मूवी रिव्यू : चाचा-भतीजे की कॉमेडी ने डाली 'मुबारकां' में जान

By: भूप सिंह
| Published: 28 Jul 2017, 04:33 PM IST
मूवी रिव्यू : चाचा-भतीजे की कॉमेडी ने डाली 'मुबारकां' में जान
Mubarakan movie review

निर्देशक अनीस बज्मी ने 'नो एंट्री', 'सैंडविच', 'वेलकम', 'सिंह इज किंग', 'रेडी', 'वेलकम बैक' जैसी कॉमेडी फिल्में बनाई हैं...-

डायरेक्शन : अनीस बज्मी
स्टार कास्ट : अनिल कपूर, अर्जुन कपूर, इलियाना डिक्रूज, अथिया शेट्टी, रत्ना पाठक शाह, पवन मल्होत्रा, राहुल देव, करण कुन्द्रा, ललित परिमू
कैमियो : नेहा शर्मा, संजय कपूर
म्यूजिक : अमाल मलिक, गौरव-रोशिन, ऋषि रिच
रेटिंग : 2.5  स्टार

निर्देशक अनीस बज्मी ने 'नो एंट्री', 'सैंडविच', 'वेलकम', 'सिंह इज किंग', 'रेडी', 'वेलकम बैक' जैसी कॉमेडी फिल्में बनाई हैं। इन सब फिल्मों की कहानी में एक चीज कॉमन है और वह है रिलेशनशिप में कन्यूजन। रिलेशनशिप के इसी कन्फ्यूजन को उन्होंने अपनी नई फिल्म 'मुबारकां' में दिखाया है। फिल्म की खास बात यह है कि दर्शकों को पहली बार बड़े पर्दे पर चाचा-भतीजा यानी अनिल कपूर और अर्जुन कपूर की जोड़ी देखने को मिली है, जिसमें परफॉर्मेंस के मामले में चाचा भतीजे पर छाए हुए हैं। इस रोमांटिक कॉमेडी में जुड़वां भाइयों का भी तड़का है, लेकिन इन सबके बावजूद कन्फ्यूजन का यह कॉकटेल पूरे समय गुदगुदाने में कामयाब नहीं है। पंजाबी फैमिली, लव, ईगो, कॉमेडी और नाच-गाना सरीखे मसाले डालकर बनाई गई यह फिल्म दर्शकों को दिल से 'मुबारकां' कहने का चांस नहीं देती है।

स्क्रिप्ट
कहानी करण (अर्जुन कपूर) और चरण की है, जो हैं तो जुड़वां, लेकिन बचपन में उनके चाचा द्वारा लिए गए एक फैसले के कारण कजिन बन गए हैं। दरअसल, जब दोनों छोटे थे तो कार एक्सीडेंट में उनके माता-पिता की मौत हो जाती है। ऐसे में उनका चाचा करतार सिंह (अनिल कपूर) उनकी परवरिश के लिए करण को लंदन में रहने वाली अपनी बहन (रत्ना पाठक शाह) को दे देता है, वहीं चरण को चंडीगढ़ निवासी भाई बलदेव सिंह (पवन मल्होत्रा) को। इस तरह वह खुद चरण का चाचा और करण का मामा बन जाता है। असली ट्विस्ट तब आता है जब उनके घरवाले उनकी शादी के लिए लड़की ढूंढना शुरू करते हैं, लेकिन दोनों की पहले से ही गर्लफ्रेंड होती हैं। लिहाजा रिलेशनशिप का रायता फैलना शुरू होता है, जिसे करतार सिंह अपने अटपटे आइडियाज से समेटने की कोशिश करता है, लेकिन उसके हर आइडिया फुस्स साबित होते हैं। रिलेशनशिप की खिचड़ी वाली इस कहानी में आगे कई ट्विस्ट्स आते हैं, जिससे ऐसी सिचुएशन पैदा होती है, जो गाहे-बगाहे दर्शकों को हंसने का मौका देती है।

एक्टिंग  
अर्जुन ने करण और चरण के रोल में ठीक-ठाक एक्टिंग की है, वहीं अनिल फिल्म की जान हैं। अपनी एनर्जी और परफॉर्मेंस से वह दिल जीत लेते हैं। इलियाना डिक्रूज ने अपनी भूमिका बखूबी निभाई है, पर अथिया इ पे्रस करने में नाकाम रहीं। पवन और रत्ना का अभिनय अच्छा है। कैमियो में नेहा शर्मा फिट हैं। सपोर्टिंग कास्ट में राहुल देव, करण कुन्द्रा और ललित परिमू ने अच्छा काम किया है।

डायरेक्शन  
अनीस का निर्देशन ठीक है, लेकिन स्क्रीनप्ले चुस्त नहीं है। कुछ गाने फिल्म का रिद्म को तोड़ते हैं। दूसरा हाफ थोड़ा खिंचा हुआ लगता है, जिसे एडिटिंग टेबल पर क्रिस्प किया जा सकता था। वनलाइनर्स और डायलॉग्स ठीक-ठाक हैं, लेकिन ज्यादातर मोबाइल मैसेजिंग एप्स पर भेजे जाने वाले जोक्स जैसे हैं, जो कभी हंसाते हैं तो कभी पकाते हैं। गीत-संगीत असरदार नहीं है, पर बैकग्राउंड स्कोर अच्छा है। सिनेमैट्रोग्राफी और लोकेशंस आकर्षक हैं।

क्यों देखें :
फिल्म की सबसे अच्छी बात यह है कि यह साफ-सुथरी कॉमेडी है। हालांकि बैकड्रॉप में पंजाबी फैमिली होने से फिल्म में लाउड कॉमेडी है। 'मुबारकां' टिपिकल अनीस बज्मी स्टाइल की फैमिली ड्रामा है। हालांकि क प्लीट एंटरटेनर नहीं है, लेकिन चाचा-भतीजा की जुगलबंदी का लुत्फ उठाने के लिहाज से इस वीकेंड सिनेमाघरों का रुख करने के लिए 'मुबारकां' दर्शकों के लिए एक अच्छा ऑप्शन है... बशर्ते उम्मीदों का पिटारा तैयार करके न जाएं।
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