गाय के गोबर से बनी मूर्तियों की विदेशों में धूम

अनूठा प्रयास: मूर्तियों से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा निराश्रित गोवंश की सेवा में लगाते हैं मूर्ति कलाकार

- गाय के प्रति श्रद्धा व समर्पण भाव के चलते दवा व्यवसायी बने मूर्ति कलाकार

By: Ashok Sharma

Updated: 23 Aug 2020, 04:00 PM IST


मुरैना. प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमाओं का प्रयोग रोकने मुरैना के कलाकार दौलत उर्फ दिलीप गोयल द्वारा गोवंश के गोबर से मूर्ति बनाने का काम किया जा रहा है। उनके हाथ की बनाई गई गोवंश के गोबर की मूर्तियां मुरैना को देश विदेश में नाम कर रही हैं। मूर्तियां भारत के विभिन्न शहरों में तो खासी चर्चित हैं परंतु खासकर सिंगापुर, आस्ट्रेलिया सहित अन्य देशों में मुरैना के नाम की धूम हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार गाय में ३४ करोड़ देवी देवताओं का वास बताया गया है इस लिहाज से लोग गोवंश के गोबर की मूर्तियों को पूजा के लिए ज्यादातर प्रयोग कर रहा है। मूलतह पेशे से दवा व्यवसायी दिलीप गोयल गाय के प्रति श्रद्धा और समर्पण के भाव से मूर्ति बनाने का काम कर रहे हैं।
कलाकार दौलत गोयल ने वर्ष २००५ में गोवंश के गोबर से मूर्ति बनाना शुरू किया था। पहले मुरैना, ग्वालियर, भोपाल, इंदौर के बड़े धार्मिक आयोजन और मेले में प्रदर्शनी लगाई। वहीं से ये चर्चाएं में आए। अब इंदौर, भोपाल सहित अन्य महानगर और विदेशों से भी डिमांड आने लगी है। इन मूर्तियों की बिक्री से आने वाली राशि का एक बड़ा हिस्सा कलाकार दौलत गोयल द्वारा निराश्रित गोवंश की सेवा में दान स्वरूप दिया जाता है। मुरैना में लॉक डाउन शुरू होते ही निराश्रित गोवंश की सेवा के लिए एक समिति द्वारा चारा, घास खिलाया जा रहा है। उस समिति के जरिए मूर्ति कलाकार अभी तक एक लाख से अधिक की राशि दान स्वरूप दे चुके हैं। इन दिनों गणेशोत्सव चल रहा है। जो कोई इनके यहां से गणेश जी मूर्ति लेकर आता है, उस पैसो को अपने घर में रखी एक दान पेटी में डलवा दिया जाता है। उस राशि को गोसेवा में ही लगाते हैं।
ऐसे तैयार करते हैं मूर्ति
कलाकार दौलत उर्फ दिलीप गोयल ने बताया कि शहर की गोशाला से गोवंश का ताजी गोबर लेकर आते हैं। उस गोबर को सांचे के जरिए मूर्ति को आकार दिया जाता है। उसको सुखाने के बाद उसको रंग दिए जाते हैं। मूर्तियों की फिनिसिंग और रंग भरने में ही सबसे ज्यादा मेहनत होती है। इन मूर्तियों में चकम और पॉलिश के लिए ताजा गाय के गोबर को कपड़े से निचोडक़र उसमेंं गाय का दूध, दही और गोमृत्र मिलाकर पॉलिश तैयार की जाती है, उससे मूर्ति में रंग भरे जाते हैं। बाजार से खरीदा गया कोई रंग नहीं भरा जाता है।
डेढ़ हजार श्रीजी की मूर्ति पहुंची इंदौर
इन दिनों गणेशोत्सव चल रहा है। इंदौर से डेढ़ हजार गोवंश के गोबर से बनी मूर्तियों की डिमांड आई थी। जो तैयार कर इंदौर भेजी दी गई। कलाकार दौलत का कहना हैं कि अगर कोई मूर्ति बनाना सीखना चाहता है तो वह आ सकता है। वैसे भी दो सहायक उन्होंने तनख्वाह वेश पर रखे हुए हैं।

Ashok Sharma
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