scriptNeither action nor clean chit on certified tests | प्रमाणित जांचों पर न कार्रवाई, न हीं क्लीन चिट, महीनों पूर्व हो चुकी हैं जांच पूरी | Patrika News

प्रमाणित जांचों पर न कार्रवाई, न हीं क्लीन चिट, महीनों पूर्व हो चुकी हैं जांच पूरी

सुशासन और पारदर्शी कार्यप्रणाली के सरकारी दावों की पोल प्रशासनिक दांव-पेंच में खुल रही है। गंभीर और प्रमाणित मामलों को लटकाकर रखा जा रहा है। जांच के दायरे में आए अधिकारियों व कर्मचारियों पर न तो कार्रवाई की जा रही है और न ही उन्हें निर्दोष साबित किया जा रहा है।

मोरेना

Published: May 12, 2022 07:48:39 pm

रवींद्र सिंह कुशवाह, मुरैना. कोरोना काल में एमडीएम वितरण में धांधली के मामले में तो चार सदस्यीय जांच समिति के मुखिया पिछले छह माह में हस्ताक्षर तक नहीं कर पाए हैं।
कोरोना काल में पोरसा विकासखंड में मध्यान्ह भोजन के खाद्यान्न वितरण में धांधली का मामला पत्रिका ने ही 11 जून 2021 को उजागर किया था। एसडीएम ने उसी दिन चार सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया था। शिक्षा विभाग के तीन सदस्यों के अलावा जांच दल का मुखिया तत्कालीन पोरसा अब अंबाह के प्रभारी तहसीलदार राजकुमार नागोरिया को दिया गया था। खबर है कि शिक्षा विभाग के तीनों सदस्यों ने जांच प्रतिवेदन पर हस्ताक्षर कर दिए हैं और स्वयं के हस्ताक्षर कर प्रस्तुत करने के लिए जांच दल के मुखिया को भी जनवरी में ही भेज दिया था, लेकिन अब तक उस पर कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।
जांच में यह तथ्य सामने आ चुके हैं
-एक माहपूर्व अग्रिम मासिक खाद्यान्न उठाव पत्रक जारी होने के बाद बीआरसी कार्यालय से समय पर वितरित नहीं होते और रजिस्टर पर वितरण दिनांक भी अंकित नहीं होता। संस्था प्रधान की आरओ पर्ची संस्था प्रधान तक न पहुंचाकर समूहों को अप्रत्यक्ष रूप से लाभ पहुंचाया गया है। समूहों ने खाद्यान्न का उठाव कर विद्यालय के भंडार कक्ष में न रखकर अपने घरों पर रखा।
-पत्रिका में 11 जून 2021 को खबर प्रकाशित होने के बाद 42 विद्यालयों में अक्टूबर 2020 से फरवरी 2020 तक का खाद्यान्न 441.82 क्ंिटल गेहूं व 34.983.3 क्विंटल चावल सहित 476.803 क्विंटल खाद्यान्न का वितरण किया गया। इससे स्पष्ट है कि समूहों को समय पर आरओ पर्ची नहीं दी गई और जिन्हें दी गई उन्होंने खाद्यान्न का उठाव किया, लेकिन विद्यार्थियों को वितरित नहीं किया। छह माह तक खाद्यान्न अपने घरों पर रखा गया।
-घपले के लिए खाद्यान्न वितरण की व्यवस्था समूहों के लिए नजदीकी उचित मूल्य की दुकान से न करते हुए 20-25 किमी. दूर की गई। अनुचित लाभ समूहों को पहुंचाने के लिए ऐसा किया गया।
-बीआरसी ने स्व-सहायता समूहों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया। खबर प्रकाशित होने के बाद खाद्यान्न का वितरण इसका प्रमाण है। शासकीय हाईस्कूल स्कूल सेंथरा-बाढई में अक्टूबर 2020 से फरवरी 2021 तक का खाद्यान्न वितरण न होने की सूचना प्रभारी प्राचार्य ने 24 दिसंबर 2020 को जन शिक्षक मनोज पचैरी के माध्यम से बीआरसीसी कार्यालय कोदी थी। लेकिन फिर भी खाद्यान्न वितरण के प्रयास नहीं किए गए। समय पर खाद्यान्न वितरण न होने के लिए जन शिक्षक व बीआरसी पूर्ण रूप से जिम्मेदार हैं।
इन मामलों में भी कार्रवाई का अता-पता नहीं
केस-1
-जिला पंचायत के अधीन मनरेगा के वाटरसेड सहित अन्य कार्यों में कैलारस जनपद पंचायत क्षेत्र में 3.30 करोड रूपए से अधिक की वित्तीय अनियमितताएं विभागीय जांच में सिद्ध हो चुकी हैं। करीब आधा सैकडा उपयंत्री, सरपंच, सचिवों को नोटिस भी जारी किए गए। लेकिन बाद में नई जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया गया। खबर है कि इसमें तत्कालीन संभागीय राजस्व अधिकारी के दबाव में लीपापोती कर दी गई।
केस-2
स्वास्थ्य विभाग के सबलगढ दवा स्टोर से कागजों में आदेश जारी होने, कागजों में ही सामान प्राप्त करने और हकीकत में भुगतान कर करीब 50 लाख रुपए के हेरफेर के मामले को भी स्वास्थ्य विभाग ने जांच के नाम पर दफन कर दिया। स्वास्थ्य विभाग में आशा कार्यकर्ताओं की नियुक्ति के मामले में भी जिम्मेदारों को बचाकर संविदा अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई करके मामले को दबा दिया गया।
केस-3
नर्सिंग कॉलेज को रातों-रात मान्यता के मामले में प्रदेश स्तर की टीम अनियमितताएं सिद्ध कर चुकी है। लेकिन न तो कॉलेजों पर कार्रवाई हो पा रही है और न ही रातों-रात मान्यता देने वालों को कार्रवाई के दायरे में लिया जा रहा है।
प्रमाणित जांचों पर कार्रवाई नहीं -मुरैना।
जिला अस्पताल भवन।
केस-4
-अधूरे सीवर प्रोजेक्ट पर पूर्णता प्रमाण पत्र जारी करने और भुगतान की प्रक्रिया पूरी करने के मामले में पत्रिका की खबर के बाद प्रमाण पत्र को निरस्त कर दिए। भुगतान रोकने और जिम्मेदारों पर अनुशासन की कार्रवाई से अधिकारी बच रहे हैं।
कथन-
-प्रमाणित मामलों में भी कार्रवाई न होने से प्रशासन की छवि खराब होती है। कई ऐसे मामले हैं जो सीधे जनहित से जुड़े हैं और गड़बड़ी खुलकर सामने आ चुकी है। ऐसे मामलों में तो कार्रवाई होनी ही चाहिए।
दुष्यंत श्रीवास्तव, अभिभाषक, मुरैना।
-एमसडीएम के खाद्यान्न वितरण मामले में जांच पूरी हो चुकी है तो प्रतिवेदन नहीं देने के कारणों का पता करवाते हैं। एसडीएम को इस संंबंध में निर्देश दिए जाएंगे। स्वास्थ्य विभाग के दवा स्टोर का मामला भी दिखवाते हैं।
रोशन कुमार सिंह, सीइओ, जिला पंचायत, मुरैना।

