रेत माफिया पर कार्रवाई को लेकर कमिश्नर व वन विभाग आमने-सामने

संभागायुक्त रेनू तिवारी इस मुद्दे पर वन विभाग को कई बार आड़े हाथ ले चुकी हैं।

By: Amit Mishra

Published: 18 Feb 2020, 08:49 AM IST

मुरैना। अति संकटापन्न जलीय जीव घडिय़ाल संरक्षण के मामले में विश्व कीर्तिमान बनाने वाली चंबल में रेत का अवैध खनन और परिवहन रुका नहीं है। राजस्व वसूली के आंकड़े बढ़ाकर वन विभाग अपनी पीठ थपथपाता रहता है, लेकिन संभागायुक्त रेनू तिवारी इस मुद्दे पर वन विभाग को कई बार आड़े हाथ ले चुकी हैं। दो दिन पहले ही उन्होंने रेत खनन और परिवहन रोकने पर कार्रवाई को नाकाफी बताया है। सवाल किया है कि पूर्ण प्रतिबंध क्यों नहीं लग पा रहा है।


विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी
चंबल के राजघाट सहित जिले के अन्य क्षेत्रों में चंबल नदी से रेत के खनन और परिवहन की खबरों के बाद कमिश्नर रेनू तिवारी ने दिसंबर के प्रारंभ में वन मंडलाधिकारी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी।

वन को कार्रवाई के लिए पत्र भी लिखा
3 दिन की रिपोर्ट जब 20 दिन में भी नहीं दी गई तो प्रमुख सचिव वन को कार्रवाई के लिए पत्र भी लिखा था। इसके बाद वन मंडलाधिकारी ने जनवरी के अंत में हुई जिला टास्कफोर्स की बैठक में जानकारी दी थी। लेकिन कमिश्नर इससे संतुष्ट नहीं हैं। उन्होंने दो दिन पहले ही पत्र लिखकर फिर से डीएफओ से जानकारी मांगी है।

रिलीव नहीं किया गया
कमिश्नर ने वन विभाग की कार्रवाई को सवालों के घेरे में खड़ा करते हुए कहा है कि कार्रवाई की जानकारी के बावजूद रेत का खनन और परिवहन रुक क्यों नहीं पा रहा है। बता दें कि दिसंबर 2019 के अंत में कमिश्नर ने जब जानकारी मांगी थी तो यह जानकारी तय समय में नहीं दी गई थी। इसके बाद शासन को लिखे पत्र के बाद डीएफओ का स्थानांतरण भी हो चुका है, लेकिन अब तक नया अधिकारी न आने से रिलीव नहीं किया गया है।

 

1.5 किमी दूरी तक प्रतिबंधित है खनन
चंबल नदी राष्ट्रीय घडिय़ाल अभयारण्य घोषित होने से उसके किनारे से 1.5 किमी तक रेत का खनन और परिवहन निजी खेतोंं से भी नहीं किया जा सकता है। यहां नदी तट से और अंदर तक घुसकर खनन और परिवहन हो रहा है। जनवरी में जब सरकार ने माफिया पर कार्रवाई के आदेश दिए तो नगरा में 815 ट्रॉली रेत नष्ट कराने का दावा किया। बाकी कहीं कोई बड़ी कार्रवाई सामने नहीं आई।


कोर्ट ने माना हो रहा है खनन व परिवहन
ग्वालियर उच्च न्यायालय के आदेश पर हुई एक जांच में भी चंबल नदी के राजघाट से रेत का खनन और परिवहन होना सिद्ध पाया गया है। यह रिपोर्ट उच्च न्यायालय में करीब 10 पूर्व प्रस्तुत की जा चुकी है। इसके बावजूद वन विभाग सबलगढ़ व अन्य जगह तो कार्रवाई कर रहा है, लेकिन राजघाट, अंबाह और पोरसा में कार्रवाई नहीं हो पा रही है।


बड़ोखर में अब भी लग रही रेत की मंडी
अंबाह रोड पर बड़ोखर में रोज दर्जनों ट्रैक्टर ट्रॉलियां चंबल का रेत भरकर खड़ी होती हैं। न तो पुलिस रोक पा रही है और न ही वन विभाग कोई कार्रवाई कर पा रहा है। दिन में भी हाईवे व अंबाह रोड पर रेत के वाहनों का आना-जाना बेरोक-टोक जारी रहता है।

कार्रवाई से संतुष्ट नहीं कमिश्नर
वित्तीय वर्ष 2018-19 में खनिजों के अवैध उत्खनन, पविहन, भण्डारण पर दर्ज 186 प्रकरणों में 2 करोड़ 10 लाख 76 हजार 800 रुपए का जुर्माना वसूला गया। वर्ष 2019-20 में 110 दर्ज प्रकरणों पर 7 करोड़ 14 लाख 75 हजार 260 रुपए जुर्माने के तौर पर वसूले गए। वन विभाग की टीम द्वारा 11& वाहनों को पकड़ा गया है। 27 वाहनों को राजसात करने की कार्रवाई की गई। 18 लाख रुपए का जुर्माना भी वसूला गया।

डीएफओ पीडी ग्रेबियल को पत्र में चंबल नदी से रेत के खनन और परिवहन पर पूर्ण प्रतिबंध क्यों नहीं लग पाने पर जवाब मांगा है। इस संबंध में पत्र लिखा गया है। हालांकि विभाग ने दावा किया है कि प्रतिदन कार्रवाई की जा रही है, लेकिन फिर भी पूर्ण प्रतिबंध न लग पाना चिंता का विषय है।
रेनू तिवारी, कमिश्नर, चंबल व अध्यक्ष संभागीय टास्कफोर्स

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