ऐसा मंदिर जहां स्वयं प्रकट हुआ शिवलिंग

श्रावण मास में लगता है भक्तों का तांता

By: rishi jaiswal

Published: 02 Aug 2020, 11:41 PM IST

रामपुर कलां। कस्बे से 3 किलोमीटर दूर टैलरी गाँव में पहाड़ पर बसा भगवान भोले शंकर का शिव मंदिर अतिप्राचीन और चमत्कारी है। इस स्थान पर श्रावण मास में भगवान भोले शंकर के नित नवीन प्रतिरूप शिवलिंग प्रकट होते हैं और स्वत: ही लुप्त हो जाते हैं। इस अतिप्राचीन शिवलिंग के बारे में मान्यता है कि करीब 400 वर्ष पूर्व यहां शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था इसीलिए इस शिवलिंग को स्वयंभू शिवलिंग कहा जाता है। यह शिवलिंग अति चमत्कारी है। यहां दर्शन करने और जल एवं बिल्व पत्र चढ़ाने से भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है। टैलरी शिव मंदिर तक पहुंचने हेतु सडक़ एवं सीढ़ी दोनो मार्ग वर्ष भर सुचारू रूप से चालू रहते हैं। इस मंदिर पर रहने वाले पुजारी ने बताया कि स्वयंभू भगवान भोले शंकर की इस शिवलिंग की थाह जानने का प्रयास कई संस्थाओं ने कई बार किया लेकिन हर बार उन्हें असफलता ही हाथ लगी।

हर वर्ष लगता है कांवडिय़ों का मेला

टैलरी स्थित भगवान शिव के इस मंदिर पर हर वर्ष कांवडिय़ों का मेला लगता है। भक्त कांवड़ में रखकर गंगा जी का पावन जल लाते हैं और श्रावण मास के कृष्ण पक्ष के चौदहवीं को भक्त जल चढ़ा कर भगवान शंकर का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आस पास के क्षेत्रों की तीन तहसीलों सबलगढ़,कैलारस, विजयपुर के सभी कांवडिय़ां इसी शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं। भक्तगण कांवड़ में गंगोत्री,हरिद्वार और सोरों का जल भरकर लाते हैं। जल चढ़ाकर मनोकामना पूर्ति का वरदान प्राप्त करते हैं। इस वर्ष कोविड़ 19 के कारण एक भी कांवड़ नही आई है। सैंकड़ों वर्षों में पहली बार ऐसा हुआ है कि मंदिर पर एक भी कांवडिय़ां जल चढ़ाने नही आया है।निकोड

दूर राज्यों से दर्शन करने आते है भक्त

इस शिव मंदिर के दर्शन के लिए देष भर से भक्त आते हैं। लेकिन श्रावण मास में इस स्वयंभू शिव ***** पर जल चढ़ाने के लिए राजस्थान ,उत्तरप्रदेश और दिल्ली के अलावा कई राज्यो के लोग दर्शन और पूजा करने आते हैं।

मंदिर के साथ साथ एक अच्छा पिकनिक स्पॉट भी

टैलरी शिव मंदिर के आसपास एक घना जंगल है इसके अलावा यहां पर एक झरना भी है जो बरसात के मौसम में अत्यंत मनोहारी रूप धारण कर लेता हे। यहां स्थित कुआं में वर्ष भर शीतल जल रहता है इसके अलावा यहां की हरियाली इसे एक अच्छा पिकनिक स्पॉट बनाती है।

शास्त्रों में भी वर्णित है स्वयंभू शिवलिंग की महिमा

हमारे शास्त्रों में भी स्वयंभू शिवलिंग की महिमा का वर्णन मिलता है। शास्त्रों के अनुसार स्वयंभू शिवलिंग अतिचमत्कारी और फलदायीं होने के साथ साथ मनोकामनाओं की पूर्ति करने वाला होता है। स्वयंभू शिवलिंग पर दूध,जल,दही, शहद,बिल्व पत्र चढ़ाने से भक्त की सभी इच्छाएं पूर्ण होती है। शास्त्रों में भगवान शंकर को आशुतोष अर्थात तुरंत कृपा करने वाला बताया गया है।

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