Movie Review: रामू की 'Sarkar 3' को गिरने से अमिताभ बच्चन भी नहीं बचा पाए

By: dilip chaturvedi
| Published: 12 May 2017, 03:32 PM IST
Movie Review: रामू की 'Sarkar 3' को गिरने से अमिताभ बच्चन भी नहीं बचा पाए
SARKAR 3

कलाकार: अमिताभ बच्चन, मनोज बाजपेयी, जैकी श्रॉफ, अमित साद, यामी गौतम, रोनित रॉय, रेटिंग: 2 स्टार

निर्देशक: रामगोपाल वर्मा 

मुंबई। इसमें कोई दोराय नहीं कि पिछले 13 दिनों से बॉक्स ऑफिस पर बाहुबली 2 ने अपना एक छत्र राज जमा रखा है। बीते दो शुक्रवार को कोई बॉलीवुड निर्माता फिल्म रिलीज नहीं किया। इस शुक्रवार को दो फिल्में सरकार 3 और मेरी प्यार बिंदू रिलीज हुईं। इन दोनों फिल्मों से बॉलीवुड को बहुत उम्मीदें थीं, लेकिन सरकार 3 पहले ही दिन बॉक्स ऑफिस पर गिर गई। हैरानी वाली बात यह है कि अमिताभ बच्चन के दमदार अभिनय ने भी राम गोपाल वर्मा की सरकार 3 को गिरने से नहीं बचा पाए। हम आपको बता दें कि रामू की सरकार सीरीज की यह तीसरी फिल्म है। इसे पहले उन्होंने सरकार बनाई, जो खूब चली। उसके बाद सराकर राज बनाई, इसे भी खूब पसंद किया गया... करीब नौ साल बाद तीसरी फिल्म सरकार 3 रिलीज हुई, जिसमें कहानी के नाम पर कुछ नहीं है। इस फिल्म में यदि कुछ है, तो वह हैं अमिताभ बच्चन का दमदार अभिनय। इस फिल्म में कई नए किरदारों को लिया गया है, इसकी पटकथा में बदलाव किया गया है। तो क्या यही बदलाव रामू को महंगा पड़ गया? आइए, जानते रामू की सरकार 3 की कहानी, अभिनय, निर्देशन, कमजोरी के बारे में...

कहानी...
हाथों में रुद्राक्ष की माला, माथे पर तिलक और काले कपड़ो में सरकार यानी अमिताभ बच्चन का अंदाज पहले ही की तरह अद्भुत है। एक बार फिर अपनी जनता और उनके प्यार के साथ खड़े हैं, लेकिन अब सरकार के हालात बदल गए है। बेटों की मौत के बाद उनके एकछत्र साम्राज्य में एंट्री होती है उनके पोते शिवाजी नागरे (अमित साद) की। सरकार के करीबी गोकुल (रोनित रॉय) को शिवाजी पसंद नहीं है। वहीं शिवाजी की गर्लफ्रेंड अनु (यामी गौतम) भी अपने ही प्रेमी के कंधे पर बंदूक रखकर सरकार से अपने पिता का बदला लेना चाहती है। इसके अलावा लोकल नेता गोविन्द देशपांडे (मनोज बाजपेयी) और विदेश में बैठा बिजनेसमैन माइकल वाल्या (जैकी श्रॉफ) भी सरकार के दुश्मन हैं। सभी का एक ही मकसद है सरकार के साम्राज्य को उखाड़ फेकना...। इसके बाद कैसे-कैसे ये सारे किरदार एक-दूसरे से जुड़ते जाते हैं और सरकार को तबाह करने की कोशिश करते हैं। लेकिन सरकार के दुश्मन क्या अपने मकसद में कामयाब हो पाते है? यह जानने के लिए आपको यकीनन सिनेमाधर की ओर रुख करना होगा।

