मौसम के बेरुखी से किसान नहीं उठा रहे जोखिम

छोटी नदियों में भी Óयादा दिन पानी रहने की उम्मीद नहीं

By: rishi jaiswal

Updated: 24 Sep 2020, 11:56 PM IST

मुरैना. बारिश के पूर्वानुमान गलत साबित होने के बाद किसानों की चिंता बढने लगी है। जल्दी बाजरे की फसल बोने वाले किसानों ने कटाई शुरू कर दी है, लेकिन सरसों की बोवनी के लिए से अभी उपयुक्त मौसम नहीं है। खेतों में नमी नहीं है और बारिश हो नहीं रही है।

हालंाकि कुछ जगह किसानों ने निजी साधनों से पलेवा करना शुरू कर दिया है, लेकिन Óयादातर किसान पलेवा के लिए अपने नलकूप कम चालू करते हैं। ऐसे में किसानों को नहरों से पानी की उम्मीद रहती है, लेकिन अभी तक सार्वजनिक तौर पर जल संसाधन विभाग, कृषि विभाग और जिला प्रशासन ने भी इस संबंध में कोई स्पष्ट घोषणा नहीं की है।

किसानों ने 1.71 लाख हेक्टेयर में बाजरे की फसल बोई थी। Óयादातर फसल सही समय पर बोई गई थी इसलिए कटाई शुरू हो चुकी है। खेत खाली होने के बाद Óयादातर किसान इनका उपयोग सरसों की बोवनी के लिए करते हैं। पहले से खाली और देर से कटने वाली बाजरे की फसल के बाद खाली होने वाले खेतों में गेहूं की फसल की बोवनी करते है। इस समय तापमान &5 से &8 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने से खेतों की नमी तेजी से नीचे जा रही है। ऐसे में किसान सरसों की बोवनी करके कोई खतरा नहीं उठाना चाहते हैं। क्योंकि तापमान अधिक रहने से खेतों में बीज डाला भी तो या तो वह अंकुरित ही नहीं होगा या अंकुरण के साथ पौधे ही झुलस जाएंगे। किसान निरंजन शर्मा कहते हैं कि बाजरे की फसल खड़ी रहने से खेत में थोड़ी सी नमी जान पड़ रही थी, लेकिन जितने हिस्से में फसल काटी है वहां एक दिन में ही नमी खत्म हो गई। सतह नम लग रही थी, लेकिन भीतर सूखी जमीन होने से बोवनी इस समय उपयुक्त नहीं लग रही है। हालांकि नदियों के किनारे खेती करने वाले किसानों ने तैयारी पूरी कर ली है।

क्वारी नदी के आसपास तराई इलाके में खेतों के सरसों और चने के साथ गेहूूं के लिए भी तैयार किया जा रहा है, लेकिन किसान कम बारिश से नदियों के भविष्य को लेकर भी चिंतित है। क्वारी नदी में इस समय पानी कई जगह बहुत कम हो गया है। मुरैना से लेकर बुधारा तक तो कई जगह जल संसाधन विभाग ने चेकडैम बनवा रखे हैं, लेकिन उसके नीचे नदी की धार अभी से टूटने लगी है। किसान सुघर सिंह कहते हैं कि सितंबर को तो बारिश का ही महीना माना जाता है। अभी नदी का यह हाल है तो फरवरी तक यहां मैदान दिखाई देने लगेगा। ऐसे में नदी के सहारे Óयादा पानी वाली फसलों को नहीं बोया जा सकता।

&बारिश तो उम्मीद के अनुरूप नहीं हुई है। इससे रबी फसलों की तैयारी में व्याहारिक समस्याएं आएंगी। लेकिन अभी तो समय है, एपीसी की बैठक के बाद पानी और सारी व्यवस्थाओं का ऐलान कर दिया जाएगा।

अशोक सिंह गुर्जर, एसएडीओ, उप संचालक कृषि कार्यालय, मुरैना

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