खाद का संकट बरकरार: किसानों ने किया चक्काजाम

- दुकान के आगे रतजगा किया किसानों ने, फिर भी नहीं मिला खाद

By: Ashok Sharma

Published: 11 Oct 2021, 09:42 PM IST


मुरैना. पिछले एक सप्ताह से मुरैना में खाद का संकट बरकरार है। जिला प्रशासन के अधिकारी लगातार यही दावा कर रहे हैं कि खाद पर्याप्त है लेकिन किसानों को खाद नहीं मिल रहा। रविवार की रात १२ बजे से ही किसान जीवाजी गंज सोसायटी पर टै्रक्टर ट्रॉली लेकर पहुंच गए और रात भर वहीं पर रतजगा किया। सोमवार की सुबह साढ़े दस बजे तक खाद की दुकान नहीं खुली और पुलिस ने कहा कि खाद मंडी से बंटेगा, यहां से मंडी चले जाओ, इसी बात से नाराज होकर किसानों ने सिटी कोतवाली थाने के सामने एम एस रोड पर जाम लगा दिया हालांकि बीस मिनट में पुलिस ने जाम खुलवा दिया। इस दौरान पुलिस से धक्का मुक्की भी हुई।
खाद के लिए किसान रात को ही वितरण केन्द्र पर डेरा डाल लेते हैं और फिर दिन भर तेज धूप में भूखे प्यासे लाइन में धक्का खाते रहते हैं। उसके बाद भी कुछ ही लोगों को खाद मिल पाता है और अन्य लौट जाते हैं। कुछ किसान तो ऐसे हैं पिछले सात दिन से वापस हो रहे हैं। लाइन में लगते हैं और जब तक उनका नंबर आता है खाद खत्म हो जाता है या फिर काउंटर बंद हो जाता है। खाद को लेकर सबसे बड़ी परेशानी यह है कि प्रशासन ने सिर्फ एक ही वितरण केन्द्र शुरू किया है। अगर शहर में दो चार जगह खाद का वितरण करना शुरू कर दिया जाए तो ये जो मारामारी हो रही है, वह बंद हो जाए। किसानों की परेशानी और अव्यवस्था के लिए प्रशासन पूरी तरह जिम्मेदार है क्योंकि व्यवस्था बनाने में अक्षम साबित हो रहा है।
अधिकारी ने कहा, जिसके नाम किताब उसको दिया जाएगा खाद ...........
खाद वितरण के दौरान सब्जी मंडी में पहुंचे एक अधिकारी ने कहा कि जिसके नाम जमीन की किताब है, उसी को खाद दिया जाए। अधिकारी के फरमान के बाद लाइन में लगी महिलाओं में अफरा तफरा मच गई, कुछ आक्रोशित महिलाएं अधिकारी पर बरस पड़ी और कई महिलाएं तो इसलिए लाइन से अलग हो गई कि जमीन उनके पति के नाम से थी लेकिन बाद में कहा कि महिलाओं को खाद मिलेगा भले ही उनके किसी परिजन के नाम से जमीन हो। कुल मिलाकर अधिकारी की बयानबाजी से कुछ देर के लिए व्यवस्था गड़ाबड़ा गई।
लाइन में लगी महिला को आया गस .....
महिलाओं की लंबी लाइन लगी थी और वहां व्यवस्था के नाम पर न पानी भी नहीं था। इन दिनों नवरात्र चल रहा हैं महिलाएं ब्रत में थी, उसके बाद भी बिना कुछ खाए और पीए खाद के लिए लाइन में लगी थीं। इसी दौरान लाइन में लगी सियाबेटी पत्नी रामस्वरूप कुशवाह निवासी निबीं जैसे ही काउंटर पर नंबर आया, उसी दौरान गस आ गया और जमीन पर गिर पड़ी। तभी उसको उठाकर खुली हवा में ले जाया गया, वहां उसको पानी पिलाया तब कुछ देर बाद होश में आ सकी।
महिला पुलिसकर्मी मोबाइल में व्यस्त, पुरुष कर्मचारी लगवा रहे महिलाओं की लाइन.......
मंडी परिसर स्थित वेयर हाउस में खाद वितरण के दौरान महिला व पुरुषों की अलग अलग लाइन लगी थी। महिलाओं के लिए अलग से महिला पुरुषकर्मी तैनात की गई लेकिन यहां देखा गया कि महिला पुलिस कर्मी बैठकर मोबाइल चला रही थीं और पुुरुष पुलिसकर्मी महिलाओं की लाइन लगवा रहे थे।
फोटो करके डाल दो कलेक्टर साहब के ग्रुप पर और चलो.........
खाद वितरण के दौरान किसानों द्वारा हंगामा करने पर एक अधिकारी मौके पर पहुंचे और अपने राजस्व निरीक्षक से बोले फोटो खींच लो और कलेक्टर साहब के ग्रुप पर डाल दो और चलो, अपनी उपस्थित हो गई। विडंवना यह है कि अधिकारी चंद मिनट के लिए मौके पर पहुंचते हैं और फोटो करके अपनी नौकरी पका रहे हैं जबकि किसान सुबह से शाम तक भूखा प्यासा लाइन में लगा है, उसका दर्द कोई सुनने वाला नहीं हैं।
कथन
- वोट के समय सभी राजनीतिक दलों के लोग हमारे यहां पटक खाते हैं, आज किसान खाद के लिए परेशान हैं तो सत्ता व विपक्ष के नेता कोई भी नहीं आ रहा है। खाद जो मिल रहा है, वह अपर्याप्त है।
पुष्पा कुशवाह, शहदपुर
- ये मुरैना जिले का दुर्भाग्य है कि हमारे क्षेत्रीय सांसद केन्द्र सरकार में कृषि मंत्री हैं, उसके बाद भी मुरैना का किसान खाद के लिए परेशान हैं। मैं स्वयं पिछले सात दिन से आ रहा हूं लेकिन खाद नहीं मिल रहा है।
के के शुक्ला, सिरमिती
- खाद को जो अव्यवस्था फैल रही है, किसान परेशान हो रहा है, इसके लिए प्रशासन जिम्मेदार है। वितरण केन्द्र एक ही जगह रखा है, अगर केन्द्र और खोल दिए जाएं तो समस्या का निपटारा आसान है।
नाजिर मोहम्मद, काजी बसई
- रात को एक बजे कृषि मंडी परिसर में इस उम्मीद के साथ गांव से आए थे कि जल्दी पहुंच जाएंगे तो खाद पहले मिल जाएगा लेकिन यहां दोपहर के दो बजे गए अभी तक लाइन में ही लगे हैं।
दशरथ सिंह, मृगपुरा
- खाद की रैक आती है, उतना बटवा दिया जाता है। किसान पेसेंस रखें, खाद सबको मिलेगा। दो तीन दिन में एक रैक आती है, उतना बंट रहा है। अगर केन्द्र बढ़ाते हैं तो उसके लिए उतना खाल भी तो होना चाहिए। रही बात व्यवस्था की तो उसकी हम चर्चा कर रहे हैं।
नरोत्तम भार्गव, एडीएम

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