scriptStray cows destroy crops worth more than 100 crores every year | 100 करोड़ से ज्यादा की फसलें नष्ट कर देता आवारा गोवंश हर साल | Patrika News

100 करोड़ से ज्यादा की फसलें नष्ट कर देता आवारा गोवंश हर साल

जिले में खुला घूम रहा 20 हजार से अधिक गोवंश हर साल किसानों की 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की फसलें नष्ट कर देता है। आधा सैकड़ा के करीब छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनता है। लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन के नाम पर केवल औपचारिकताएं और बजट खुर्दबुर्द किया जा रहा है। शासन और प्रशासन के पास गोशालाओं के निर्माण की कार्ययोजना तो है, लेकिन उनके बेहतर प्रबंधन पर कोई स्पष्ट नीति नहीं है।

मोरेना

Published: October 29, 2021 07:39:49 pm

रवींद्र सिंह कुशवाह, मुरैना. जिले में खुला घूम रहा 20 हजार से अधिक गोवंश हर साल किसानों की 100 करोड़ रुपए से ज्यादा की फसलें नष्ट कर देता है। आधा सैकड़ा के करीब छोटी-बड़ी दुर्घटनाओं का कारण बनता है। लेकिन इसके बावजूद प्रबंधन के नाम पर केवल औपचारिकताएं और बजट खुर्दबुर्द किया जा रहा है। शासन और प्रशासन के पास गोशालाओं के निर्माण की कार्ययोजना तो है, लेकिन उनके बेहतर प्रबंधन पर कोई स्पष्ट नीति नहीं है।
जिले भर में कुल 353 के करीब गोशालाओं के निर्माण की कवायद की जा रही है। इनमें से जून की स्थिति में 47 गोशलाओं का निर्माण पूरा होने का दावा किया गया था, लेकिन वास्तव में 28 गोशालाओं का ही निर्माण हो सका है। निर्मित गोशालाओं में से 15 का ही संचालन हो पा रहा है। औसतन 100 गोवंश की क्षमता वाली इन गोशालाओं का प्रबंधन ठीक होता तो यहां 1500 से 2000 के करीब गोवंश का प्रबंधन किया जा सकता था, लेकिन यहां शासन के रिकॉर्ड में महज 945 गोवंश का ही प्रबंधन हो पा रहा है। किसान हुक्मचंद शर्मा कहते हैं कि जिले भर में 50 हजार के करीब गोवंश खुला घूम रहा है। इसमें आधे से ज्यादा गोवंश तो ऐसा है, जिसे लोग दूध निकालने के बाद खुला छोड़ देते हैं। बरसात की फसलों को इतना ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचाता, लेकिन रबी फसलों में हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान आवारा गोवंश करता है। उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं कहते हैं कि इसका कभी अध्ययन नहीं हुआ। वास्तविक संख्या का भी कोई ठोस अध्ययन नहीं है। किसान नेता रामौतार शर्मा ने कहा कि जिले भर में आवारा गोवंश की संख्या एक लाख तक हो सकती है। प्रशासन या सामान्य लोगों को मुख्य मार्गों, बाजार और हाइवे के किनारे का ही गोवंश दिखता है। गांवों और खेतों में किसान बहुत परेशान है और हजारों की संख्या में आवारा गोवंश घूम रहा है।
निजी गोशालाओं की संख्या कम, प्रबंधन चार गुना से ज्यादा
जिले भर में 9 निजी गोशालाओंं का भी संचालन किया जा रहा है। यह गोशालाएं अपेक्षाकृत ज्यादा बेहतर तरीके से संचालित बताई जा रही हैं। यहां कुल चार हजार 855 गोवंश के प्रबंधन के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि इन आंकडों पर पूरी तरह से भरोसा नहीं किया जा सकता। क्योंकि अनुदान के लालच में लोग इनकी संख्या बढ़ा-चढ़ाकर बत सकते हैं।