अभिनय...
सुभाष नागरे (सरकार) के रूप में महानायक अमिताभ बच्चन एक बार फिर अपना प्रभाव छोडऩे में कामयाब रहे हैं। बिब बी ने इसमें बिना कुछ बोले अपनी आंखों से सब कुछ कह देने का हुनर बखूबी पेश किया है। इसके लिए उनकी जितनी तारीफ की जाए कम होगी। उनके कई डायलॉग अग्निपथ की यादें ताजा कर देते हैं। सरकार के पोते के रोल में अमित साद ने अपने अभिनय को ऊपर उठाने की पूरी कोशिश की है, लेकिन बिग बी के सामने वो फिट नजर नहीं आते। इस रोल के लिए अमित साद का चुनाव करना रामू की सबसे बड़ी भूल मानी जा सकती है। मनोज बाजपेयी और रोनित रॉय ने अपने किरदार के साथ पूरा न्याय किया है। जैकी श्रॉफ  सरकार 3 के मुख्य खलनायक हैं, लेकिन उनके डायलॉग्स व अजीबो-गरीब पहनावे के चलते वो विलन कम, कॉमेडियन ज्यादा नजर आते हैं। यामी गौतम का चेहरा मासूमियत से भरा है, ऐसे में सरकार से बदला लेने के लिए किसी ऐसी अभिनेत्री का चयन करना चाहिए था, जिसके चेहरे पर बदला लेने का एक्सप्रेशन साफ नजर आता। कुल मिलाकर, रामू से कई चूकें हुई हैं...कहानी से लेकर एक्टर्स के चुनाव तक वो मात खाते नजर आते हैं।

 निर्देशन...
राम गोपाल वर्मा एक काबिल निर्देशक हैं। उन्होंने कई बेहतरीन फिल्में दी हैं। इससे पहले सरकार सीरीज की पिछली दोनों फिल्मों में उन्होंने गजब का निर्देशन किया था, लेकिन इस बार चूक गए। इसके पीछे एक ही वजह है और वह है वक्त के साथ खुद में बदलाव न करना...। दरअसल, वो दर्शकों की नब्ज को पकड़ नहीं पा रहे हैं। उन्हें शायद यह नहीं पता कि मौजूदा दौर में तकनीके साथ कहानी को भी दर्शक पसंद करते हैं। सिर्फ बेहतरीन तकनीक के सहारे फिल्म को हिट नहीं करवाया जा सकता। उनकी सरकार 3 के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ। जैसे-जैसे फिल्म आगे बढ़ती है,वैसे-वैसे कहानी गायब होती नजर आती है और सिर्फ किरदार ही किरदार नजर आते हैं। इस फिल्म के बारे में यही कहा जा सकता है कि लोग मनोरंजन के लिए फिल्म देखने जाते हैं, ना कि सिर दर्द बढ़ाने...।

कमजोर कडिय़ां...
-फिल्म की कहानी काफी प्रेडिक्टेबल सी है। बहुत सारे सीन्स काफी लंबे लगते हैं, जिन्हें छोटा करके फिल्म को और क्रिस्प बनाया जा सकता था।
-फिल्म का स्क्रीनप्ले बेहद कमजोर है, जिसकी वजह से कोई भी किरदार सम्पूर्ण नहीं हो पाया है। 
-फिल्म का बैकग्राउंड स्कोर काफी लाउड है, जिसकी वजह से एक वक्त के बाद काफी शोरशराबा जैसा लगने लगता है।
-फिल्म में एक वक्त के बाद ऐसा पल भी आता है, जब आप गंभीर सीन पर भी हंसने लग जाएंगे और खुद से सवाल पूछेंगे कि आखिरकार हो क्या रहा है? सीक्वेंस का कनेक्शन काफी अधूरा है।

क्यों देखें...
यूं तो इस फिल्म को देखने की कोई ठोस वजह नहीं है। हां, यदि आप सदी के महानायक अमिताभ बच्चन के फैन हैं, तो यकीनन आप निराश नहीं होंगे। बिग बी ने उम्र के हिसाब से सरकार के किरदार में हुए परिवर्तन को स्क्रीन पर बखूबी दर्शाया है और सरकार 3 की यही यूएसपी है। 
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