Mulk Movie Review: 'हम' और 'वो' की मानसिकता को कटघरे में खड़ा करती है 'मुल्क'
Amit Singh
Publish: Aug, 03 2018 06:08:37 (IST)
Mulk Movie Review: 'हम' और 'वो' की मानसिकता को कटघरे में खड़ा करती है 'मुल्क'

फिल्म की कहानी बनारस में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार की है जिसके मुखिया हैं मुराद अली मोहम्मद (ऋषि कपूर)।

आर्यन शर्मा . जयपुर

राइटिंग-डायरेक्शन: अनुभव सिन्हा
म्यूजिक : प्रसाद साश्ते, अनुराग सैकिया
सिनेमैटोग्राफी : इवान मुलिगन
एडिटिंग : बल्लू सलूजा
रनिंग टाइम : 140 मिनट
रेटिंग: 3.5 स्टार
स्टार कास्ट : ऋषि कपूर, तापसी पन्नू, आशुतोष राणा, रजत कपूर, प्रतीक बब्बर, नीना गुप्ता, मनोज पाहवा, प्राची शाह पांड्या, कुमुद मिश्रा, अतुल तिवारी, इंद्रनील सेनगुप्ता


कोई भी मुल्क कागज के नक्शों पर लाइन खींचने से नहीं बंटता, बल्कि लोगों की मानसिकता से बंटता है। इंसानों को 'हम और 'वो' में बांटने वाली इसी मानसिकता को कटघरे में खड़ा करती है निर्देशक अनुभव सिन्हा की फिल्म 'मुल्क'। इसमें दिखाया है कि किस तरह क्राइम और टेरेरिज्म को किसी मजहब से जोड़कर देखा जाता है। फिल्म की कहानी बनारस में रहने वाले एक मुस्लिम परिवार की है जिसके मुखिया हैं मुराद अली मोहम्मद (ऋषि कपूर)। परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि मुराद के भाई बिलाल (मनोज पाहवा) का बेटा शाहिद (प्रतीक बब्बर) आतंकी गतिविधियों में लिप्त पाया जाता है। इस वजह से पूरे परिवार पर उंगलियां उठना शुरू हो जाती हैं। यहां तक कि आस-पड़ोस के लोगों का बर्ताव भी बदल जाता है। ऐसे में मुराद अली के बेटे आफताब (इंद्रनील) की पत्नी आरती (तापसी पन्नू) परिवार के सम्मान के लिए कोर्ट में केस लड़ती है।

 

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एक्टिंग-डायरेक्शन

'तुम बिन', 'दस', 'रा.वन' सरीखी फिल्में निर्देशित कर चुके अनुभव ने इस बार एक अलग ही फ्लो में काम किया है। उनके लेखन और निर्देशन में कसावट है, जिस मजबूती के साथ उन्होंने इस गंभीर मुद्दे को सिनेमाई फलक पर उतारा है, वो काबिलेतारीफ है। स्क्रीनप्ले एंगेजिंग है और डायलॉग्स जबरदस्त हैं। कास्ट की अदाकारी भी परफेक्ट है। ऋषि ने मुराद के किरदार को बखूबी जीया है, वहीं तापसी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि वह बेहतरीन एक्ट्रेस हैं। आशुतोष राणा सरकारी वकील की भूमिका में दमदार लगे हैं। मनोज ने अपना किरदार दिल से निभाया है। सपोर्टिंग कास्ट में रजत कपूर, प्रतीक, नीना गुप्ता और कुमुद मिश्रा ने अच्छा काम किया है। गीत-संगीत ठीक-ठाक है। सिनेमैटोग्राफी ओके है, वहीं एडिटिंग टेबल पर फिल्म की लंबाई थोड़ी कम की जा सकती थी।

 

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क्यों देखें
आतंकवाद, हिंदू-मुस्लिम, राष्ट्रद्रोह जैसे मुद्दों के इर्द-गिर्द बुनी गई इस फिल्म के जरिए निर्देशक ने असल 'मुल्क' के मायने समझाए हैं। वहीं नसीहत के साथ समाज को आईना भी दिखाया है। फिल्म में बॉलीवुड मसाले नहीं हैं, फिर भी मजेदार है।

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