019 में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की संचालक डॉ. छवि भारद्वाज ने डीसीएम को अनुशसनात्मक कार्रवाई के तहत संविदा सेवा समाप्ति का नोटिस दिया था। एनएचएम भोपाल की मिशन संचालक छवि भारद्वाज ने तत्कालीन कलेक्टर प्रियंका दास के प्रस्ताव पर 5 अक्टूबर 2019 को जारी नोटिस में तीन गंभीर आरोपों में दोषी ठहराया था। कलेक्टर ने यह प्रस्ताव 30 सितंबर 2019 को एनएचएम के लिए भेजा था।
दोबारा जांच के दिए थे आदेश
मिशन संचालक ने बाद में 22 नवंबर 2019 को प्रशासन की जांच और कलेक्टर के प्रतिवेदन से सहमत होते हुए थी क्षेत्रीय संयुक्त संचालक डॉ. एके दीक्षित को विभागीय तौर पर जांच कराने के लिए आदेशित किया गया। डॉ. दीक्षित ने यह जांच करवा ली है। क्षेत्रीय संयुक्त संचालक का स्पष्ट कहना है कि इसमें वर्तमान सीएमएचओ सहित अन्य सभी दोषी पाए गए हैं। लेकिन जांच प्रतिवेदन भेजा जा चुका है या नहीं, यह ठोस तौर पर नहीं बता पाए हैं।
स्टोर से सामान की हेरफेर में भी जांच ठंडे बस्ते में
डेढ़ साल पहले सबलगढ़ के दवा स्टोर में भी व्यापक धांधली सामने आई थी। करीब 50 लाख रुपए का सामान ऑनलाइन ही यहां से वहां पहुंचाकर खुर्दबुर्द किए जाने का मामला था। बाद में संदेह के दायरे में आए लोगों को ही पासवर्ड देकर उस सामान को ऑनलाइन ही दुरुस्त करके बचाने का प्रयास किया गया।
क्या था कलेक्टर के प्रस्ताव में
तत्कालीन कलेक्टर द्वारा भेजे गए पत्र और संलग्न दस्तावेजों के आधार पर डीसीएम को संविदा सेवा समाप्त करने का नोटिस दिया गया था। नोटिस में संविदा जिला कम्युनिटी मोबिलाईजर द्वाारा पद पर रहते हुए नियम विरुद्ध करने का आरोप था। वर्ष 2016-17 में 18 और वर्ष 2017-18 में कुल 88 ग्रामीण आशाओं के चयन में अनियमितता की गई है।
-शहरी आशाओं के चयन में संंबंधित वार्ड का ठहराव-प्रस्ताव नहीं होने, मलिन बस्तियों उपेक्षा से 23 शहरी आशाओं का चयन निरस्त कर डीसीएम को दोषी ठहराया गया है। बाद में इन कार्यकर्ताओं को हटा दिया गया।
-वर्ष 2018 में आशा सहयोगी चयन प्रक्रिया में भी आवेदनों में हेराफेरी कर कम योग्यता वाली आशा का चयन आशा सहयोगी पद पर कराया गया। न्यायालय जिला मुरैना ने भी डीसीएम के विरुद्ध टिप्पणी की थी।
कथन-
मिशन संचालक एनएचएम, डॉ. छवि भारद्वाज के आदेश पर हमने आशा कार्यकर्ताओंं की चयन प्रक्रिया में धांधली पर जांच कराई थी। जांच में सभी लोग दोषी पाए गए हैं। यह बताना फिलहाल मुश्किल है कि प्रतिवेदन फार्मल स्थिति में है, या भेज दिया गया है। क्योंकि संबंधित सेक्शन प्रभारी अवकाश पर हैं।
डॉ. एके दीक्षित, क्षेत्रीय संयुक्त संचालक, स्वास्थ्य, ग्वालियर।

Ravindra Kushwah
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