90 दिन में बनानी थीं गणवेश, सत्र निकला फिर भी तैयार नहीं

- 276 स्वसहायता समूहों को दिया था डे्रस बनाने का काम
- नवंबर में ऑर्डर और दिसंबर में जारी की राशि

By: Ashok Sharma

Published: 22 Feb 2021, 05:06 PM IST

मुरैना. कोरोना संक्रमण के चलते इस बार शासन ने सरकारी स्कूलों में गणवेश प्रदाय करने का पैटर्न थोड़ा बदला गया है। छात्रों को स्थानीय स्तर पर ही डे्रस उपलब्ध हो सके इसके लिए म प्र डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) के माध्यम से जिले के २७६ चिन्हित स्व सहायता समूहों को काम दिया गया। गणवेश 90 दिन में तैयार करके शाला विकास समिति के जरिए वितरित करनी थीं लेकिन पूरा सत्र निकल गया, अभी तक छात्र छात्राओं को डे्रस उपलब्ध नहीं हो सकी हैं।
म प्र डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन ने समूहों को नवंबर महीने में ऑर्डर जारी किए और दिसंबर माह में राशि भी जारी कर दी, उसके बाद भी समय सीमा निकल चुकी है। वहीं इस वर्ष का पूरा सत्र भी निकलने को है लेकिन अभी तक गणवेश स्कूलों तक नहीं पहुंचा हैं। खबर है कि कुछ ही स्वसहायता समूह हैं जिन्होंने काम शुरू किया है। जब अभी काम शुरू हुआ है तो गणवेश तैयार कब तक होंगी। इससे ही अंदाजा लगाया जा सकता है। शासन के ऐसे निर्देश थे कि एक समूह को ७.५० लाख से ज्यादा राशि का काम नहीं दे सकते इसलिए एक समूह को २००० से २५०० के बीच ही गणवेश बनाने का काम सौंपा गया है। खास बात यह है कि इस साल का प्रतिभा पर्व भी निकल गया उसमें भी बच्चों को गणवेश नहीं मिल सका।
दो सप्ताह पूर्व कुटेशन पर चर्चा फिर कब तैयार होंगे गणवेश?
गणवेश सिलाई को लेकर करीब दो सप्ताह पूर्व एनएलआरएम के अधिकारियों ने स्वसहायता समूह वालों की ऑनलाइन बैठक ली थी। उसमें तीन तीन फर्म से कपड़े के कुटेशन लाने का कहा गया था। ऐसी स्थिति में गणवेश कब तैयार होंगे। वहीं डे्रस के कलर को लेकर भी काफी समय तक समूह वाले उलझे रहे। फिर भी एक विकासखंड में एक से अधिक कलर की डे्रस तैयार की जा रही हैं।
समूहों का काम दिया, उनके चयन का कोई आधार नहीं
म प्र डे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा अपने स्तर पर स्व सहायता समूहों की सूची तैयार कर ली गई है। जबकि जिले के खंड स्रोत समन्वयकों से भी ऐसे स्व सहायता समूहों की सूची मांगी गई थी जो गणवेश सिलाई कर सकते हैं लेकिन उनमें से किसी समूह को काम नहीं दिया गया है। चर्चा है कि अधिकारियों ने अपनी सेटिंग के हिसाब से ऊपर से ऊपर समूहों को काम दिया गया है।
डे्रस तैयार नहीं, कैसे दर्ज होगी पोर्टल पर जानकारी
म प्र राज्य शिक्षा केन्द्र ने चार दिन पूर्व यानि कि १९ फरवरी को पत्र भेजकर सख्त निर्देश दिए हैं कि गणवेश प्राप्ति की जानकारी संस्था प्रभारी, बीआरसी एम शिक्षा मित्र मॉड्यूल पोर्टल पर कक्षाबार २२ फरवरी तक दर्ज कराएं। लेकिन मुरैना जिले में तो अभी तक गणवेश बनकर तैयार ही नहीं हुआ है। शासन स्तर से आदेश दिए गए हैं कि बीआरसी गणवेश वितरण का मॉनीटरिंग करें और जिला स्तर पर एनआरएलएम अपने स्तर पर काम कर रहा है।
फैक्ट फाइल
- 90 दिन में तैयार करनी थी समूहों को गणवेश।
- 276 स्व सहायता समूकों को दिया काम।
- 07.50 लाख तक का एक समूह को दे सकते हैं काम।
- 2000 से 2500 तक डे्रस सिलने का काम दिया गया है एक समूह को।
- 2020-21 सत्र के लिए तैयार करनी थी गणवेश।
- 600 रुपए प्रति छात्र दो डे्रस के लिए मद निर्धारित है शासन से।
कथन
- जिले के ऐसे २७६ स्व सहायता समूहों को गणवेश सिलाई का काम दिया गया है जिनका पूर्व में काम करने का अनुभव रहा हो, चाहे मास्क ही क्यों न सिले हों। समूहों के निर्धारण में बीआरसी से कोई मतलब नहीं हैं, एनआरएलएम पोर्टल पर जनपद स्तर से समूहों के नाम आए थे, उनको ही काम दिया गया है।
दिनेश सिंह तोमर, जिला परियोजना प्रबंधक, एनआरएलएम, जिला पंचायत

Ashok Sharma
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned