MOVIE REVIEW: इमोश्नल और ड्रामा से भरपूर है शादी में जरूर आना...

By: Riya Jain
| Published: 10 Nov 2017, 03:49 PM IST
MOVIE REVIEW: इमोश्नल और ड्रामा से भरपूर है शादी में जरूर आना...
SHAADI MEIN ZAROOR AANA

MOVIE REVIEW: इमोश्नल और ड्रामा से भरपूर है शादी में जरूर आना...

डायरेक्टर : रत्ना सिन्हा
कलाकार : राजकुमार राव , कीर्ति खरबंदा
शैली : रॉम कॉम

बता दें आज बॅालीवुड एक्टर राजकुमार रॅाव की फिल्म शादी में जरूर आना रिलीज हुई है। फिल्म की पूरी कहानी मिडिल क्लास घरों की सोच पर आधारित है। ये वो घर हैं जहां बेटी ने शादी करने से मना किया तो बुरा मान जाती है, बेटे ने कह दिया कि मेरी बीवी नौकरी करेगी तो रूठ के बैठ जाती है।

इन घरों के मम्मी-पापा लोग क्या कहेंगे के बारे में ज्यादा सोचते हैं और अपने बच्चों के बारे में कम। बता दें ये फिल्म एंटेरटेनिंग ही नहीं बल्कि इमोशनल और ड्रामा से भरपूर है। सबसे जरूरी बात यह कि आप इससे खुद को रिलेट कर सकेंगे।

फिल्म की कहानी तब शुरु होती है जब सत्तू और आरती की शादी अरेंज हो जाती है। दोनों पहली बार मिलते हैं और मिलते ही एक दूसरे के प्यार में डूब जाते हैं। लेकिन फिर दोनों की जिंदगी में ऐसी मुश्किलें आ जाती है की इन दोनों की शादी टूट जाती है।

आरती पढ़ने में काफी टेलेंटिड होती हैं। पर सिर्फ अपने पापाजी के कहने से शादी के लिए हां कर लेती है। मगर पीछे से मम्मी को फोन करके ताने भी मारती रहती है। पहली मुलाकात में आरती सत्तू को अपनी दो ख्वाहिशें बताती है। पहली नौकरी करने की और दूसरी शराब पीने की। लेकिन सत्तू पहली नजर के प्यार के ऐसे घायल हो जाते हैं कि आरती की हर बात मंजूर कर लेते हैं। लेकिन बात एक जगह अटक जाती है। रस्मों-रिवाजों के बीच आरती को पता चलता है कि जिस सत्येंद्र मिश्रा से वो शादी करने जा रही है, उनके खानदान के तो उसूल ही अलग हैं।

सत्तू की मां का कहती है कि मिश्रा परिवार की बहुएं नौकरी नहीं करती। शादी वाले दिन ही आरती का सिविल सर्विस का रिजल्ट आ जाता है। मेन्स क्लियर करे बैठी आरती शादी करने और करियर के बीच फंस जाती है। और आखिर में प्यार के साथ समझौता करके चली जाती है। सत्तू मंडप में अकेला खड़ा रह जाता है।

यहीं से फिल्म का क्लाइमेक्स शुरू होता है। बदला और नफरत। चार साल बाद क्लर्क सत्तू डीएम बनकर आता है। आगे फिल्म में दोनों के बीच के टकराव की कहानी चलती है। वैसे तो फिल्म मजेदार है लेकिन दो-चार सीन हैं जो कंगना रनौट की फिल्म तनु वेड्स मनु की याद दिलाते हैं। ऐसा लगता है जैसे हम तनु वेड्स मनु के सीन ही दोबारा देख रहे हैं।

फिल्म की एंडिंग भी टिपिकल इंडियन सिनेमा जैसी ही है। दो परिवार वाले, जो एक-दूसरे के दुखों में तो मिठाइयां बंटवाते हैं, लेकिन आखिरी में एक जुट हो जाते हैं। जिस सत्तू और आरती की लव स्टोरी में रोड़ा बने हुए थे, उन दोनों को आखिरी में मिलाने में मदद भी खुद ही करते हैं।

फिल्म में राजकुमार राव छोटे शहर के एक टिपिकल शरीफ लड़के का रोल कर रहे हैं। इस फिल्म में भी उन्होंने अपना किरदार बखूबी निभाया है। बता दें एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि बरेली की बर्फी के बाद उन्हें शादी के प्रपोजल आने लगे थे। अब लग रहा है इस फिल्म के बाद रिश्ते सीधे उनके घर पर ही पहुंचेंगे।

राजकुमार राव के अलावा कीर्ति खरबंदा का किरदार भी काफी इंटरेस्टिंग है। बता दें कीर्ति पहले से ही कन्नड इंडस्ट्री का एक जाना माना चेहरा है।