जन्म देने के बाद गुजर गई मां, स्टाफ ने मासूम को पाला

- दो माह तक इलाज के साथ दिया मां का भरपूर प्यार
- एक महीने ऑक्सीजन पर और उसके बाद स्टाफ के हाथों में रही लाड़ो

By: Ashok Sharma

Published: 16 May 2021, 03:29 PM IST

मुरैना. बच्ची को जन्म देने के बाद इन्फेक्शन से मां गुजर गई। उस मासूम लाड़ो को क्रिटिकल पॉजीशन में एसएनसीयू (सिक न्यू वार्न केयर यूनिट) में रखा गया। वहां चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ ने उसकी गंभीरता से देखभाल की। स्टाफ ने एक महीने तक मशीन में रखकर ऑक्सीजन दी। उसके बाद चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ ने हाथों में खूब खिलाया, दुलारा और मां का भरपूर प्यार दिया। स्वस्थ्य होने पर उसके पिता को सुपुर्द कर दिया। पिता भी बच्ची को पाकर बेहद प्रसन्न हुआ।
जानकारी के अनुसार राजकुमारी पत्नी रामवीर जाटव निवासी गुर्जा का पुरा जौरा को १४ मार्च की सुबह ५:३० बजे जौरा अस्पताल में बच्ची को जन्म दिया। इन्फेक्शन के चलते राजकुमारी को जिला अस्पताल रेफर किया। हालत गंभीर होने पर उसको ग्वालियर रेफर कर दिया। वहीं बच्ची का वेट भी एक किलो था जबकि जन्म के समय नवजात बच्चे का जन्म ढाई किलो से ऊपर होना चाहिए। बच्ची की भी क्रिटीकल स्थिति को देखते हुए जिला अस्पताल की एसएनसीयू में भर्ती कराया गया। उधर १५ दिन बाद मंा की ग्वालियर में मौत हो गई। पिता एसएनसीयू पहुंचा लेकिन यहां चिकित्सकों ने कहा कि तुम्हे परेशान होने की जरूरत नहीं हैं, बच्ची अब हमारी जिम्मेदारी है। उसके बाद पिता गांव चला गया। यहां लाड़ो का डॉ. राकेश शर्मा, विकाश शर्मा, बनवारी गोयल, अंशुल तोमर ने उपचार किया। डॉ. राकेश शर्मा ने बताया कि नवजात बच्ची का वजन एक किलो था, ऐसी स्थिति में बच्चे के फेंफड़े, हर्ट सहित अन्य आंतरिंग अंग पूरी तरह विकसित नहीं होते हैं। इसलिए उसको एक महीने तक मशीन में रखकर ऑक्सीजन व दवा दी गई। एक महीने बाद बच्ची मशीन से बाहर आ गई और चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ के हाथों रहती। उसको दवा के साथ डिब्बे के पावडर का दूध दिया गया। पूरी तरह स्वस्थ्य होने पर अर्थात १.५ किलो वेट होने पर बच्ची को १० मई को उसके पिता के सुपुर्द कर दिया।
मां की कमी नहीं खलने दी बच्ची को
डॉ. राकेश शर्मा का कहना हैं कि बच्ची की भले ही इस दुनियां में नहीं रही लेकिन एसएनसीयू में बच्ची को मां की कमी नहीं खलने दी। उसका ठीक उसी तरह ध्यान रखा गया जिस तरह एक नवजात का उसकी मां ख्याल रखती है। लाडो की देखभाल के लिए अलग से स्टाफ की ड्यूटी लगा दी थी, कोई नहलाता, कोई दवा देता तो कोई दूध पिलाता था। जब भी कोई स्टाफ फ्री होता तो बच्ची को जरूर गोद में लेकर खिलाता था।
पिता ने दोनों हाथ जोडक़र दिया धन्यवाद
बच्ची को स्वस्थ्य पाकर पेशे से मजदूर पिता रामवीर जाटव ने दोनों हाथ जोडक़र चिकित्सक व नर्सिंग स्टाफ का धन्यवाद दिया और कहा कि मेरी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि किसी बड़े अस्पताल में इसका इलाज करा सकता। आप लोगों का मैं एहसान कैसे चुकाऊं पत्नी को तो खो चुका हूं, अब बच्ची ही मेरे जीने का सहारा बनेगी, जिसे आपने बचा लिया।

Ashok Sharma
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