scriptDwarkadhish departed with moist eyes mourning | विलाप करते हुए नम आंखों से विदा किए द्वारिकाधीश | Patrika News

विलाप करते हुए नम आंखों से विदा किए द्वारिकाधीश

- साढ़े तीन दिन श्रीदाऊजी धाम मुरैना में मेहमान बनकर खूब करवाई खातिरदारी
- कंधे पर बैठाकर भगवान को मंदिर की परिक्रमा लगवाई और स्वामी मौहल्ले में प्रसादी पाई

मोरेना

Updated: November 08, 2021 08:04:55 pm


मुरैना. मेहमान बनकर आए द्वारिकाधीश ने साढ़े तीन दिन तक खूब खातिरदारी करवाई। और सोमवार को स्वामी परिवार के लोग व श्रद्धालुओं ने भगवान से अनुरोध किया प्रभु अगली साल फिर आना। भगवान के विछोह में स्वामी परिवार व श्रद्धालुओं की आंखे नम हो गई। बाद में भगवान की ढोल नगाड़े के साथ हंसी खुशी विदा किया। इससे पूर्व साढ़े तीन से विराजमान भगवान स्वरूप श्रीकृष्ण व बलराम के वेशधारी बालकों को कंधे पर बैठाकर ढोल नगाड़े के साथ मंदिर में परिक्रमा लगवाई, उसके बाद स्वामी मौहल्ला में डॉ. नेमीचंद गौतम व डॉ. रेखा गौतम के यहां पहुंचे। यहां सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। यहां भगवान ने प्रसादी पाई और उसके बाद अपने धाम को चले गए। भगवान दाऊजी मंदिर में विराजमान रहे तब तक श्रद्धालु प्रफुल्लित रहे और उनकी विदाई के समय लोगों की आंख नम हो गई। भावना में डूबे कई लोगों के गले भर आए
विदित हो कि सैकड़ों साल से मुरैना गांव श्रीदाऊजी मंदिर पर यह लीला लगती आ रही है। कोरोना संक्रमण के चलते दो साल से दुकान लगाने की प्रशासन ने परमीशन नहीं दी परंतु इस बार कुछ दुकान लगी रहीं, जहां लोगों को काफी खरीदारी की और झूले का भी आनंद लिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद जो भी बाल लीलाएं हुई, उन सबका चित्रण इन साढ़े तीन दिन में लीला के दौरान दाऊजी मंदिर में किया गया। इन लीलाओं के प्रमुख सूत्रधार रहे भगवान श्रीकृष्ण व बलराम के वेशधारी बालक। इनका श्रद्धालुओं ने साढ़े तीन दिन इसी तरह आदर सम्मान किया जैसे इनके स्वरूप में साक्षात भगवान ही यहां विराजे हुए हों। पड़वा के दिन भव्य शोभा यात्रा निकाली गई उसमें रथ पर भगवान स्वरूप ये दोनों बालक सवार हुए, उनकी पूरे गांव में हर दरवाजे पर आरती और पूजन किया गया। उसके बाद उसी दिन नागदेवता के रूप में प्राचीन तालाब में भगवान ने दर्शन दिए। और लीला के दौरान नाग नाथ, पूतना बध उसके बाद जो भी कृष्ण लीला द्वापुर में हुई, उनका यहां चित्रण किया गया। मुरैना सहित दूर दराज के गांवों से लोग बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन करने श्रीदाऊजी धाम पहुंचे। मंदिर के महंत श्रीनिवास स्वामी पूरे साढ़े तीन दिन तक भगवान स्वरूप वेशधारी बालकों के साथ रहे। विलाप करते हुए नम आंखों से विदा किए द्वारिकाधीश
- साढ़े तीन दिन श्रीदाऊजी धाम मुरैना में मेहमान बनकर खूब करवाई खातिरदारी
- कंधे पर बैठाकर भगवान को मंदिर की परिक्रमा लगवाई और स्वामी मौहल्ले में प्रसादी पाई
फोटो ०८११२१ मोर १६- भगवान द्वारिकाधीश की विदाई करते स्वामी परिवार के लोग और श्रद्धालु
