युवाओं के सिर चढ़ा गरबा-डांडिया का खुमार

Mahendra Rajore

Publish: Sep, 17 2017 12:15:02 (IST)

Morena, Madhya Pradesh, India
युवाओं के सिर चढ़ा गरबा-डांडिया का खुमार

नवरात्र में होगा आयोजन, शहर में कईस्थानों पर चल रही है प्रेक्टिस

मुरैना. नवरात्र शुरू होने में अभी 10 दिन शेष हैं, लेकिन युवाओं और बच्चों में गरबा-डांडिया का खुमार सिर चढ़कर बोलने लगा है। शहर में आयोजित होने जा रहे गरबा-डांडिया कार्यक्रमों के लिए इन दिनों चल रहे प्रशिक्षण कार्यक्रमों में इसकी बानगी देखने को मिल रही है।


स्ट्रीट रॉकर्स इवेंट मैनेजमेंट कंपनी द्वारा 25 से 27 सितंबर तक आयोजित होने वाले कार्यक्रम दुर्गा डांडिया नाइट के लिए विभिन्न स्थानों पर पे्रक्टिस चल रही है। कोरियोग्राफर राजा कुशवाह के निर्देशन में सुबह पंचायती धर्मशाला में महिलाओं को गरबा-डांडिया सिखाया जा रहा है तो बालाजी पैलेस में रोज शाम को युवतियों का बैच ट्रेनिंग ले रहा है। इसी तरह एकेडमिक हाइट स्कूल में भी वहां के बच्चे गरबा-डांडिया का नियमित अभ्यास कर रहे हैं। इवेंट मैनेजमेंट कंपनी के मयंक श्रीवास्तव तथा राजकुमार यादव ने बताया कि गरबा-डांडिया में पहल परिवार, रोटरी इनरव्हील, अग्रवाल युवा महिला मंडल तथा लायंस क्लब से जुड़ी महिलाएं व कपल्स भागीदारी करेंगे।

ये रहेगा शेड्यूल
25 सितंबर को डांडिया रास होगा। इसमें बेहतर प्रदर्शन आधार पर बेस्ट डांडिया कपल अवार्ड दिया जाएगा।
26 सितंबर को होली डांडिया का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा सिंगिग कॉम्प्टीशन भी होगा।
27 सितंबर को लाइव बैंड के साथ ओपन गरबा होगा। इसके लिए बाहर से गरबा स्पेशलिस्ट बैंड आएगा।

कई और हाईलाइट्स भी
गरबा-डांडिया कार्यक्रम में इस बार कई अन्य हाईलाइट्स भी होंगी। मसलन कपल्स के लिए फैशन शो होगा। चार डांस ट्रुप्स द्वारा प्रतिदिन दो-दो परफॉरमेंस दी जाएंगी। प्रतिदिन एक मिनट वाले कई गेम्स होंगे। स्पेशल किड्स डांडिया तथा तनुरा डांस भी कार्यक्रम का आकर्षण रहेंगे। आयोजकों ने बताया कि माता की मूर्ति की स्थापना के लिए खास सेटअप भी लगाया जा रहा है। आखिरी दिन लकी ड्रॉ होगा, जिसमें विजेताओं को आकर्षक पुरुस्कार दिए जाएंगे।

अर्जुन नौ साल की उम्र से बना रहा मूर्तियां


गणेशपुरा में कलेक्टर निवास के पीछे स्थित कलाकार अर्जुन नौ साल की उम्र से मूर्ति बनाने का काम कर रहा है। वर्तमान में यह 24 साल का है, लेकिन पिछले १५ साल से लगातार मिट्टी व भूसा से मूर्तियों को अंतिम रूप देता आ रहा है। अर्जुन जाति से वाल्मीक है, लेकिन उसकी कलाकारी के आगे जाति भी आड़े नहीं आती और उसकी बनाई हुई मूर्तियां धडल्ले से बाजार में स्थापित हो रही हैं। बकौल अर्जुन 15 साल पूर्व मैंने अपने यहां स्थापना के लिए मां की मूर्ति बनाई थी। उसके बाद एक दो प्रतिमा बनाने के ऑर्डर आपस के लोगों के मिले। उसके बाद ऑर्डर बढ़ते गए और मूर्तियां की बड़ी संख्या में बनाना शुरू कर दिया। विदित हो कि बाहर से आए कुछ कलाकार प्लास्टर ऑफ पेरिस की प्रतिमांए बना रहे हैं, जबकि इस कलाकार द्वारा सिर्फ मिट़्टी व भूसा की मूर्ति बनाई जा रही हैं।

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