मौसम ने छोड़ा साथ, बोवनी हो सकती है लेट

सिंचाई के अभाव में प्रतिकूल असर पड़ सकता है खरीफ पर, रबी की बोवनी में हो सकती है देरी।

By: rishi jaiswal

Published: 14 Sep 2020, 11:43 PM IST

मुरैना. सितंबर में बारिश थमने और तापमान में तेजी से वृद्धि होने से पठारी क्षेत्रों में खरीफ फसलों की वृद्धि पर असर पड़ रहा है। उससे भी Óयादा चिंता रबी फसलों की बोवनी को लेकर है। इन दिनों किसान तोरिया की बोवनी कर रहे हैं, लेकिन चिंता बढ़ते तापमान में बीज के अंकुरित न होने या अंकुरित होने पर झुलसने की है।

खरीफ फसल कम बरसात के बावजूद इस बार ठीक बताई जा रही है। खास रोग व्याधि का असर नहीं है। लेकिन अब 10 दिन से अ'छी बरसात न होने से पठारी इलाकों में फसलों पर असर पड़ रहा है। लेकिन मुख्य चिंता रबी फसलों की बोवनी को लेकर ही है। जिले में औसतन 2.70 लाख हेक्टेयर के करीब रबी फसलों की बोवनी होती है। इसमें सर्वाधिक 1.5 लाख हेक्टेयर के करीब सरसों की बोवनी होती है। इस समय तोरिया की बोवनी किसान करने की तैयारी में हैं। लेकिन दिन का तापमान 36-38 डिग्री सेल्सियस तक रहने से डर रहे हैं। तोरिया का बीज खेतों में डाला और Óयादा तापमान की वजह से अंकुरित नहीं हो पाया तो मुश्किल आएगी। इस साल बारिश पिछले साल की तुलना में भी अब तक कम है। जिले में अब तक 500 एमएम भी बरसात नहीं हो पाई है, इससे नमी तेजी से कम हो रही है। 10 दिन से कोई अ'छी बरसात भी नहीं हुई है। आने वाले दिनों मे जानकारों का मानना है कि तापमान रात का 20 डिग्री और दिन का 30 के आसपास आए तब बोवनी के लिए उपयुक्त रहेगा।

किसान हरेंद्र सिंह कहते हैं कि सरसों की बोवनी अक्टूबर में शुरू होगी। क्योंकि बाजरे की फसल कटने के बाद ही बोवनी शुरू हो पाएगा, तब तक खेतों की नमी और नीचे चली जाएगी। इस समय तोरिया की बोवनी की तैयारी में जुटे किसानों को भी तापमान अधिक देखकर डर लग रहा है। इसलिए एक सप्ताह तक और इंतजार किया जा रहा है।

नहरों से पानी की नहीं बनी रणनीति : रबी फसलों के लिए नहरों से पलेवा और सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने की कोई समय सारिणी अब तक तैयार नहीं हुई है। हालंाकि अधिकारी कोटा में कुछ समय पहले घूमकर आए थे और चर्चा भी करके आए थे, लेकिन अंतिम कार्ययोजना अबतक सामने नहीं आई है। ऐसे में रबी फसल की बोवनी में पलेवा के लिए समय पर पानी मिल पाना मुश्किल हो सकता है।

है बारिश की उम्मीद

&बारिश का दगा देना चिंता का विषय है। हालांकि अब तक बारिश के अभाव में फसलों में Óयादा क्षति की बात सामने नहीं आई है, लेकिन रबी की बोवनी पर तो इसका असर हो सकता है। फिलहाल तो बारिश की उम्मीद की जा रही है।

अशोक सिंह गुर्जर, एसएडीओ, उप संचालक कृषि कार्यालय

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