'रेस 3'मूवी रिव्यू: इस रेस के 'सुल्तान' नहीं बन पाए सलमान खान
Mahendra Yadav
| Updated: 15 Jun 2018, 02:55:04 PM (IST)
'रेस 3'मूवी रिव्यू: इस रेस के 'सुल्तान' नहीं बन पाए सलमान खान
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फिल्म में एक्शन-एडवेंचर तो भरपूर है, लेकिन किरदारों की चालबाजी और रोमांच का स्तर बेहद कम है।

आर्यन शर्मा

'रेस' सीरीज की फिल्में जबरदस्त थ्रिलर के रूप में बॉलीवुड में खास पहचान रखती हैं। इस सीरीज की शुरुआती दो फिल्मों को स्टाइलिश सस्पेंस-थ्रिलर जोनर के लिए मशहूर निर्देशक जोड़ी अब्बास-मुस्तान ने डायरेक्ट किया था। लेकिन 'रेस 3' की कमान रेमो डिसूजा ने संभाली है और लीड रोल में सैफ अली खान को सलमान खान ने रिप्लेस किया है। फिल्म में एक्शन-एडवेंचर तो भरपूर है, लेकिन किरदारों की चालबाजी और रोमांच का स्तर बेहद कम है।


डायरेक्शन : रेमो डिसूजा
स्टोरी-स्क्रीनप्ले : शिराज अहमद
सिनेमैटोग्राफी : अयानंका बोस
बैकग्राउंड स्कोर : सलीम-सुलेमान


एडिटिंग : स्टीवन बर्नार्ड
रेटिंग : 2 स्टार
स्टार कास्ट: सलमान खान, अनिल कपूर, बॉबी देओल, जैकलीन फर्नांडीस, डेजी शाह, साकिब सलीम, फ्रेडी दारुवाला

स्क्रिप्ट:

अल शिफाह आइलैंड पर रहने वाला शमशेर सिंह (अनिल) आर्म्सस डीलर है। उसका बेटा सूरज (साकिब) और बेटी संजना (डेजी) जुड़वां हैं। वहीं, उसके भाई का बेटा सिकंदर (सलमान) भी उसका बिजनेस में सहयोग करता है। सिकंदर का बॉडीगार्ड है यश (बॉबी)। शमशेर का एक दोस्त उसे ऐसी हार्ड-डिस्क के बारे में बताता है, जिसके जरिए कुछ इंडियन पॉलिटिशियंस को ब्लैकमेल किया जा सकता है। इसके बाद कहानी में हल्के-फुल्के ट्विस्ट आते हैं।

एक्टिंग:

अनिल कपूर ने शमशेर का किरदार बखूबी निभाया है। उनकी स्क्रीन प्रजेंस शानदार है। सलमान खान अपने चिर-परिचित अंदाज में हैं। जैकलीन फर्नांडीस और डेजी शाह की परफॉर्मेंस कामचलाऊ है। बॉबी देओल ने फिल्म में शर्ट तो उतारी है, लेकिन अभिनय के मामले में फिसड्डी रहे हैं। वहीं, साकिब सलीम ने अपना काम ठीक-ठाक किया है। फ्रेडी दारुवाला को नाममात्र का स्क्रीन स्पेस मिला है।

 

डायरेक्शन:

निर्देशक रेमो ने एक्शन, एडवेंचर, रोमांस, चीटिंग जैसे मसालों का तड़का लगाया है, पर कमजोर प्लॉट के कारण इम्प्रेसिव नहीं लगे। स्क्रीनप्ले पूरी तरह बिखरा हुआ है। फर्स्ट हाफ बेहद उबाऊ है। दूसरे हाफ में कुछ ट्विस्ट आने से फिल्म को थोड़ी गति मिलती है। फिल्म की लंबी अवधि इरिटेट करती है। संवादों में भी दम नहीं है। गीत-संगीत का स्तर कमजोर है। गाने ठूंसे हुए लगते हैं। सिनेमैटोग्राफी आकर्षक है, पर एडिटिंग सुस्त है।

क्यों देखें:

फिल्म में स्लिक व स्टाइलिश एक्शन सीक्वेंस ही देखने लायक हैं। स्क्रिप्ट और रोमांच के नाम पर कुछ खास नहीं है। अगर आप सलमान के डाय-हार्ड फैन हैं तो ही 'रेस 3' देखने का रिस्क लें, वर्ना यह 'रेस' आपको भारी पड़ सकती है।