जर्जर सरकारी आवासों में निवास कर रहे कर्मचारी

नौ साल बाद भी विभागीय स्तर पर नहीं कराई मरम्मत

 

By: rishi jaiswal

Published: 19 Mar 2020, 11:57 PM IST

जौरा. सिंचाई विभाग में कार्यरत कई कर्मचारी चंबल कॉलोनी स्थित जर्जर सरकारी आवासों में निवास कर रहे हैं। कर्मचारी कई बार अधिकारियों से इन आवासों की मरम्मत का अनुरोध कर चुके हैं, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।

चंबल कॉलोनी में कुल ५८ आवास हैं। इनमें से ३० कर्मचारियों के लिए आवंटित हैं, जबकि शेष आवासों को किचन, गोदाम या अन्य किसी नाम पर आरक्षित किया गया था। हालांकि इनमें से भी कुछ आवासों में कर्मचारी निवास कर रहे हैं, लेकिन इनकी हालत एकदम कंडम हो चुकी है। दीवारों से प्लास्टर उखड़ रहा है तो बरसात में छतों से पानी टपकता है। इसके अलावा फर्स, दरवाजे, खिड़कियां भी जर्जर हालत में हैं। कर्मचारी कहते हैं वे लगातार अधिकारियों को आवासों की स्थिति से अवगत कराते रहे हैं, लेकिन सिर्फ आश्वासन ही मिला है। ऐसे में कर्मचारी जरूरत के हिसाब से खुद ही इनमें थोड़ा-बहुत मेंटेनेंस करा लेते हैं। सरकारी आवासों में से १० की हालत कंडम है। यही वजह है कि इनमें कोई निवास नहीं करता।

सडक़ व रोशनी भी नहीं

चंबल कॉलोनी में लंबे समय से सडक़ की समस्या भी है। आवासों के सामने पत्थरों का खरंजा ऊबड़-खाबड़ है। इस पर हुए गड्ढों में अक्सर गंदा पानी भरा रहता है, जिसकी वजह से आवागमन में परेशानी होती है। इसी तरह बिजली के खंभों पर प्रकाश की पुख्ता व्यवस्था नहीं है। इन पर सिर्फ बल्ब टांग दिए गए हैं, जिनसे पर्याप्त प्रकाश नहीं होता।

अधिकारी नहीं उठाते फोन

कर्मचारियों का कहना है कि आवासों की स्थिति सुधारने के मुद्दे पर अधिकारी बात नहीं करते। अधिकांश अधिकारी ग्वालियर में निवास करते हैं। कर्मचारियों के मुताबिक वे कई बार संबंधित अधिकारियों से आवासों की मरम्मत कराए जाने की मांग कर चुके हैं। दो माह बाद बरसात का मौसम शुरू होने वाला है। इस बार भी परिवार के सदस्यों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा।

कथन

दरअसल, कर्मचारियों को ३० आवास आवंटित किए गए हैं। शेष आवास जो बदहाल हैं, वे अन्य कार्यों के लिए आरक्षित हैं। यह बात और है कि उनमें भी कर्मचारी रह रहे हैं। देखते हैं, इनके सुधार के लिए क्या किया जा सकता है।

ओपी गुप्ता, ईई, जल संसाधन

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