ओवरलोड स्टीमर पर जान जोखिम में, सोशल डिस्टेंस भी नहीं

कोरोना संक्रमण को लेकर सोशल डिस्टेंंसिंग के लिए 27 दिन तक बाजार बंद रखने वाले प्रशासन को चंबल के नाव और स्टीमर घाटों पर नियम-कायदे नहीं दिख रहे।

By: Ravindra Kushwah

Published: 27 Jul 2020, 07:11 AM IST

रवींद्र सिंह कुशवाह, मुरैना. जर्जर से दिखने वाले स्टीमर में चंबल नदी के अटारघाट पर ओवरलोड स्टीमर में एक साथ इंसान और वाहन निकाले जा रहे हैं। 40 की क्षमता वाले स्टीमर में 100 तक लोग बैठाए जाते हैं और साथ में दो पहिया वाहन भी लादे जाते हैं। सीमा सील और न ही चेकिंग पाइंट जैसी व्यवस्थाएं यहां कागजों में हैं।
राजस्थान की सीमा से लगने वाले राजघाट पर सीमाएं सील कर चेकिंग पाइंट लगाया लगाया है, लेकिन सबलगढ़ के अटार और अंबाह के उसैदघाट पर हद दर्जे की लापरवाही बरती जा रही है। मुरैना के सबलगढ़ तहसील में अटारघाट राजस्थान में करौली जिले के मडराइल से जुड़ता है। यहां से रोज बड़ी संख्या में लोगों का दोनों प्रदेशों के बीच आना-जाना है। वैसे तो यहां पीपों का पुल अक्टूूबर से जून के मध्य तक रहता है, लेकिन उसके बाद स्टीमर ही सहारा है। पुल के समय ज्यादा वसूली की खबरें तो आती हैं, बसें भी निकाली जाती हैं, लेकिन ओवरलोडिंग जैसी स्थिति नहीं रहती। इस समय चंबल में पानी भी बारिश की वजह से बढ़ गया और सुरक्षा के प्रबंध भी नहीं हैं। अटार घाट से करौली होते हुए जयपुर तक रोज 500 से 1000 व्यक्ति आते-जाते हैं। अक्सर करौली जाने वाले उमेश कुमार (परिवर्तित नाम) ने बताया कि स्टीमर पर बतौर किराया कोई फिक्स नहीं है। इधर से गए तो 50 रुपए लिए और जब लौटकर आए तो 70 रुपए लिए। इसी प्रकार बाइक का इधर से 150 और उधर से 200 रुपए लिया। हल्के चार पहिया वाहन भी 400-500रुपए में निकाले जाते हैं। जनपद पंचायत सबलगढ़ के अधीन संचालित नावघाट ठेका इस बार नहीं हो सका। इसलिए जनपद ही इसका संचालन करवा रही है। उसी के कर्मचारी अपने लोगों के माध्यम से संचालित हैं, फिर भी नियम-कायदे ताक पर रखे जा रहे हैं।
पक्का पुल बनने से मिलेगी समस्या से निजात
राजस्थान सरकार मप्र और राजस्थान को जोडऩे वाले अटार घाट पर पक्का पुल बनवा रही है। एनओसी की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। ६० करोड़ रुपए से अधिक की लागत से मप्र की सीमा में पुल का निर्माण होना है। अगले साल तक पुल चालू होने की उम्मीद है। लेकिन स्टीमर संचालन करने वाले लोगों ने अभी से लापरवाही शुरू कर दी है।
पुल निर्माण से ये होंगे फायदे
-मप्र व राजस्थान के बीच १२ मासी सीधा सड़क संपर्क शुरू हो जाएगा।
-सबलगढ़ से करौली की दूरी मात्र 60 किलोमीटर रह जाएगी। मुरैना होकर यह दूरी 195 किलोमीटर है।
-स्टीमर से चंबल पार करने के दौरान रहने वाली हादसे की आशंका खत्म हो जायेगी।
फैक्ट फाइल
126.76 करोड़ की लागत से किया जा रहा है पुल निर्माण।
-1150 मीटर होगी नदी के ऊपर पुल की लंबाई।
-640 मीटर का संपर्क मार्ग राजस्थान की सीमा में बनेगा।
-560 मीटर का संपर्क मार्ग मप्र में।
-23 पिलर बनाए जाने हैं पक्के पुल के लिए।
-50-50 मीटर की दूरी पर बनेंगे पिलर
-2021 के बनकर तैयार होने की है उम्मीद।
कथन-
अटार घाट पर संचालित स्टीमर में यदि ओवरलोडिंग हो रही है और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है तो हम सुबह ही दिखवाते हैं। यदि नियम विरुद्ध कुछ मिला तो कार्रवाई की जाएगी।
एमपी सिंह, सीईओ, जनपद पंचायत, सबलगढ़

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