पत्रिका ने शुरू किया अभियान...गेट सेफ गो

इन उद्योगों को खड़ा होने में मदद के लिए किए जाने वाले प्रयासों और अपेक्षाओं में शासन और उद्योगों के बीच समन्वय के लिए पत्रिका ने सेतु का काम किया है।

By: rishi jaiswal

Published: 18 Apr 2020, 10:25 PM IST

मुरैना. कोरोना संक्रमण से बचने के लिए घोषित देशव्यापी लॉक डाउन ने जिले की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया है।

मस्टर्ड ऑयल के हब के तौर पर देश भर में धाक रखने वाले कारोबार पर 50 प्रतिशत तक मंदी की मार है, दूध, पत्थर, पाइप सहित अन्य निर्माण कंपनियों पर भी विपरीत असर है।

इन उद्योगों को खड़ा होने में मदद के लिए किए जाने वाले प्रयासों और अपेक्षाओं में शासन और उद्योगों के बीच समन्वय के लिए पत्रिका ने सेतु का काम किया है।

मस्टर्ड ऑयल कारोबारियों के लिए बड़ी क्राइसेस का दौर है। मंडियां नहीं खुलने से सरसों की खरीद नहीं हो पा रही है, ऐसे में जमा स्टॉक खत्म हो रहा है।

वहीं 100-125 करोड़ के निर्यात वाला पत्थर उद्योग भी बुरे दौर से गुजर रहा है। ऐसे में उद्योगपति चाहते हैं कि उन्हें फिर से खड़ा होने में सरकार मदद करे।

सरकार और उद्योगों के बीच पत्रिका सेतु का काम करे। अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करने के लिए 28 औद्योगिक इकाइयों को 20 अप्रैल से शर्तों के साथ संचालन की अनुमति देकर कुछ राहत देने की प्रयास किया गया है, लेकिन उद्योंगों के लिए आर्थिक संकट से उबरना चुनौती है।

उत्पादन बंद होने या 50 प्रतिशत क्षमता के साथ संचालित इकाइयों पर बिजली का फिक्स चार्ज बड़ा बोझ है। उत्पादन बंद होने या आधा रह जाने से श्रमिकों को आगे वेतन-भत्ते देना मुश्किल होगा। ऐसे में सरकारी मदद ही इन उद्योगों को जीवित रखने में मददगार हो सकती है।

यूरोप तक जाता है मुरैना का पत्थर

जिले में स्टोन उद्योग का सालाना टर्न ओवर करीब 150 करोड़ का है। इसमें स 120 करोड़ के करीब का निर्यात यूरोप के देशों में होता है। जिले में 50 के करीब छोटे-बड़े पत्थर कारखाने संचालित होते हैं। यहां खदानों से निकलने वाले पत्थर को फर्शी पत्थर के तौर पर तैयार किया जाता है।

5 हजार करोड़ का मस्टर्ड ऑयल कारोबार

देश भर में मस्टर्ड ऑयल के हब के तौर पर मुरैना की पहचान है। रोज करीब 7.5 से 8 लाख लिटर मस्टर्ड ऑयल का प्रोडक्शन होता है। 1 माह में 200-250 करोड़ का केवल मस्टर्ड ऑयल कारोबार होता है। सालाना ऑयल इंडस्ट्री का 4 से 5 हजार करोड़ रुपए का कारोबार होता है।

पत्रिका कर रहा सेतु का काम

उद्योगों पर आर्थिक संकट के दौर में पत्रिका ने सरकार के बीच सेतु का काम किया है। हम देख रहे हैं, प्रदेश भर से उद्योगों के हालात पर उद्योगपतियों और विशेषज्ञों की चर्चाएं इसी पर फोकस हैं। हमारी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए पत्रिका के प्रयासों को उद्योगपति एक उचित पहल मानते हैं।