मुरैना. मेहमान बनकर आए द्वारिकाधीश ने साढ़े तीन दिन तक खूब खातिरदारी करवाई। और सोमवार को स्वामी परिवार के लोग व श्रद्धालुओं ने भगवान से अनुरोध किया प्रभु अगली साल फिर आना। भगवान के विछोह में स्वामी परिवार व श्रद्धालुओं की आंखे नम हो गई। बाद में भगवान की ढोल नगाड़े के साथ हंसी खुशी विदा किया। इससे पूर्व साढ़े तीन से विराजमान भगवान स्वरूप श्रीकृष्ण व बलराम के वेशधारी बालकों को कंधे पर बैठाकर ढोल नगाड़े के साथ मंदिर में परिक्रमा लगवाई, उसके बाद स्वामी मौहल्ला में डॉ. नेमीचंद गौतम व डॉ. रेखा गौतम के यहां पहुंचे। यहां सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। यहां भगवान ने प्रसादी पाई और उसके बाद अपने धाम को चले गए। भगवान दाऊजी मंदिर में विराजमान रहे तब तक श्रद्धालु प्रफुल्लित रहे और उनकी विदाई के समय लोगों की आंख नम हो गई। भावना में डूबे कई लोगों के गले भर आए
विदित हो कि सैकड़ों साल से मुरैना गांव श्रीदाऊजी मंदिर पर यह लीला लगती आ रही है। कोरोना संक्रमण के चलते दो साल से दुकान लगाने की प्रशासन ने परमीशन नहीं दी परंतु इस बार कुछ दुकान लगी रहीं, जहां लोगों को काफी खरीदारी की और झूले का भी आनंद लिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद जो भी बाल लीलाएं हुई, उन सबका चित्रण इन साढ़े तीन दिन में लीला के दौरान दाऊजी मंदिर में किया गया। इन लीलाओं के प्रमुख सूत्रधार रहे भगवान श्रीकृष्ण व बलराम के वेशधारी बालक। इनका श्रद्धालुओं ने साढ़े तीन दिन इसी तरह आदर सम्मान किया जैसे इनके स्वरूप में साक्षात भगवान ही यहां विराजे हुए हों। पड़वा के दिन भव्य शोभा यात्रा निकाली गई उसमें रथ पर भगवान स्वरूप ये दोनों बालक सवार हुए, उनकी पूरे गांव में हर दरवाजे पर आरती और पूजन किया गया। उसके बाद उसी दिन नागदेवता के रूप में प्राचीन तालाब में भगवान ने दर्शन दिए। और लीला के दौरान नाग नाथ, पूतना बध उसके बाद जो भी कृष्ण लीला द्वापुर में हुई, उनका यहां चित्रण किया गया। मुरैना सहित दूर दराज के गांवों से लोग बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन करने श्रीदाऊजी धाम पहुंचे। मंदिर के महंत श्रीनिवास स्वामी पूरे साढ़े तीन दिन तक भगवान स्वरूप वेशधारी बालकों के साथ रहे। विलाप करते हुए नम आंखों से विदा किए द्वारिकाधीश
- साढ़े तीन दिन श्रीदाऊजी धाम मुरैना में मेहमान बनकर खूब करवाई खातिरदारी
- कंधे पर बैठाकर भगवान को मंदिर की परिक्रमा लगवाई और स्वामी मौहल्ले में प्रसादी पाई
फोटो ०८११२१ मोर १६- भगवान द्वारिकाधीश की विदाई करते स्वामी परिवार के लोग और श्रद्धालु
मुरैना. मेहमान बनकर आए द्वारिकाधीश ने साढ़े तीन दिन तक खूब खातिरदारी करवाई। और सोमवार को स्वामी परिवार के लोग व श्रद्धालुओं ने भगवान से अनुरोध किया प्रभु अगली साल फिर आना। भगवान के विछोह में स्वामी परिवार व श्रद्धालुओं की आंखे नम हो गई। बाद में भगवान की ढोल नगाड़े के साथ हंसी खुशी विदा किया। इससे पूर्व साढ़े तीन से विराजमान भगवान स्वरूप श्रीकृष्ण व बलराम के वेशधारी बालकों को कंधे पर बैठाकर ढोल नगाड़े के साथ मंदिर में परिक्रमा लगवाई, उसके बाद स्वामी मौहल्ला में डॉ. नेमीचंद गौतम व डॉ. रेखा गौतम के यहां पहुंचे। यहां सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। यहां भगवान ने प्रसादी पाई और उसके बाद अपने धाम को चले गए। भगवान दाऊजी मंदिर में विराजमान रहे तब तक श्रद्धालु प्रफुल्लित रहे और उनकी विदाई के समय लोगों की आंख नम हो गई। भावना में डूबे कई लोगों के गले भर आए
