खराब खाद-बीज निकला तो कमर टूट जाती है किसान की

सैंपलिंग में उदासीनता बरततता है कृषि विभाग, अन्य अधिकारी भी नहीं देते ध्यान
अभियान- नकली खाद- बीज कारोबार पर कसे शिकंजा

मुरैना. बारिश न होने से इस बार खरीफ फसलों की बोवनी गति नहीं पकड़ पा रही है। किसानों ने खेतों को जोत दिया है, लेकिन अच्छी बारिश हो तब बोवनी शुरू करें। जिन किसानों के पास सिंचाई का इंतजाम है, उन्होंने बाजरा की बोवनी तेज कर दी है। लेकिन अब खाद-बीज की किसानों ने खरीद तो कर ली है, लेकिन खेतों में अनुकूल स्थिति न होने से बीज खेतों में नहीं डाल पा रहे हैं।


ऐसे में कृषि विभाग चाहे तो खाद-बीज के नमूने लेकर जांच करवा सकता है और किसानों को खाद-बीज का उपयोग करने से पहले सलाह दी जा सकती है। कृषि विभाग ने सहायक संचालक कृषि व एसएडीओ को शामिल कर एक जिला स्तरीय दल गठित कर दिया है, यह दल अभी मैदान में नहीं दिखा है। हालांकि बीते साल इन दिनों तक 60 एमएम से अधिक बारिश हो चुकी थी, लेकिन इस साल 30 एमएम से भी कम बारिश होने से किसान बोवनी नहीं कर पा रहे हैं। बारिश हर साल कम होती जा रही है। वर्ष 2019-20 में अच्दी बारिश हुई थी और साल भर की औसत बरात 843 एमएम तक पहुंच गई थी, लेकिन इसके पहले 2018-19 में 765.90 एमएम बारिश हुई थी। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार मुरैना जिले की वार्षिक सामान्य औसत बरसात 706.9 एमएम है। वर्ष 2016-17 में जिले में 574.50, मिलीमीटर, वर्ष 2017-18 में 488.70 मिलीमीटर, वर्ष 2020-21 में 527.50 मिलीमीटर वर्षा हुई थी। इस साल अब तक 22.5 एमएम बरसात हो पाई है।


ऋण लेकर खेती करते हैं किसान फिर ठगे जाते हैं


कृषि विभाग की उदासीनता की वजह से हर साल किसानों नकली खाद-बीज और कीटनाशक के नाम पर चपत लगाई जाती है। जबकि किसान ऋण लेकर खेती करते हैं और ठगे जाने पर बर्बाद हो जाते हैं। चालू खरीफ फसल के दौरान चंबल संभाग में किसानों को 71 करोड़ रुपए का अल्पावधि खरीफ फसल ऋण वितरण का लक्ष्य निर्धारित किया है। यह ऋण कॉपरेटिव बैंक के माध्यम से वितरित किया जाएगा। भिण्ड को 39, श्योपुर को 27 करोड़ और मुरैना जिले को पांच करोड़ रुपए का लक्ष्य दिया गया है। मुरैना में 1.82 करोड़ रुपए का ऋण किसानों को दिया भी जा चुका है।

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महेंद्र राजोरे Desk
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