बेघर सुनीता को अंतत: वन स्टाप सेंटर में मिला आश्रय

Mahendra Rajore

Publish: Jan, 14 2018 09:00:00 PM (IST)

Morena, Madhya Pradesh, India
बेघर सुनीता को अंतत: वन स्टाप सेंटर में मिला आश्रय

सरकारी असंवेदनशीलता से जूझना पड़ा सेवाभावी लोगों को

मुरैना. घरेलू हिंसा का शिकार होकर पिछले तीन दिन से अपने मासूम बच्चे के साथ रेलवे स्टेशन पर बसेरा कर रही झारखंड की सुनीता को अंतत: वन स्टाप सेंटर में आश्रय मिल गया। हालांकि इसके लिए कुछ सेवाभावी लोगों को सरकारी अमले की असंवेदनशीलता के खिलाफ मशक्कत करनी पड़ी।
झारखण्ड की रहने वाली सुनीता को कुछ साल पहले उसके मायके वालों ने शादी के नाम पर इटावा के मड़ौली निवासी एक व्यक्ति को बेच दिया था। इसके बाद उस व्यक्ति ने सुनीता पर अत्याचार शुरू कर दिया। वह उससे घर-बाहर का काम कराता और इसके एवज में उसे मिलती मारपीट। अत्याचार हद से बढ़ गया तो अभी तीन-चार दिन पहले सुनीता भड़ौली से अपनी डेढ़ वर्ष की मासूम बेटी को लेकर भाग आई। भोली-भाली सुनीता न जाने कैसे मुरैना पहुंच गई, लेकिन यहां उसका कोई ठिकाना नहीं था। इसलिए तीन दिन से कड़ाके की ठंड में रेलवे स्टेशन पर ही बसेरा कर रही थी। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अमित जैन को उसके बारे में पता चला तो उन्होंने पुलिस व वन स्टाप सेंटर पर संपर्क कर सुनीता को आश्रय दिलाने का प्रयास किया, लेकिन सरकारी नुमाइंदों ने इस मामले में संवेदनशीलता नहीं दिखाई। इसके बाद बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अमित जैन ने सुनीता को एक रात के लिए एनजीओ द्वारा संचालित अभ्युदय आश्रम में बसेरा दिलाया। दूसरे दिन उन्होंने भोपाल बात की तब सुनीता को वन स्टाप सेंटर में आश्रय मिला। अभ्युदय आश्रम से बाल कल्याण समिति के सदस्य मनोज अग्रवाल, भारत विकास परिषद के नीरज मोदी तथा अशाराम प्रजापति दो महिलाओं के साथ सुनीता को लेकर वन स्टाप सेंटर पहुंचे।
अब करेंगे घर पहुंचाने का प्रयास
वन स्टाप सेंटर में आसरा पाने वाली सुनीता को अब उसके घर पहुंचाने के प्रयास किए जाएंगे। बताया गया है कि सबसे पहले उसके माता-पिता का पता लगाया जाएगा। इसके बाद उसे उनके पास पहुंचाने की कोशिश सरकारी स्तर पर की जाएगी। तब तक सुनीता वन स्टाप सेंटर में ही रहकर स्व-रोजगार से जुडऩे के लिए किसी हुनर का प्रशिक्षण लेगी। जरूरी हुआ तो उसे यहां से विधिक सहायता भी उपलब्ध कराई जाएगी। उल्लेखनीय है कि वन स्टाप सेंटर में घरेलू हिंसा से पीडि़त महिलाओं की रहने, खाने व सुरक्षा की व्यवस्था रहती है।

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