मुरैना-श्योपुर से कांग्रेस का उम्मीदवार चौंकाने वाला हो सकता है

लोकसभा चुनाव में मुरैना-श्योपुर संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस का उम्मीदवार चौंकाने वाला हो सकता है। अब तक के सबसे प्रमुख दावेदारों को पीछे छोड़ते हुए नया नाम वनजदारी से सामने आया है।

By: Ravindra Kushwah

Updated: 29 Mar 2019, 03:20 PM IST

मुरैना. यह नाम कांग्रेस महासचिव व गुना सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया के पीए पुरुषोत्तम पाराशर का है। बेहद भरोसेमंद सूत्र के अनुसार सारे राजनीतिक समीकरणों को दरकिनार करते हुए पाराशर का नाम बुधवार को सर्वोच्च प्राथमिकता पर आ गया है। बताया गया है कि यह नाम लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायकों की सहमति के आधार पर आगे आया है। हालांकि सिंधिया ने लोकसभा क्षेत्र के कांग्रेस विधायकों को व्यक्तिगत तौर से राय जानने के लिए दिल्ली बुलाया है। लेकिन मुरैना से रघुराज कंषाना, दिमनी से गिर्राज डंडोतिया और अंबाह से कमलेश सुमन ही दिल्ली पहुंचे हैं। जौरा विधायक का भी समर्थन बताया जा रहा है, ेलेकिन वे स्वास्थ्य कारणों से इस बैठक में नहीं जा पाए हैं। जबकि सुमावली से ऐंदल सिंह कंषाना, सबलगढ़ से बैजनाथ कुशवा और श्योपुर से जंडेल सिंह इस बैठक में नहीं पहुंचे हैं। इससे पहले मुरैना से मप्र कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष रामनिवास रावत, उद्योगपति रमेशचंद्र गर्ग, जिला कांग्रेस के अध्यक्ष राकेश मावई, जौरा से कैलाश मित्तल, श्योपुर से पूर्व विधायक बृजराज सिंह चौहान के नाम चल रहे थे। पाराशर का नाम सामने आने के बाद माना जा रहा है कि आमराय बनाने के चक्कर में कांग्रेस के टिकट की घोषणा दो-चार दिन और टल सकती है। पहले ऐसे संकेत थे कि कांग्रेस के प्रत्याशी का निर्णय सिंधिया के साथ मुलाकातों के बाद गुरुवार को ही हो सकता है।
भाजपा और बसपा के प्रत्याशियों ने बदला समीकरण
अब तक यह तय माना जा रहा था कि मप्र कांग्रेस क
मेटी के कार्यकारी अध्यक्ष रावत ही कांग्रेस के उम्मीदवार होंगे। लेकिन भारतीय जनता पार्टी से केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के मुरैना शिफ्ट हो जाने और बसपा से भिण्ड-दतिया के पूर्व सांसद डॉ रामलखन सिंह के चुनाव मैदान में डटे रहने के बाद कांग्रेस यह नया दांव खेल सकती है। 2013 के विधानसभा चुनाव में भाजपा के पास मुरैना जिले में चार सीटें थीं, लेकिन 2018 के चुनाव में भाजपा की चार और बसपा की दोनों सीटों पर कांग्रेस ने कब्जा कर लिया। ऐसे में कांग्रेस मान रही है कि 1996 से इस सीट पर सांसद के चुनाव में हार झेलती रही कांग्रेस को इस बार लाभ मिल सकता है।

Ravindra Kushwah
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