मूवी रिव्यू: मर्डर, मिस्ट्री की गजब कहानी है "दृश्यम" 

By: भूप सिंह
| Published: 30 Jul 2015, 12:25 AM IST
मूवी रिव्यू: मर्डर, मिस्ट्री की गजब कहानी है
movie review of drishyam

 पढ़िए अजय देवगन स्टारर "दृश्यम" का एक्सल्यूसिव रिव्यू और पता लगाएं कितनी पैसा वसूल है यह फिल्म

- रोहित तिवारी
मुंबई। आजकल बी-टाउन में साउथ की बेहतरीन फिल्मों का हिंदी रीमेक बनाने का चलन जोर-शोर से शुरू हो गया है। जी हां, दक्षिण भारतीय फिल्मों का हिंदी में रीमेक बनाने का सिलसिला करीब 40 वषोंü से चला आ रहा है। उसी कड़ी में निर्देशक निशिकांत कामत ऑडियंस के बीच "दृश्यम" लेकर आए हैं। "मुंबई मेरी जान" और जॉन अब्राहम स्टारर फिल्म "फोर्स" में अपना गजब का निर्देशन दिखा चुके निशिकांत कामत को फिल्म "दृश्यम" से भी काफी उम्मीदें हैं और उन्होंने इस फिल्म में दर्शकों के लिए काफी मसाला भी दिया है।

कहानी: यह कहानी गोवा व महाराष्ट्र की सीमा पर बसे एक गांव पांडोलिम में रह रहे आम इंसान अजय देवगन(विजय सालगावकर) और उसकी पत्नी श्रेया सरन व दो बेटी अंजू व अन्नू (इशिता दत्ता व मृणाल जाधव) की है। इस परिवार का मुखिया विजय सालगावकर मेराज नाम का एक केबल चलाता है और मूवी देखने का बहुत शौकीन होता है। वह अपने परिवार के साथ बहुत खुश रहता है। दरअसल, वे लोग एक छोटे से गांव में रहते हैं, जहां एंटरटेंमेंट के लिए कोई खास बंदोबस्त नहीं होता। इसलिए वे शॉपिंग और मजे आदि करने के लिए पास में स्थित पंजी जाते हैं।
आगे चलकर पता चलता है कि विजय की बड़ी बेटी अंजू के कॉलेज का एक नेचर कैंप हैं, जहां पर जाने के लिए अंजू अपने पापा विजय से गुजारिश करती है और पूरा परिवार उसे भेजने के लिए विजय को मना लेता है। उसी नेचर कैंप में गोवा की आईजी तब्बू का बिगड़ैल बेटा सैम देशमुख उस कैंप में मौजूद सभी खूबसूरत लड़कियों की फोटो और वीडियो बना रहा होता है।
इतना ही नहीं सैम देशमुख विजय की बेटी अंजू की आपत्तिजनक वीडियो बना लेता है और अंजू के घर जाकर उसे ब्लेकमेल करता है। इसी दौरान अंजू की मां श्रेया सरन वहां आ जाती है और उसका मर्डर हो जाता है। इसी के साथ कहानी में दिलचस्प मोड़ आता है और तब्बू अपनी पावर का इस्तेमाल करते हुए अपने बेटे की खोज में लग जाती है, लेकिन उसे हासिल कुछ नहीं होता है। इसी तरह से गजब टि्वस्ट के साथ कहानी आगे बढ़ती है।

अभिनय: अजय देवगन ने इस फिल्म से एक बार फिर से खुद को प्रुव कर दिखाया है कि वाकई में दर्शक उन्हें ऎसे ही गंभीर अभिनेता नहीं बोलते हैं। साथ ही तब्बू ने भी फिल्म में अपना शत-प्रतिशत देने के लिए कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी। बता दें कि श्रेया सरन और रजत कपूर ने भी अपना किरदार को बखूबी निभाया है। लेकिन रजत कहीं-कहीं पर अपनी भूमिका में और अधिक जान फूंक सकते थे, जिसमें वे थोड़ा सा नाकामयाब रहे। इशिता दत्ता और मृणाल जाधव ने फिल्म में अजय देवगन का साथ बहुत अच्छे से निभाया है। अजय देवगन जैसे सीनियर स्टार के साथ काम करने में दोनों बहनें कहीं न कहीं थोड़ा कमजोर सी नजर आईं।

निर्देशन:
इसमें कोई दो राय नहीं है कि निशिकांत कामत इस फिल्म से ऑडियंस को एक घर के मुखिया की अहमियत को समझाने में सफल रहे। यानी उन्होंने यह सिद्ध कर दिखाया है कि जब इंडस्ट्री में पिता पर आधारित कई फिल्में बन सकती हैं तो घर के मुखिया पर निर्धारित फिल्में भी जरूर बननी चाहिए। हालांकि उन्होंने फिल्म में एक्शन का जबरदस्त तड़का लगाने में कोई कोर-कसर बाकी नहीं रखी, फिर भी निशिकांत अपने निर्देशन में कहीं-कहीं असफल से दिखाई दिए।

मर्डर मिस्ट्री और रहस्य में कामत ने वाकई में कुछ अलग करने की पुरजोर कोशिश की है, इसीलिए वे ऑडियंस की वाहवाही लूटने में सफल दिखे। कहीं-कहीं पर भले ही इस फिल्म की स्क्रिप्ट थोड़ी डगमगाती नजर आई, लेकिन इसकी कहानी ऑडियंस को आखिर तक बांधे रखने में कुछ हद तक सफल भी रही। वैसे उन्होंने इससे यह तो जरूर प्रुव कर दिखाया है कि साउथ की मसाला फिल्मों को वाकई में काफी हद तक बॉलीवुड प्रेमी भी दिल से देखना पसंद करते हैं।

बहरहाल, "हर कुत्ते का दिन आता है..." और "आया था शेर बनकर, वापस गया चूहा बनकर..." जैसे कई डायलॉग्स कालिब-ए-तारीफ रहे, लेकिन अगर टेक्नोलॉजी और कॉमर्शियल अंदाज को छोड़ दिया जाए तो इस फिल्म की सिनेमेटोग्राफी कुछ खास करने में असफल रही। संगीत (विशाल भारद्वाज) तो कहीं-कहीं पर ऑडियंस को भाता भी है, लेकिन गाने की तुलना में थोड़ा सा कमजोर रहा।

क्यों देखें: धुआंधार एक्शन के मकसद से तो नहीं, लेकिन एंटरटेंमेंट के लिहाज से सिनेमा घरों का रूख किया जा सकता है। साथ ही आपको अपनी जेब ढीली करने में भी कोई निराशा नहीं होगी... आगे इच्छा आपकी...!

निर्माता: कुमार मंगत पाठक, अभिषेक पाठक और अजीत अंधारे
निर्देशक: निशिकांत कामत
जोनर: मर्डर मिस्ट्री, रोमांच व रहस्य
गीतकार: ऎश किंग, रेखा भारद्वाज, राहत फतेह अली खान, अरिजित सिंह, केके
संगीत: विशाल भारद्वाज
डायलॉग: उपेंद्र सिद्धे
स्टारकास्ट: अजय देवगन, तब्बू, श्रेया सरन, रजत कपूर, इशिता दत्ता, मृणाल जाधव।
रेटिंग: 2.5 स्टार
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