'हमसे' किए वादों पर खरी नहीं उतरी सरकार, शहर की Budget 2017 से हैं ये 8 मांगें

'हमसे' किए वादों पर खरी नहीं उतरी सरकार, शहर की Budget 2017 से हैं ये 8 मांगें
mp budget 2017

वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए बजट का काउंट-डाउन शुरू हो चुका है। प्रदेश की भांति ग्वालियर अंचल के लोगों की निगाहें इस बजट पर टिकी हैं। उम्मीदें भी हैं कि ग्वालियर अंचल के विकास को लेकर कुछ अहम घोषणाएं की जाएंगी।

ग्वालियर। वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए बजट का काउंट-डाउन शुरू हो चुका है। प्रदेश की भांति ग्वालियर अंचल के लोगों की निगाहें इस बजट पर टिकी हैं। उम्मीदें भी हैं कि ग्वालियर अंचल के विकास को लेकर कुछ अहम घोषणाएं की जाएंगी। दरअसल बजट से उम्मीदों की ठोस वजह भी हैं।





अंचल से प्रदेश मंत्रिमंडल में पांच मंत्री हैं। अलबत्ता इससे पहले के बजट में अंचल के लिए कुछ अहम घोषणाएं पर नजर डालें तो पता चलता है कि अपवाद एक दो को छोड़ दें तो कोई भी योजना धरातल पर नहीं है। अधिकतर घोषणाएं छलावा साबित हुईं। दरअसल अधिकतर घोषणाएं केवल कागजों में हैं। इनमें सर्वाधिक घोषणाएं ग्वालियर के संदर्भ में थीं।

2016-17 के बजट में की गई घोषणाए और हालत

1- दूसरा आईटी पार्क
दूसरे आर्ईटी पार्क का प्रस्ताव भारत सरकार को भेजा गया है। प्रदेश सरकार इस आईटी पार्क के तकनीकी पेंच सुलझा नहीं सकी है। दिलचस्प बात ये है कि ग्वालियर के पहले आईटी पार्क में अब तक एक भी आईटी कंपनी ने दस्तक नहीं दी है। अब फोर स्टार नाम की कंपनी ने एक हफ्ते पहले काम शुरू किया है।




2- जेएएच की अधोसंरचना
जेएएच सहित प्रदेश के अस्पतालों की अधोसंरचना विकसित करने के लिए पिछले बजट में 650 करोड़ से अधिक का प्रावधान किया गया था। ये घोषणा विशेष रूप से एक हजार बिस्तरों वाले अस्पताल के लिए रही थी।
वर्तमान स्थिति: ग्वालियर के जेएएच अस्पताल में इसका कोई फायदा नहीं हुआ है। एक हजार बिस्तरों वाला अस्पताल अभी भी हवा में हैं।

3- मनोरंजन कर की मार
किले के लाइट एण्ड साउण्ड शो व तिघरा में पैडल वोटिंग के मनोरंजन कर से चालू वित्तीय वर्ष से मुक्ति की घोषणा की गई थी।
वर्तमान स्थिति: इस घोषणा के मुताबिक मनोरंजन कर माफ हो चुका है।




4-नत्रजन उत्पादन संस्थान की स्थापना
ग्वालियर में नत्रजन उत्पादन बढ़ाने के लिए बहुचर्चित घोषणा की गई। इसका मकसद अंचल में दुग्ध उत्पादन को बूस्टर डोज देने का था।
वर्तमान स्थिति- इस दिशाम में कुछ भी नहीं है। यहां तक की जमीन का आवंटन भी नहीं किया जा सका है।

5- आदर्श को नहीं मिली जमीन
श्योपुर में एक आदर्श महाविद्यालय खोलने की घोषणा की गई थी। दस करोड़ का बजट तय किया गया।
वर्तमान स्थिति: वर्तमान स्थिति ये है कि अभी तक घोषित आदर्श महाविद्यालय की स्थापना के लिए जमीन तक तलाशी नहीं जा सकी है।

6- प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र
शिवपुरी में कुछ प्राथमिक चिकित्सा केन्द्रों की स्थापना की घोषणा की गई। हालांकि इसमें धनराशि का उल्लेख नहीं किया गया था।
वर्तमान स्थिति: शिवपुरी में इस साल किसी भी प्राथमिक चिकित्सा केन्द्र की स्थापना नहीं की गई है।

7- सुपर स्पेशलिटी
गजराराजा मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशिलिटी की सुविधा विकसित करने की घोषणा की थी।
वर्तमान स्थिति: अभी मेडिकल कॉलेज में किसी तरह की सुपर स्पेशलिटी की सुविधा हासिल नहीं हो सकी है। दो साल बाद उसकी बिल्डिंग निर्माण की शुरुआत हो सकी है। सूत्र बताते हैं कि जब तक इसकी बिल्डिंग बनेगी, उसकी लागत में करीब तीस फीसदी का इजाफा हो चुका होगा। 

8- मॉडल बनाने की घोषणा
ग्वालियर के औद्योगिक प्रशिक्षण केन्द्र को मॉडल बनाने की घोषणा की गई थी। ताकि बेहतर प्रशिक्षण की जरूरत पूरी की जा सके।
वर्तमान स्थिति- अभी तक धरातल पर इस घोषणा का कोई असर नहीं है। डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट तक नहीं बनाई जा सकी है।
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