इस तरह की मांग से राहत की उम्मीद

औद्योगिक ऋण पर ब्याज की प्रक्रिया को सरल किया जाए, किस्तें स्थगित की जाएं और लॉक डाउन की अवधि का ब्याज माफ किया जाए।

कर्मचारियों को वेतन-भत्तों सहित अन्य जरूरतों को पूरा करने के लिए औद्योगिक संस्थानों जल्द राहत पैकेज की दरकार है।

उद्योग विभाग से मिलने वाली सहूहिलयतों का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए।

घरेलू, लघु एवं सूक्ष्म उद्योगों की पूरी जिम्मेदारी सरकार को कुछ समय के लिए उठानी चाहिए।

औद्योगिक संगठनों और उनके प्रतिनिधियों से उनकी व्यावहारिक परेशानियों और उनसे उबरने के उपायों पर उच्च स्तरीय चर्चा की जानी चाहिए।

70 से ज्यादा बड़ी औद्योगिक इकाइयां संचालित हैं जिले में।
200 के करीब मध्यम औद्योगिक इकाइयों का संचालन होता है।
1000 से ज्यादा लघु औद्योगिक इकाइयों का भी संचालन होता है।
30 से ज्यादा इकाइयां मस्टर्ड ऑयल प्रोडक्शन की हैं।
5 हजार करोड़ के करीब है मस्टर्ड ऑयल कारोबार।

लॉक डाउन में उद्योग बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। ऐसे में सरकार को बिजली के फिक्स चार्ज माफ करने या वास्तविक खपत के आधार पर देने पर विचार करना चाहिए। 3 माह का श्रमिकों का वेतन-भत्ते भी देने चाहिए।

इससे बेपटरी हुए उद्योग जगत को पटरी पर लाने में मदद मिलेगी। इस संबंध में हमने मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को एसेसिएशन की ओर से पत्र भी भेजा है।

कृष्ण कुमार मित्तल, जनरल सेक्रेटरी, बानमोर इंडस्ट्रीज एसोसिएशन।

सरकार को मंडियों में सरसों की खरीद-बिक्री का प्रबंध तुरंत करना चाहिए, सोशल नेटवर्किंग में हम पूरा सहयोग करेंगे। मस्टर्ड ऑयल के क्षेत्र में मुरैना का बड़ा काम है।

यूपी, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम तक इसका कारोबार फैला है। इस मंदी में सरकार मदद नहीं करेगी तो उद्योगों पर विपरीत असर पड़ेगा। वहीं कुछ फूडग्रेड इंडस्ट्री 50 प्रतिशत उत्पादन के साथ चल रही हैं। वहां ५० और बंद इकाइयों पर पूरा विद्युत फिक्स चार्ज माफ करना चाहिए।

संजीव अग्रवाल, उद्योगपति, मुरैना।

लॉक डाउन में सरसों के तेल कारोबार बुरी तरह प्रभावित हुआ है। 7.5 से 8 लाख लीटर उत्पादन आधा भी नहीं रहा है। सरसों मंडी और बाजार में कहीं नहीं आ रही है। ऐसे में सरकार को बिजली का फिक्स चार्ज, श्रमिकों के वेतन भत्ते, आद्येगिक ऋण पर वसूली स्थगित करने और इस अवधि का ब्याज माफ करके राहत देनी चाहिए।

अशोक सिंह भदौरिया, मस्टर्ड ऑयल मिल संचालक।

लघु और मध्यम उद्योगों को तो राहत की बड़ी जरूरत है। बिजली कंपनी 600-700 रुपए प्रति किलोवाट के हिसाब से चार्ज करती है, इसमें राहत मिलनी चाहिए।

औद्योगिक ऋण की वसूली स्थगित कर लॉक डाउन की अवधि में ब्याज माफी का भी लाभ दिया जाना चाहिए। उद्योग पति तो अपने स्तर पर कर ही रहे हैं सरकार को उदारता दिखानी होगी।

मनोज जैन, उद्योगपति।

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