Budget 2017: सभी की पहुंच में आए होम व एजुकेशन लोन,रिमोट एरिया के लिए खुले खजाना

Budget 2017: सभी की पहुंच में आए होम व एजुकेशन लोन,रिमोट एरिया के लिए खुले खजाना
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Prem Shankar Tiwari | Updated: 31 Jan 2017, 11:21:00 PM (IST) MP Budget

पत्रिका टॉक शो में विशेषज्ञों ने रखी राय, केन्द्र सरकार से जताई उम्मीद

जबलपुर। आम बजट से उम्मीदों को लेकर पत्रिका कार्यालय में सोमवार को शिक्षाविद्, अर्थशास्त्री, उद्योगपति और कारोबारियों ने मंथन किया। अलग-अलग सेक्टर पर विचार रखे। अगले वित्तीय वर्ष में   जीएसटी लागू होने के कारण  उद्योगपति एवं कारोबारी यह आशा लगा रहे हैं कि करों की दरों में इजाफा नहीं होगा। उन्हें सहूलियत मिलेगी। नोटबंदी के बाद कैशलेस अर्थव्यवस्था के लिए जमीनी स्तर पर पर प्रयास करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। करों की दर यथावत रखने की उम्मीद जताई। साइबर सिक्योरिटी, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं में इजाफा, स्किल डवलपमेंट और इनकम टैक्स के स्लैब में वृद्धि की संभावना भी जताई गई। 

ये कह रहे एक्सपर्ट 

नोटबंदी के बाद उद्योग एवं व्यापार प्रभावित रहा। इस नुकसान की भरपाई हो। निर्यात बढ़ाने  भी विशेष प्रयास हों। इनकम टैक्स दरें बढ़ाई जाएं। रेल और आम बजट एकसाथ करने से नुकसान होगा। रक्षा एवं रक्षा उत्पादन बजट इसका उदाहरण है। 
रवि गुप्ता, अध्यक्ष महाकोशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

इनकम टैक्स का स्लैब बढ़ाने से कुछ नहीं होगा। यह कर सरकार के राजस्व का मुख्य हिस्सा नहीं है। रियल इस्टेट को बढ़ाने के लिए होम लोन दरें और कम की जाएं। जीएसटी आ रहा है। इसलिए दीगर करों की दरें भी नहीं बढ़ाई जानी चाहिए।
शंकर नाग्देव, प्रवक्ता महाकोशल चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

&अर्थव्यवस्था को गति देने का इससे बेहतर समय नहीं हो सकता। जीएसटी जितनी जल्दी हो सके लाया जाए। नोटबंदी से सरकारी खजाना भरा है। बड़ी योजनाओं पर काम किया जा सकता है। निजी सेक्टर को बढ़ावा देने कारगर योजनाओं की घोषणा हो।
पंकज माहेश्वरी, कोषाध्यक्ष जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

टैक्स लगाने का काम हर सरकार करती है, लेकिन उसे वसूलने की व्यवस्था में सुधार पर ध्यान नहीं दिया जाता। यदि वह दुरुस्त कर ली जाएं तो फिर राजस्व जुटाना कठिन नहीं होगा। इससे सरकार बड़ी योजनाओं के लिए ठोस कदम उठा सकती है। 
तरुण आनंद, सेवानिवृत्त अधीक्षण यंत्री जेडीए 

सरकार का प्रयास डिजीटल इंडिया की तरफ है। एेसे में जरूरी है कि वित्तीय एवं तकनीकी साक्षरता पर जोर दिया जाए। प्राथमिक शिक्षा के साथ इसे जोड़ा जाए। स्कूल और कॉलेजों को अलग से बजट दिया जाना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा जरूरत है।
डॉ. आशीष मिश्रा, प्राध्यापक, जीएस कॉलेज 

इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव जरूरी है। बुजुर्ग और महिलाओं को आयकर में विशेष छूट दी जानी चाहिए। कैशलेस के लिए व्यवस्थाएं पर्याप्त नहीं हैं। इस बजट में एेसा प्रावधान हो जिससे यह व्यवस्था आसान हो जाए। 
हेमराज अग्रवाल, महामंत्री, मिष्ठान विक्रेता संघ

बजट के प्रावधान का क्रियान्वयन बहुत आवश्यक है। देश में कई तरह के कर में तकनीकी खामियां हैं। यदि उन्हें दूर किया जाता है तो कर चुकाना कठिन नहीं होगा। डिजीटल इंडिया अभियान में लक्ष्य आधारित कार्य कि ए जाएं।
तरुण परवानीसचिव, जबलपुर सीए ब्रांच 

