सात बीआरसी ने निकाला नियम विरुद्ध 2.81 लाख रुपया, कार्रवाई सिर्फ एक पर

- नियुक्ति नहीं थी फिर भी वेतनमद से करते रहे चोकीदार को भुगतान
- आयुक्त ने कराई जांच फिर भी कार्रवाई पर उठ रहे सवाल

By: Ashok Sharma

Published: 15 Sep 2020, 10:10 PM IST


मुरैना. पहाडग़ढ़ विकास खंड में चोकीदार जिसकी कहीं होई नियुक्ति नहीं थी फिर भी १२ साल सात माह से लगातार उसका वेतन निकलता रहा। इस मामले में शिकायत चंबल आयुक्त को की गई, उन्होंने जांच के आदेश दिए, जांच उपरांत सिर्फ एक बीआरसी को सस्पेंड किया हालांकि उसे बाद में बहाल भी कर दिया परंतु सात बी आर सी द्वारा वेतनमद जो कि सरकारी मद होता, उसमें से २८१३६० रुपए उस व्यक्ति के नाम निकाले गए जिसकी कहीं कोई नियुक्ति नहीं हैं। इस वित्तीय अनियमितता के दायरे में सात बीआरसी आ रहे हैं परंतु चंबल आयुक्त ने सिर्फ एक बीआरसी के खिलाफ कार्रवाई की। ये कैसी जांच जिसमें दोषी सात और कार्रवाई सिर्फ एक पर। इससे तो जांच पर भी सवाल उठ रहे हैं।
जानकारी के अनुसार गोपाल प्रजापति नामक व्यक्ति को अक्टूबर २००७ बीआरसी रविन्द्र सिंह तोमर ने एक हजार रुपए प्रतिमाह पर बिना नियुक्ति के चौकीदार के रूप में रखा था। इन्होंने उसको अगस्त २००८ तक हर महीने प्रोफेशनल फीस से भुगतान किया। सितंबर २००८ से अप्रैल २०१० तक इसी प्रोफेशनल फीस से उस समय बीआरसी रहे एल पी शर्मा, भगवान सिंह यादव, शिव कुमार ङ्क्षसह भदौरिया, कप्तान ङ्क्षसह यादव ने अपने अपने कार्यकाल में हर महीने एक हजार रुपए का भुगतान किया जाता रहा। मई २०१० से अगस्त २०१२ तक बीआरसी कप्तान सिंह यादव और संजय शिवहरे ने एक हजार से बढ़ाकर १८१० प्रति माह भुगतान कर दिए और वेतन मद जो कि सिर्फ सरकारी कर्मचारियों के लिए होता है, उससे भुगतान किया गया। सितंबर २०१२ से जनवरी २०१६ तक बीआरसी संजय शिवहरे की मेहरवानी हुई और २३८५ रुपए प्रति माह के हिसाब से सरकारी मद से भुगतान कर दिया। इसी तरह फरवरी २०१६ से अक्टूबर २०१९ तक बीआरसी देवेन्द्र हरदेनियां के द्वारा उसी सरकारी मद से २३८५ रुपए के हिसाब से प्रति महीने उस व्यक्ति के नाम भुगतान निकाला गया जिसकी कहीं होई नियुक्ति नहीं थी। नवंबर २०१९ में बीआरसी ब्रजेश शर्मा ने पकड़ा और इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी व जिला समन्वयक जिला शिक्षा केन्द्र मुरैना को पत्र लिखकर कार्रवाई की मंाग की लेकिन कहीं से कोई कार्रवाई नहीं की गई। दोनों जगह से क्लीनचिट दे दी गई।
डीइओ, डीपीसी ने डाला वित्तीय अनियमितता पर पर्दा
सरकारी मद से २.८१ लाख का भुगतान नियम विरुद्ध कर दिया। इस वित्तीय अनियमितता के मामले में जिला शिक्षा अधिकारी व डीपीसी ने अपने अपने स्तर पर जांच कराई लेकिन कार्रवाई नहीं की। डीपीसी नोटिस जारी करके बैठ गए आज तक आगामी कार्रवाई नहीं की। जिला शिक्षा अधिकारी ने प्राचार्यों की कमेटी बनाकर जांच कराई, उन्होंने भी वही रिपोर्ट दी जो अधिकारियों ने चाही। अर्थात जांच के नाम पर भी गोलमाल किया गया। खबर है कि एक पहाडग़ढ़ क्या, पूरे जिले में इसी तरह चोकीदार रखे गए हैं और शासकीय मद से उनको लगातार भुगतान किया जा रहा है। अगर जिला व संभाग के वरिष्ठ अधिकारी इसकी गहराई से जांच कराएं तो बड़ी वित्तीय अनियमितता सामने आ सकती है।
कथन
- पहाडग़ढ़ में चोकीदार की बिना नियुक्ति के भुगतान की शिकायत आई थी। उसमें हमने जांच कराई थी। उसमें एक बीआरसी के खिलाफ कार्रवाई की गई अन्य के खिलाफ क्यों नहीं हुई, हम जांच रिपोर्ट दिखवा लेते हैं।
आर के मिश्रा, आयुक्त, चंबल संभाग

Ashok Sharma
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned