scriptHealth center in village, yet the burden of patients is on the distric | हर गांव में आरोग्य केंद्र फिर भी मरीजों का भार जिले पर, कम पड़ रही व्यवस्थाएं | Patrika News

हर गांव में आरोग्य केंद्र फिर भी मरीजों का भार जिले पर, कम पड़ रही व्यवस्थाएं

गांवों का भार सीएचससी, पीएचसी और ब्लॉक स्तर के मरीजों का भार जिला अस्पताल पर कम करने के लिए लागू ग्राम आरोग्य केंद्र व्यवस्था कारगर साबित नहीं हो पा रही है।

मोरेना

Published: February 26, 2022 06:51:44 pm


रवींद्र सिंह कुशवाह, मुरैना. कहीं स्टॉफ की समस्या है तो कहीं उपस्थिति का संकट है। परिणाम यह हो रहा है कि गांव का मरीज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर आने को मजबूर है।
जिला अस्पताल में मरीजों का भार बढऩे से गुणवत्तायुक्त स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पाती हैं। जिला अस्पताल में 50 पद विशेषज्ञ चिकित्सकों के स्वीकृत हैं, लेकिन पदस्थापना केवल पांच चिकित्सकों की है। 45 पद रिक्त रहने से जिला अस्पताल की सेवाएं भी प्रभावित होती हैं। सामान्य दिनों में भी जिला अस्पताल की ओपीडी औसतन प्रतिदिन एक हजार मरीजों तक पहुंचती है। गर्मी और बरसात के दिनों में यही आंकड़ा बढ़कर 1500 से ऊपर पहुंच जाता है। भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या भी ३०० की क्षमता के विरुद्ध 250-300 तक रहती है। ऐसे में अतिरिक्त बिस्तर लगाकर 400 से ज्यादा मरीजों के लिए व्यवथाएं की जाती हैं, लेकिन एक मरीज के दो-तीन दिन भर्ती रहने पर व्यवस्थाएं लडख़ड़ाने लगती हैं। जब मरीजों का दबाव बढ़ता है तब समस्या और गहरा जाती है।
आबादी के अनुपात में सुविधाएं नहीं
जिले की मौजूद आबादी 22.82 लाख से अधिक है। इनके विरुद्ध सात विाकसखड स्तर पर सीएचसी, चार जिला एवं सिविल अस्पताल संचालित हैं। 22 प्राथमिक और 237 उप स्वास्थ्य केंद्र भी जिले में संचालित हैं। लेकिन इसके बावजूद लोगों को समुचित और समय पर चिकित्सा सेवाएं नहीं मिल पाती हैं। अक्सर मरीजों को रैफर कर देने और उपचार में विलंब पर हंगामे होते रहते हैं।
उधार के चिकित्सकोंं से व्यवस्थाएं
जिले में कई जगह उधार के चिकित्सकों से व्यवस्थाएं बनाने का प्रयास किया जाता है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पोरसा में यह स्थिति लंबे समय से चली आ रही है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र महुआ, खडिय़ाहार एवं सिविल अस्पताल अंबाह से पूर्व में व्यवस्थाएं की जाती रही हैं, लेकिन स्थाई इंतजाम नहीं हो पाता है। यहां महिला चिकित्सक की मांग पूरी नहीं हो पा रही है। मजबूरी में महिला मरीजों को अंबाह या मुरैना आना पड़ता है।
थोड़ी सी जटिलता पर भी प्रसव की सुविधा नहीं
संस्थागत प्रसव पर शासन का पूरा जोर है। सामान्य प्रसव जिले के 20 स्वास्थ्य संस्थाओं पर कराए भी जा रहे हैं। लेकिन ब्लड ट्रांसफ्यूजन की स्थिति बनने पर समस्या खड़ी हो जाती है। ऐसे में केवल जिला अस्पताल और एसएचसी नूराबाद में ही सुविधा उपलब्ध हो पाती है। अप्रैल से दिसंबर 2021 की स्थिति में स्वास्थ्य संस्थाओं पर 23 हजार 960 महिलाओं के सामान्य प्रसव हुए। लेकिन ब्लड ट्रांसफ्यूजन की आवश्यकता वाले 702 मामलों में 672 जिला अस्पताल और 30 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र नूराबद में कराए जा सके है।
ग्राम आरोग्य केंद्र -मुरैना।
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रामपुरकलां।

फैक्ट फाइल

100 से ज्यादा चिकित्सकों की कमी है जिले भर में।
50 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद स्वीकृत हैं जिला अस्पताल में।
05 पदों पर ही विशेष चिकित्सकों की है पदस्थापना है।
45 विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद हैं रिक्त है जिला अस्पताल में।
27429 प्रसव हुए अप्रैल से दिसंबर २०२१ तक जिले में।
2878 प्रसव प्राइवेट संस्थाओं में कराए गए जिले भर में।
591 महिलाओं के प्रसव घरों पर कराए गए जिले भर में।
कथन-
हर गांव में ग्राम स्वास्थ्य केंद्र तो खोल दिए, लेकिन सुविधाएं नहीं हैं। बीमार होने पर मरीजों को 20 किमी दूर मुरैना या 26 किमी दूर चक्कर काटकर जौरा जाना पड़ता है।
रामगोपाल पांडे, कृषक, सुमावली।
-चिकित्सकों व स्टाफ की जिले भर में कमी है। जिला अस्पताल में मरीजों का भार बहुत है, लेकिन विशेषज्ञों के 50 में से 45 पद खाली हैं। ऐसे में सीजन पर जब ओपीडी 1500 तक पहुंचने लगती है तो व्यावहारिक समस्या आती है।
डॉ. विनोद गुप्ता, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल, मुरैना।

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