भ्रष्टाचार रोकने बजट में प्रावधान किया जाना चाहिए। चिकित्सा सुविधाओं में इजाफा हो। गरीबों को रियायत मिलनी चाहिए। हर शहर में शिक्षा के बेहतर इंतजाम हों, ताकि छात्रों को दूसरी जगहों का मुंह न ताकना पडे़। 
नरिंदर सिंह पांधे, सचिव, जबलपुर चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री

कैशलेस प्रणाली में सुरक्षा अहम है। इस पर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। राजस्व में वृद्धि के लिए सरकार को बेहतर बचत योजनाएं लानी चाहिए। ब्याज दरें ऊंची होनी चाहिए। बिजनेस मैन के लिए बजट में विशेष प्रावधान किए जाने चाहिए।
सौरभ जैन, चार्टर्ड अकाउंटेंट 

रेल और सड़क यातायात को समृद्ध बनाना चाहिए। पर्याप्त और अच्छी बसें हों तो सड़कें और रख-रखाव की व्यवस्था भी अच्छी हो। ई-रिक्शा को बढ़ावा देने वाली योजना से श्रमिक वर्ग को रोजगार मिलेगा। 
शीतल उपाध्याय, डिप्टी सीईओ, जेसीटीएसएल

देश में करों के सरलीकरण की प्रक्रिया धीमी है। इस पर ध्यान देने की जरूरत है। लोग कर तो चुकाना चाहते हैं लेकिन इसके लिए कई प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ता है। जो नियम बनाए जाएं उनका क्रियान्वयन भी उसी गति में होता तो बेहतर होगा। 
आशीष चावला, चार्टर्ड अकाउंटेंट 

अभी  निर्माण क्षेत्र में आगे बढऩे की आवश्यकता है। नॉलेज इंडस्ट्री को बढ़ावा देने के लिए विशेष योजना की घोषणा होनी चाहिए। इसके अलावा सरकार को स्किल डवलपमेंट की योजना पर तेजी के साथ काम करना होगा।  
धर्मेन्द्र वर्मा, संचालक राज्य वन अनुसंधान संस्थान 

देश में हर आदमी टैक्स से केवल इसलिए बचता है कि इसमें कई औपचारिकताएं करनी पड़ती हैं। आज सरल स्वकर योजना को बढ़ावा दिया जाना उचित होगा। जीएसटी के कारण उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र पर कर बढ़ाना उचित नहीं। 
अनुराग रावत, चेयरमैन जबलपुर सीए ब्रांच

आम आदमी को राहत देने वाला बजट होना चाहिए। घर-गृहस्थी और जरूरत की वस्तुएं सस्ती होनी चाहिए। किसान और मजदूर की तरक्की के लिए बजट में विशेष प्रावधान किया जाना जरूरी है। रेलवे में किराया ज्यादा नहीं बढ़ाया जाए।  
अनिल कुमार सोनी, अधिवक्ता

एक राष्ट्र है इसलिए एक बजट हो। इसका विभाजन नहीं होना चाहिए। ग्रामीण क्षेत्र का पढ़ा-लिखा युवा वहां तभी रुकेगा जब रोजगार के संसाधन मिलें। उम्मीद है कि इस बजट में गांव और महिला सशक्तिकरण पर विशेष जोर होगा। शिक्षा प्रगति का सबसे बड़ा माध्यम होता है। इसके लिए विशेष बजट मिल सकता है। स्किल डेवलपमेंट पर पूर्व के बजट में भी प्रावधान था। उसमें इजाफा हो सकता है।  हमारे विश्वविद्यालय ने इस दिशा में काम किया है। युवाओं के लिए व्यावसायिक पाठ्यक्रम चलाए जा रहे हैं। 
प्रो. केडी मिश्र, कुलपति रानी दुर्गावती विश्वविद्यालय 

आयकर की सीमा बढऩी चाहिए।  यदि एेसा नहीं हुआ तो आश्चर्य होगा। चिकित्सा क्षेत्र में सुविधाओं का विस्तार जरूरी है। उम्मीद है कि निजी मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल खोलने के लिए सब्सिडी मिलेगी। इससे इलाज आसान हो सकेगा। मल्टी स्पेशलिटी सेंटर खोलने के लिए विशेष सुविधाएं मिलने के आसार हैं। बजट में निजी अस्पतालों में कैशलेस ट्रांजेक्शन अनिवार्य कर देना चाहिए। इससे लेनदेन में पारदर्शिता बढेग़ी साथ ही मेडिक्लेम भी आसान होंगे। राज्य बीमारी सहायता योजनाओं में ज्यादा आर्थिक सहयोग मिल सकता है। केन्द्र सरकार भी कोई नई घोषणा कर सकती है। 
डॉ. आरएस शर्मा, कुलपति मेडिकल यूनिवर्सिटी
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