चार करोड़ रुपए से ज्यादा का अनुदान
शासन स्तर से गोशालाओं में रखे जा रहे गोवंश के लिए चारा और दाने के नाम पर प्रति गोवंश 20 रुपए का अनुदान दिया जाता है। इसमें 15 रुपए भूसा या अन्य चारे के लिए और पांच रुपए सुदाना (अन्नदाना) के नाम पर दुग्ध संघ को दिया जाता है। इस प्रकार जिले भर में निजी और शासकीय कुल 24 गोशालाओं में दर्ज पांच हजार 800 गोवंश के नाम पर हर साल करीब 4.17 करोड़ रुपए अनुदान के तौर पर बांटे जा रहे हैं।
गोशालाओं के संचालन में असुविधाएं बाधक
पूर्व में बनाई जा चुकी गोशालाओं में प्रत्येक के निर्माण पर शासन ने 28 लाख रुपए खर्च किए हैं। इसलिए उनमें कहीं पानी और कहीं पर्याप्त टीनशेड व अन्य व्यवस्थाओं की कमी बनी रही। अब 38 लाख रुपए में गोशालाओं का निर्माण कराया जा रहा है। इनमें गोवंश रखने के हिसाब से सभी प्रकार की सुविधाएं जुटाने का प्रयास किया जाएगा।
आठ करोड़ खर्च हो चुके है निर्माण पर
अब तक निर्मित हो चुकी 28 गोशालाओं के निर्माण पर
अब तक बनकर तैयार हो चुकी 28 गोशालाओं के निर्माण पर करीब आठ करोड़ रुपए खर्च किया जा चुका है। अब 325 गोशलााओं का निर्माण और कराया जाना है। इनके निर्माण पर करीब 125 करोड़ रुपए खर्च होंगे। हालांकि इनका संचालन कौन और कैसे करेगा, इस पर कोई स्पष्ट नीति नहीं है। पिछले दिनों आदेश आया था कि गोशालाओं का संचालन ग्रामीण क्षेत्रों में स्व-सहायता समूह करेंगे, लेकिन बजट व अन्य व्यवस्थाओं पर स्पष्ट नहीं किया गया।
फैक्ट फाइल
-20 हजार के करीब गोवंश खेतों व सड़कों पर खुला घूमता है।
-5800 गोवंश का ही प्रबंधन किया जा रहा है निजी व सरकारी गोशालाओं में।
-28 सरकारी गोशालाएं बनकर तैयार होने का दावा किया जा रहा है।
-15 गोशलााओं का ही संचालन इनमें से हो पा रहा है।
-945 गोवंश का प्रबंधन हो रहा है सरकारी गोशालाओं में।
-9 निजी गोशालाओं में रखा जा रहा है 4855 गोवंश।
-20 रुपए प्रति गोवंश प्रतिदिन चारा व सुदाना के लिए मिलता है अनुदान।
कथन-
-आवारा गोवंश से लोगों को बहुत परेशान है। गोशालाओं का निर्माण होने की खबरें तो आती हैं, लेकिन प्रबंधन पर ध्यान नहीं है। आए दिन दुर्घटनाओं के साथ यातायात में भी बाधक हैं और किसानों की हर साल करोड़ रुपए की फसलें नष्ट कर देते हैं।
मयंक सिंह तोमर, एडवोकेट, पोरसा
आवारा गोवंश से किसान ही नहीं शहरवासी भी परेशान हैं। सड़कों पर चलना मुश्किल है, बाजारों में आना-जाना दुष्कर हो जाता है, कई बार। इनका प्रबंधन होना ही चाहिए।
पवन दुबे, युवा।
-जो गोशालाएं बन चुकी हैं, उनमें से 15 का संचालन व्यवस्थित किया जा रहा है, 945 गोवंश भी रखा जा रहा है। 300 से ज्यादा गोशालाओं के निर्माण का प्रस्ताव है। सुविधाओं के लिए राशि बढ़ाई गई है, अब 38 लाख रुपए में एक गोशाला बनेगी। इसके बाद आवारा गोवंश का प्रबंधन ज्यादा बेहतर हो सकेगा।
डॉ. आरके त्यागी, उप संचालक, पशु चिकित्सा, मुरैना।
आवारा गोवंश का प्रबंधन
यातायात में बाधक गोवंश।

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