थाने के बगल से बने कमरे में लटका मिला आरक्षक का शव

- दोनों हाथ बंधे, मुंह में कपड़ा भरा और ऊपर से लगा था मास्क
- सुसाइट नोट में लिखा: मुझे इस तरह टारगेट किया है कि अब मेरी जीने की इच्छा रही नहीं

By: Ashok Sharma

Published: 11 Apr 2021, 06:16 PM IST

मुरैना. यातायात थाने में पदस्थ आरक्षक हरेन्द्र ङ्क्षसह जाट (२३) का शव रविवार की सुबह थाने के बगल से स्थित कमरे में शव फांसी पर लटका मिला। आरक्षक के दोनों हाथ रस्सी से बंधे हुए थे। मुंह में कपड़ा भरा था और ऊपर से मास्क लगा हुआ था। सुबह सूचना मिलने पर पुलिस अधीक्षक सुनील कुमार पांडेय, एडीशनल एसपी राय सिंह नरवरिया सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी मौके पर पहुंचे। एफएसएल टीम व स्निफर डॉग ने भी मौके पर पहुंच कर पड़ताल की।
जानकारी के अनुसार आरक्षक हरेन्द्र सिंह जाट के शव के पास पुलिस को सुसाइट नोट मिला है, उसमें लिखा है कि मुझे स्टाफ द्वारा इस तरह टारगेट किया जा रहा है इससे अब मेरी जीने की इच्छा नहीं रही। हालांकि परिजन उसको हत्या बता रहे हैं और सुसाइट नोट की हैंड राइटिंग पर भी सवाल उठाए हैं।
थाने की लगी थी बाहर से कुंदी
टै्रफिक थाने में स्टाफ के तीन लोग रात को सो रहे थे, उसकी बाहर से कुंदी लगी थी। वहीं हरेन्द्र सिंह जिस कक्ष में फांसी पर लटका मिला, उसकी भी अंदर से कुंडी लगी थी। सुबह कुंडी तोडक़र उसके शव को नीचे उतारा गया। उसके बाद पीएम के लिए ले जाया गया।
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यातायात थाने के बगल में स्थित कक्ष में फांसी पर लटका मिला आरक्षक हरेन्द्र ङ्क्षसह सितंबर २०१९ से यातायात थाने में ही पदस्थ है। यह वर्ष २०१८ में भर्ती हुआ था। टै्रनिंग के बाद पुलिस लाइन और फिर पहली पोस्टिंग यातायात थाने में हुई तब से यहीं पर पदस्थ था। मूलतह सोंख मथुरा उप्र का रहने वाला था। यातायात थाने के बगल से स्थित एक कक्ष की छत पर टीनशैड पड़ा था, उसकी एंगल से बंधी रस्सी से आरक्षक का शव झूलता मिला है।
मृतक आरक्षक हरेन्द्र ङ्क्षसह के मामा रणवीर सिंह का कहना हैं कि मर्डर हुआ है। साढ़े छह फुट की लंबाई थी और उतनी ही छत की ऊंचाई थी। सुसाइट नोट मिला है, वह हरेन्द्र की राइटिंग नहीं हैं। हरेन्द्र बहुत सीधा और होशियार लडक़ा था। वह आत्महत्या कर ही नहीं सकता। पुलिस ने उसके बैग से उसकी डायरी ही निकाल ली। बैग फाड़ दिया, उसका पासवर्ड भाई के पास था, उसके बाद भी हमारे आने से पहले ही उसका लॉक तोड़ दिया और साक्ष्य खत्म कर दिए। पुलिस इस मामले में गोलमाल कर रही है। हरेन्द्र सिंह ने आत्महत्या नहीं की है बल्कि उसकी हत्या हुई है। परिजन का कहना हैं कि अगर उसने फांसी लगाई थी तो हमको सूचना क्यों नहीं दी। परिजन को पुलिस ने नहीं बल्कि उनको अलग से सूचना मिली है तब वह आए हैं।
सीसीटीवी फुटेज में तीन चार बार बाहर भीतर होते दिखा आरक्षक
यातायात थाने में लगे सीसीटीवी कैमरे को वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में चेक किया गया। उसमें आरक्षक हरेन्द्र तीन चार बार कक्ष से बाहर भीतर होता रहा है। अंतिम बार रात १२:३० बजे कुर्सी लेकर कमरे में गया है उसके बाद बाहर नहीं आया। सुबह मंदिर से जुड़े श्रद्धालु वहां पहुंचे। उन्होंने मंदिर से सटी खिडक़ी से देखा तो उसका शव लटका मिला। तब अन्य स्टाफ को सूचना दी। वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और कमरे की अंदर से लगी कुंडी को तोड़ा गया।
एक अप्रैल को मनाया था वर्थडे
आरक्षक हरेन्द्र सिंह जाट का एक अपै्रल को वर्थडे था, स्टाफ के साथ यातायात थाने पर ही वर्थ डे मनाया गया था। स्टाफ के लोग हरेन्द्र सिंह के व्यवहार की तारीफ कर रहे थे। लेकिन डंफरों से अवैध वसूली का मामला भी चर्चा में हैं। इसमें सच्चाई क्या है यह तो अधिकारी जानें लेकिन फिलहाल मामला चर्चा में हैं।
मानवीय संवेदनाएं भूली थाना प्रभारी
आमतौर पर किसी की मौत होने पर लोग मानवीय संवेदना प्रकट करते हैं लेकिन अपने परिवार को सदस्य चला जाए और फिर कोई मानवीय संवेदनाएं भूल जाए, इससे बड़ी विडंवना क्या होगी। ऐसा ही मामला रविवार को पीएम हाउस पर देखने को मिला। यहां पुलिस परिवार को एक सदस्य चला गया और उसके गममीन परिजन सिटी कोतवाली टी आई आरती चराटे से घटना के संबंध में बात कर रहे थे। करीब बीस मिनट तक टी आई गाड़ी से नहीं उतरी और गाड़ी की एसी चल रही थी उसी में कांच खोलकर आरक्षक के परिजन से बात करती रहीं। सीएसपी पहुंचे तब टी आई नीचे उतरकर आईं। यहां खड़े पुलिस महकमें के लोग भी इस घटनाक्रम को देखकर टी आई को कोसते नजर आए।
कथन
- आरक्षक ने फांसी लगाकर आत्महत्या की है। मेडीकल बोर्ड से पीएम करवाया जा रहा है। सुसाइट नोट मिला है। उसमें प्रताडऩा का मामला सामने आया है। मामले की जांच करेंगे जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसके हिसाब से कार्रवाई की जाएगी।
राजेन्द्र रघुवंशी, सीएसपी, मुरैना

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