विदित हो कि सैकड़ों साल से मुरैना गांव श्रीदाऊजी मंदिर पर यह लीला लगती आ रही है। कोरोना संक्रमण के चलते दो साल से दुकान लगाने की प्रशासन ने परमीशन नहीं दी परंतु इस बार कुछ दुकान लगी रहीं, जहां लोगों को काफी खरीदारी की और झूले का भी आनंद लिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद जो भी बाल लीलाएं हुई, उन सबका चित्रण इन साढ़े तीन दिन में लीला के दौरान दाऊजी मंदिर में किया गया। इन लीलाओं के प्रमुख सूत्रधार रहे भगवान श्रीकृष्ण व बलराम के वेशधारी बालक। इनका श्रद्धालुओं ने साढ़े तीन दिन इसी तरह आदर सम्मान किया जैसे इनके स्वरूप में साक्षात भगवान ही यहां विराजे हुए हों। पड़वा के दिन भव्य शोभा यात्रा निकाली गई उसमें रथ पर भगवान स्वरूप ये दोनों बालक सवार हुए, उनकी पूरे गांव में हर दरवाजे पर आरती और पूजन किया गया। उसके बाद उसी दिन नागदेवता के रूप में प्राचीन तालाब में भगवान ने दर्शन दिए। और लीला के दौरान नाग नाथ, पूतना बध उसके बाद जो भी कृष्ण लीला द्वापुर में हुई, उनका यहां चित्रण किया गया। मुरैना सहित दूर दराज के गांवों से लोग बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन करने श्रीदाऊजी धाम पहुंचे। मंदिर के महंत श्रीनिवास स्वामी पूरे साढ़े तीन दिन तक भगवान स्वरूप वेशधारी बालकों के साथ रहे। विलाप करते हुए नम आंखों से विदा किए द्वारिकाधीश
- साढ़े तीन दिन श्रीदाऊजी धाम मुरैना में मेहमान बनकर खूब करवाई खातिरदारी
- कंधे पर बैठाकर भगवान को मंदिर की परिक्रमा लगवाई और स्वामी मौहल्ले में प्रसादी पाई
फोटो ०८११२१ मोर १६- भगवान द्वारिकाधीश की विदाई करते स्वामी परिवार के लोग और श्रद्धालु
मुरैना. मेहमान बनकर आए द्वारिकाधीश ने साढ़े तीन दिन तक खूब खातिरदारी करवाई। और सोमवार को स्वामी परिवार के लोग व श्रद्धालुओं ने भगवान से अनुरोध किया प्रभु अगली साल फिर आना। भगवान के विछोह में स्वामी परिवार व श्रद्धालुओं की आंखे नम हो गई। बाद में भगवान की ढोल नगाड़े के साथ हंसी खुशी विदा किया। इससे पूर्व साढ़े तीन से विराजमान भगवान स्वरूप श्रीकृष्ण व बलराम के वेशधारी बालकों को कंधे पर बैठाकर ढोल नगाड़े के साथ मंदिर में परिक्रमा लगवाई, उसके बाद स्वामी मौहल्ला में डॉ. नेमीचंद गौतम व डॉ. रेखा गौतम के यहां पहुंचे। यहां सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। यहां भगवान ने प्रसादी पाई और उसके बाद अपने धाम को चले गए। भगवान दाऊजी मंदिर में विराजमान रहे तब तक श्रद्धालु प्रफुल्लित रहे और उनकी विदाई के समय लोगों की आंख नम हो गई। भावना में डूबे कई लोगों के गले भर आए
विदित हो कि सैकड़ों साल से मुरैना गांव श्रीदाऊजी मंदिर पर यह लीला लगती आ रही है। कोरोना संक्रमण के चलते दो साल से दुकान लगाने की प्रशासन ने परमीशन नहीं दी परंतु इस बार कुछ दुकान लगी रहीं, जहां लोगों को काफी खरीदारी की और झूले का भी आनंद लिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद जो भी बाल लीलाएं हुई, उन सबका चित्रण इन साढ़े तीन दिन में लीला के दौरान दाऊजी मंदिर में किया गया। इन लीलाओं के प्रमुख सूत्रधार रहे भगवान श्रीकृष्ण व बलराम के वेशधारी बालक। इनका श्रद्धालुओं ने साढ़े तीन दिन इसी तरह आदर सम्मान किया