सबसे लोकप्रिय

शानदार खबरें

Newsletters

epatrikaGet the daily edition

Follow Us

epatrikaepatrikaepatrikaepatrikaepatrika

Download Partika Apps

epatrikaepatrika

Trending Stories

यहाँ बचपन से बच्ची को पाल-पोसकर बड़ा करता है पिता, जैसे हुई जवान बन जाता है पतियूपी में घर बनवाना हुआ आसान, सस्ती हुई सीमेंट, स्टील के दाम भी धड़ामName Astrology: पिता के लिए भाग्यशाली होती हैं इन नाम की लड़कियां, कहलाती हैं 'पापा की परी'इन 4 राशियों के लड़के अपनी लाइफ पार्टनर को रखते हैं बेहद खुश, Best Husband होते हैं साबितजून में इन 4 राशि वालों के करियर को मिलेगी नई दिशा, प्रमोशन और तरक्की के जबरदस्त आसारमस्तमौला होते हैं इन 4 बर्थ डेट वाले लोग, खुलकर जीते हैं अपनी जिंदगी, धन की नहीं होती कमी1119 किलोमीटर लंबी 13 सड़कों पर पर्सनल कारों का नहीं लगेगा टोल टैक्ससंयुक्त राष्ट्र की चेतावनी: दुनिया के पास बचा सिर्फ 70 दिन का गेहूं, भारत पर दुनिया की नजर

बड़ी खबरें

पंजाब CM भगवंत मान ने स्वास्थ्य मंत्री को भ्रष्टाचार के आरोप में किया बर्खास्तकहां रहता है मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम? भांजे अलीशाह ने ED के सामने किया खुलासाकांग्रेस की Task Force-2024 और पॉलिटिकल अफेयर्स कमिटी का ऐलान, जानिए सोनिया गांधी ने किन को दिया मौकापाकिस्तान ने भेजी है विषकन्या: राजस्थान इंटेलिजेंस ने सेना को तस्वीरें भेज कर किया अलर्टकुतुब मीनार केसः साकेत कोर्ट में दोनों पक्षों की दलीलें पूरी, 9 जून को अदालत सुनाएगी फैसलाPooja Singhal Case: झारखंड की 6 और बिहार के मुजफ्फरपुर में ED की एक साथ छापेमारी, अहम सुराग मिलने की उम्मीदश्रीलंका में फिर बढ़ी पेट्रोल-डीजल की कीमत, पेट्रोल 420 तो डीजल 400 रुपए प्रति लीटरकर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया का विवादित बयान, 'मैं हिंदू हूं, चाहूं तो बीफ खा सकता हूं..'
Copyright © 2021 Patrika Group. All Rights Reserved.