पैडमैन' झिझक का पर्दा हटाने की एक कोशिश

By: भूप सिंह
| Published: 10 Feb 2018, 09:00 PM IST
पैडमैन' झिझक का पर्दा हटाने की एक कोशिश
padman

असल जिंदगी के सुपरहीरो अरुणाचलम मुरुगनाथम की कहानी पर आधारित आर. बाल्की निर्देशित फिल्म 'पैडमैन'

स्टार कास्ट : अक्षय कुमार , सोनम कपूर , राधिका आप्टे, सुनील सिन्हा, ज्योति सुभाष
कैमियो : अमिताभ बच्चन

राइटिंग-डायरेक्शन : आर. बाल्की
कॉन्सेप्ट : ट्विंकल खन्ना
को-राइटर : स्वानंद किरकिरे
जोनर : बायोग्राफिकल ड्रामा
म्यूजिक : अमित त्रिवेदी
एडिटिंग : चंदन अरोड़ा

 

 

सिनेमैटोग्राफी : पीसी श्रीराम
रेटिंग : 3 स्टार

आर्यन शर्मा . जयपुर

'अमरीका के पास सुपरमैन है, बैटमैन है, स्पाइडरमैन है, लेकिन इंडिया के पास पैडमैन है।' असल जिंदगी के सुपरहीरो अरुणाचलम मुरुगनाथम की कहानी पर आधारित आर. बाल्की निर्देशित फिल्म 'पैडमैन' का यह डायलॉग दर्शाता है कि मुरुगनाथम यानी रीयल पैडमैन वास्तव में सुपरहीरो हैं। फिल्म में अक्षय कुमार ने लक्ष्मी के किरदार में अपनी उम्दा परफॉर्मेंस से मुरुगनाथम के संघर्ष को पर्दे पर बखूबी उतारा है। फिल्म में दिखाया है कि देश की महिलाओं का एक बड़ा हिस्सा महंगे होने के कारण सैनिटरी पैड्स का इस्तेमाल नहीं कर पाता। उन्हें गंदे कपड़े, पत्ते और राख तक का इस्तेमाल करने पर मजबूर होना पड़ता है, जिसकी वजह से वे कई बीमारियों का शिकार तक हो जाती हैं। रीयल पैडमैन ने इसी समस्या को देखते हुए महिलाओं के लिए सस्ते सैनिटरी पैड बनाने की मशीन का आविष्कार किया था। फिल्म 'पैडमैन' मनोरंजन करती है, साथ ही माहवारी के समय महिलाओं को हाइजीन का ध्यान रखने संदेश भी देती है।

स्क्रिप्ट

कहानी महेश्वर निवासी लक्ष्मीकांत चौहान (अक्षय कुमार) की है। उसकी शादी गायत्री (राधिका आप्टे) से होती है। लक्ष्मी को पता चलता है कि गायत्री माहवारी के दिनों में गंदे कपड़े का इस्तेमाल करती है। वह उसके स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उसे बाजार से सैनिटरी पैड्स लाकर देता है, लेकिन महंगा होने के कारण गायत्री उसका इस्तेमाल करने से मना कर देती है। इस बात से परेशान होकर लक्ष्मी सोचता है कि क्यों न ऐसा सैनिटरी पैड बनाया जाए, जो सस्ता हो, ताकि उसकी पत्नी और बहनें उसका इस्तेमाल कर सकें। वह अपने तरीके से सैनिटरी पैड बनाता है, लेकिन शुरुआत में फेल हो जाता है, ऐसे में उसकी पत्नी भी उसके बनाए पैड्स का इस्तेमाल करने से मना कर देती है। लक्ष्मी लगातार प्रयास करता है, लेकिन उसके परीक्षण के लिए कोई महिला तैयार नहीं होती। आखिर वह खुद पर ही परीक्षण करने लगता है। उसकी फैमिली और गांव वाले उसकी इन हरकतों से परेशान हो जाते हैं। गायत्री अपने मायके चली जाती है, वहीं उसकी मां भी घर छोडऩे की धमकी देती है। आखिर में लक्ष्मी खुद ही गांव छोड़ देता है, लेकिन सस्ते सैनिटरी पैड बनाने की धुन उस पर सवार रहती है। कई उतार-चढ़ाव के साथ कहानी आगे बढ़ती है।

एक्टिंग

सोशल इश्यू पर आधारित 'टॉयलेट: एक प्रेमकथा' के बाद अक्षय ने 'पैडमैन' में भी अच्छा अभिनय किया है। वह रीयल पैडमैन को पर्दे पर साकार करने में सफल रहे हैं। यूनाइटेड नेशन में दी गई उनकी स्पीच काफी एंटरटेनिंग है। गायत्री के रोल में राधिका आप्टे ने सहज एक्टिंग की है। अक्षय के साथ उनकी कैमिस्ट्री जमी है। एमबीए स्टूडेंट के रोल में सोनम कपूर चार्मिंग और परफेक्ट लगी हैं। कैमियो में अमिताभ बच्चन सरप्राइज पैकेज हैं। सपोर्टिंग कास्ट का काम भी ठीक है।

डायरेक्शन

महिलाओं के स्वास्थ्य से जुड़े मसले को राइटर-डायरेक्टर आर. बाल्की ने संजीदगी से सिनेमाई कैनवास पर प्रजेंट किया है। फिल्म का फस्र्ट हाफ थोड़ा ढीला है, लेकिन आगे जाकर गति पकड़ लेती है। स्क्रीनप्ले को और टाइट किया जा सकता था। डायलॉग्स असरदार हैं। संगीत सामाजिक सरोकार का उम्दा उदाहरण पेश करती फिल्म की कहानी से मेल खाता है। सिनेमैटोग्राफर पीसी श्रीराम का कैमरा वर्क काबिले-तारीफ है, वहीं लोकेशंस भी शानदार हैं।

क्यों देखें

फिल्म मनोरंजन के साथ समाज को जागरूक करती है और पीरियड्स को लेकर समाज में जितने भी टैबू हैं, उनको आईना दिखाती है। बाल्की और अक्षय ने 'पैडमैन' से दर्शकों को रूबरू करवाकर साहसिक काम किया है। ऐसे में 'पैडमैन' मनोरंजन के लिहाज से अच्छा ऑप्शन है।

Akshay Kumar Akshay Kumar latest news