Movie Review: क्या दिल को छूती है शाहरुख-आलिया की 'डियर जिंदगी', यहां जानिए

Dilip Chaturvedi
| Updated: 25 Nov 2016, 12:53 PM IST
Movie Review: क्या दिल को छूती है शाहरुख-आलिया की 'डियर जिंदगी', यहां जानिए
shahrukh khan

स्टारकास्ट : शाहरुख खान, आलिया भट्ट,  इरा दुबे, कुणाल कपूर, आदित्य रॉय कपूर, रेटिंग : ढाई स्टार

बैनर : धर्मा प्रोडक्शंस, रेड चिलीज, होप प्रोडक्शंस
निर्माता : गौरी खान, करण जौहर, गौरी शिंदे
निर्देशक : गौरी शिंदे
जोनर : कॉमेडी ड्रामा
संगीतकार : अमित त्रिवेदी

रोहित के. तिवारी/ मुंबई ब्यूरो। बी-टाउन में फिल्म 'इंगलिश विंगलिश' की अपार सफलता के बाद निर्देशिका गौरी शिंदे ने आलिया भट्ट, शाहरुख खान स्टारर फिल्म 'डियर जिंदगी' के निर्देशन की कमान संभाली है। उन्होंने इसमें दिलचस्प कॉमेडी का तड़का लगाने की भी पूरी कोशिश की है और उन्हें इस दूसरी फिल्म से भी अपनी पहली फिल्म की तरह ही सफलता मिलने की पूरी उम्मीद भी है। गौरी की पहली फिल्म में महिला केंद्रित थी और ये फिल्म भी एक महिला के वजूद के ईर्द-गिर्द बुनी गई है।

कहानी...
फिल्म की कहानी मुंबई से शुरू होती है, जहां कायरा (आलिया भट्ट) अपने दोस्तों के साथ अपने अलग अंदाज में रह रही होती है। कायरा एक सिनेमेटोग्राफर के तौर पर हर चीज व सब कुछ अपने ही अंदाज में देखती व समझती है। इसलिए उसे घर वाले और करीबी सब उसे सायको समझने लगते हैं। फिर उसे रघु (कुणाल कपूर) मिलता है, जो कायरा को आगे बढ़ाने के लिए सब कुछ करता है। आगे उसे सिड मिलता है, तो उसे भी कायरा अपना समझने लगती है। इसी तरह वो अपनी सारी बातें बिलकुल खुले अंदाज में डॉक्टर जहांगीर खान (शाहरुख खान) से खोलकर शेयर करती है। यहीं से फिल्म एक दिलचस्प मोड़ लेती है। 

अभिनय... 
आलिया भट्ट ने इस बार भी अपने अभिनय को पूरी तरह से जीने की कोशिश की है, जिसमें वे सफल भी दिखाई दीं। साथ ही शाहरुख खान सायकोलॉजिस्ट डॉक्टर जहांगीर खान के रोल में खुद को सेट करते दिखाई दिए, जिसमें वे काफी हद तक सफल रहे। इरा दुबे और कुणाल कपूर ने भी अपने-अपने अभिनय में कुछ अलग और खास करने का पूरा प्रयास किया है। साथ ही अली जफर, अंगद बेदी हो या आदित्य रॉय कपूर सभी ने अपने रोल में निर्देशक के लिहाज से बहुत ही सही ढंग से दिखाई दिए हैं।  

निर्देशन... 
'इंगलिश विंगलिश' के सफल निर्देशन के बाद गौरी शिंदेे की बॉलीवुड इंडस्ट्री में यह दूसरी फिल्म है, जिसमें उन्होंने कॉमेड्री ड्रामा का जबर्दस्त तड़का लगाने का भरसक प्रयास किया है। उन्होंने फिल्म के निर्देशन की कमान बखूबी संभाली है और प्रूव कर दिखाया है कि निर्देशन की समझ रखने वाला इंसान अपने निर्देशन से लोगों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कहीं-कहीं उनकी कहानी थोड़ी डगमगाती-सी दिखाई दी। कॉमेडी के अंदाज में शिंदे ने कुछ अलग कर दिखाने की कोशिश की है, जिसकी वजह से वे दर्शकों की वाहवाही लूटने में कुछ हद तक सफल रहीं। इस लिहाज से फिल्म का सैकंड हाफ  जहां थोड़ा बोरियत सा लगा, वहीं फस्र्ट हाफ  को लोग एंजॉय करते नजर आए। यदि टेक्नोलॉजी और कॉमर्शियल की बात छोड़ दी जाए, तो इसकी सिनेमेटोग्राफी में कुछ और बेहतर किया जा सकता था। इसके अलावा फिल्म में संगीत (अमित त्रिवेदी) ऑडियंस को बांधे रखने में कई मायनों से ठीक रहा।

क्यों देखें?
आलिया भट्ट के चाहने वाले किंग खान के फैंस इसे देखने के लिए सिनेमाघरों की ओर रुख कर सकते हैं। आगे मर्जी और जेब आपकी...!