पुलिस की किरकिरी कर रहे विभागीय नुमाइंदे

- समय पर नहीं होती कार्रवाई, नेतृत्व क्षमता पर उठ रहे सवाल

By: Ashok Sharma

Published: 27 Jun 2021, 09:13 PM IST


मुरैना. पिछले कुछ दिनों से पुलिस विभाग अपने ही लोगों की गलती से काफी चर्चा में हैं। जिस पुलिस के पास लोग न्याय की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वही पुलिस आपस में जूतमपैजार पर उतर आई है। पिछले कुछ दिनों से कुछ ऐसे घटनाक्रम हुए हैं जिससे पुलिस विभाग की किरकिरी हो रही है। स्पष्ट दिखाई दे रहा है कि विभागीय नुमाइंदे गलती कर रहे हैं, उसके बाद भी उनके खिलाफ कार्रवाई में विलंब होता है। इससे अधिकारियों की नेतृत्व क्षमता सवाल खड़े हो रहे हैं।
पुलिस विभाग के नुमाइंदे पिछले कुछ समय से बेपटरी हो गए हैं। ऐसा लगता है कि पुलिस के लोग अनुशासन का पाठ भूल गए हों। इसलिए तो गुंडे मवालियों की तरह थाने व एसपी ऑफिस में लड़ते नजर आ रहे हैं। सिविल लाइन थाने का झगड़ा, मिरघान पुलिस चौकी से बंदूक व कारतूस चोरी या फिर पुलिस अधीक्षक कार्यालय में स्टाफ के बीच जूतमपैजार का मामला हो, इन मामलों में पुलिस की किरकिरी हुई है। हर गली चौराहे पर आजकल पुलिस विभाग के घटनाक्रम लोगों की जुवान पर हैं कि आखिर ऐसा क्या हुआ है कि पुलिस कर्मचारी अपने ही विभाग की धोने पर उतर आए हैं।
इन मामलों में हुआ कार्रवाई में विलंब
केस- ०१
- १२ मई की रात को सिविल लाइन थाने के अंदर एएसआइ, चालक आरक्षक के बीच इतनी जबरदस्त लड़ाई कि थाना प्रभारी के चेंबर के कांच तक फोड़ दिए। इस मामले में थाना प्रभारी ने रोजनामचा में पूरा घटनाक्रम दर्ज लिखा गया है कि वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। लेकिन वरिष्ठ अधिकारी डेढ़ महीने बाद भी इस मामले में कोई कार्रवाई नहीं कर सके। इस झगड़े में शामिल चालक ने एडीजीपी के खास होने का भी हवाला दिया है। थाना प्रभारी ने इसको भी रिपोर्ट में दर्ज किया है। उक्त चालक बानमोर में था तब वहां भी इसी तरह स्टाफ से भिड़ गया था।
केस- ०२
- २३ जून की रात को मिरघान पुलिस चौकी से बंदूक व कारतूस चोरी गए थे। इसमें भी पुलिस आरक्षक सहित अन्य स्टाफ की लापरवाही उजागर हुई है। इस मामले में अधिकारियों ने कार्रवाई में विलंब किया। इसमें अधिकारियों को पृथम दृष्टया चोरी की एफआइआर होनी चाहिए थी लेकिन अधिकारी दूसरे दिन तक घटना पर पर्दा डालते रहे। जब मालखाने का ताला टूटा और बंदूक व कारतूस चोरी हुए, वह बात अलग है कि जुगाड़ से बंदूक व कारतूस वापस आ गए। परंतु चोरी की घटना हुई तो एफआइआर तो बनती है। लेकिन आज तक नहीं की गई है।
केस- ०३
- २६ जून को उस कार्यालय में जहां पुलिस विभाग के स्वयं जिले के मुखिया बैठते हैं अर्थात पुलिस अधीक्षक कार्यालय में बड़े बाबू और एएसआई के बीच जूतमपैजार हुई। इसका साक्षी रहा एसपी ऑफिस का पूरा स्टाफ, उसके दो दिन बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इससे बड़ी विडंवना क्या होगी कि एसपी के ऑफिस के जिम्मेदार लोग गुंडों की लड़ रहे हैं। इस पूरे मामले को लेकर जिले भर में पुलिस की बदनामी हो रही है। बताते हैं झगड़े के पीछे आवक जावक बाबू छुट्टी से लौटकर आया था और बड़े बाबू उनकी आमद नहीं कर रहे थे। अगर ऐसा था तो आवक जावक बाबू को अधिकारियों से शिकायत करनी थीं, स्वयं ही न्याय करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। क्या अधिकारियों पर भरोसा नहीं था।
कथन
- एसपी ऑफिस व सिविल लाइन थाने में हुई मारपीट के मामले में जांच करवा रहे हैं। हम चाहते हैं कि किसी निर्दोष के खिलाफ कार्रवाई न हो, इसलिए जांच उपरांत ही कार्रवाई की जाएगी।
ललित शाक्यवार, पुलिस अधीक्षक, मुरैना

Ashok Sharma
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