जैसे इनके स्वरूप में साक्षात भगवान ही यहां विराजे हुए हों। पड़वा के दिन भव्य शोभा यात्रा निकाली गई उसमें रथ पर भगवान स्वरूप ये दोनों बालक सवार हुए, उनकी पूरे गांव में हर दरवाजे पर आरती और पूजन किया गया। उसके बाद उसी दिन नागदेवता के रूप में प्राचीन तालाब में भगवान ने दर्शन दिए। और लीला के दौरान नाग नाथ, पूतना बध उसके बाद जो भी कृष्ण लीला द्वापुर में हुई, उनका यहां चित्रण किया गया। मुरैना सहित दूर दराज के गांवों से लोग बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन करने श्रीदाऊजी धाम पहुंचे। मंदिर के महंत श्रीनिवास स्वामी पूरे साढ़े तीन दिन तक भगवान स्वरूप वेशधारी बालकों के साथ रहे। - साढ़े तीन दिन श्रीदाऊजी धाम मुरैना में मेहमान बनकर खूब करवाई खातिरदारी
- कंधे पर बैठाकर भगवान को मंदिर की परिक्रमा लगवाई और स्वामी मौहल्ले में प्रसादी पाई
फोटो ०८११२१ मोर १६- भगवान द्वारिकाधीश की विदाई करते स्वामी परिवार के लोग और श्रद्धालु
मुरैना. मेहमान बनकर आए द्वारिकाधीश ने साढ़े तीन दिन तक खूब खातिरदारी करवाई। और सोमवार को स्वामी परिवार के लोग व श्रद्धालुओं ने भगवान से अनुरोध किया प्रभु अगली साल फिर आना। भगवान के विछोह में स्वामी परिवार व श्रद्धालुओं की आंखे नम हो गई। बाद में भगवान की ढोल नगाड़े के साथ हंसी खुशी विदा किया। इससे पूर्व साढ़े तीन से विराजमान भगवान स्वरूप श्रीकृष्ण व बलराम के वेशधारी बालकों को कंधे पर बैठाकर ढोल नगाड़े के साथ मंदिर में परिक्रमा लगवाई, उसके बाद स्वामी मौहल्ला में डॉ. नेमीचंद गौतम व डॉ. रेखा गौतम के यहां पहुंचे। यहां सामूहिक भोज का आयोजन किया गया। यहां भगवान ने प्रसादी पाई और उसके बाद अपने धाम को चले गए। भगवान दाऊजी मंदिर में विराजमान रहे तब तक श्रद्धालु प्रफुल्लित रहे और उनकी विदाई के समय लोगों की आंख नम हो गई। भावना में डूबे कई लोगों के गले भर आए
विदित हो कि सैकड़ों साल से मुरैना गांव श्रीदाऊजी मंदिर पर यह लीला लगती आ रही है। कोरोना संक्रमण के चलते दो साल से दुकान लगाने की प्रशासन ने परमीशन नहीं दी परंतु इस बार कुछ दुकान लगी रहीं, जहां लोगों को काफी खरीदारी की और झूले का भी आनंद लिया। भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद जो भी बाल लीलाएं हुई, उन सबका चित्रण इन साढ़े तीन दिन में लीला के दौरान दाऊजी मंदिर में किया गया। इन लीलाओं के प्रमुख सूत्रधार रहे भगवान श्रीकृष्ण व बलराम के वेशधारी बालक। इनका श्रद्धालुओं ने साढ़े तीन दिन इसी तरह आदर सम्मान किया जैसे इनके स्वरूप में साक्षात भगवान ही यहां विराजे हुए हों। पड़वा के दिन भव्य शोभा यात्रा निकाली गई उसमें रथ पर भगवान स्वरूप ये दोनों बालक सवार हुए, उनकी पूरे गांव में हर दरवाजे पर आरती और पूजन किया गया। उसके बाद उसी दिन नागदेवता के रूप में प्राचीन तालाब में भगवान ने दर्शन दिए। और लीला के दौरान नाग नाथ, पूतना बध उसके बाद जो भी कृष्ण लीला द्वापुर में हुई, उनका यहां चित्रण किया गया। मुरैना सहित दूर दराज के गांवों से लोग बड़ी संख्या में भगवान के दर्शन करने श्रीदाऊजी धाम पहुंचे। मंदिर के महंत श्रीनिवास स्वामी पूरे साढ़े तीन दिन तक भगवान स्वरूप वेशधारी बालकों के साथ रहे।
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