रेलवे में सीनियर सिटीजन के लिए  50% रिजर्वेशन, ऐसा है हमारा बजट

रेलवे में सीनियर सिटीजन के लिए  50% रिजर्वेशन, ऐसा है हमारा बजट
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gaurav nauriyal | Publish: Feb, 01 2017 04:04:00 PM (IST) MP Budget

मध्यप्रदेश को रेल बजट में 5376 करोड़ रुपए की राशि मिली। 2009 से 2014 के मुकाबले ये 750 प्रतिशत अधिक है। इस राशि से संरक्षा, सुरक्षा व सुविधा जुटाना होगा।

भोपाल/रतलाम। वर्ष 2017-18 के आम बजट में शामिल रेल बजट में वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मध्यप्रदेश को हर बार के मुकाबले अधिक धन दिया है। ई टिकट की बुकिंग पर सर्विस चार्ज खत्म करने की घोषणा की है। फिलहाल आईआरसीटीसी ने इसे 31 मार्च तक स्थगित किया हुआ है।

इससे प्रदेश में करीब 10 लाख यात्रियों को बड़ा लाभ होगा। इसके अलावा 2020 तक मानवरहित रेल फाटक को समाप्त करने की घोषणा की है। इससे ट्रेन दुर्घटना में कमी आएगी। तीर्थ दर्शन ट्रेन चलाने से प्रदेश में उज्जैन को बड़ा लाभ होगा। इन सब के बाद भी प्रदेश की उम्मीदे जो थी, उससे काफी कम मिला है। ट्रेन का किराया बढऩे की संभावना खत्म हो गई है।

प्रदेश को पहली बार अधिक बजट
2009 से 2014 तक के रेल बजट की तुलना की जाए तो 2017-18 में मध्यप्रदेश को 5376 करोड़ रुपए की राशि पहली बार मिली है। इसमे रेल लाइन का डबलीकरण, नई रेल लाइन का विस्तार, यात्री सुविधा, सुरक्षा व संरक्षा पर रेलवे काम करेगी। 2013-14 में प्रदेश को 632 करोड़, 2016-17 में 2871 करोड़ रुपए व 2017-18 में 5376 करोड़ रुपए की राशि मिली है। 

पहले पढ़िए ई टिकट के बारे में
अब आईआरसीटीसी के ई टिकट बुकिंग पर किसी प्रकार का सर्विस चार्ज नहीं लगेगा। दिसंबर माह से रेलवे ने इस पर लगगे वाले सर्विस चार्ज 14 प्रतिशत को स्थगित कर रखा है। ये 31 मार्च तक नहीं लगेगा। अकेले मध्यप्रदेश में ही ्रप्रतिदिन करीब 1 लाख से अधिक यात्री ई टिकट से यात्रा करते है। इससे बड़ा लाभ ये होता हैं कि टिकट खरीदी की लाइन में नहीं लगना होता है। कैशलेस भुगतान को बढ़ावा देने के लिए रेलवे में इस सुविधा को शुरू करने की घोषणा की गई है।

arun jetly with suresh prabhu

ये है रेल बजट में खास बिंदु
- सभी आरक्षित कोटा में महिलाओं को 33 प्रतिशत का आरक्षण।
- सिनीयर सिटीजन को 50 प्रतिशत आरक्षण।
- रेल किराए में वृद्धि नहीं।
- 100 रेलवे स्टेशन पर वाई-फाई।
- रेलबंधु मेगजीन को सभी भाषा में जारी करना।
- ई टिकट को विदेशी डेबिट व के्रडिट कार्ड से भी मंजूरी।
- कुली को सहायक का दर्जा।
- 2019 तक रेल के सभी डिब्बों में बॉयो टॉयलेट।
- 500 स्टेशन पर लिफ्ट व एेस्केलेटर की बात।
- प्रदेश में इसके लिए सिर्फ 6 स्टेशन का चयन।
- सोलर लाइट को बढ़ावा।

2020: नहीं होंगे मानव रहित रेल फाटक
वित्त मंत्री ने एक और बड़ी घोषणा की है। इसमे आगामी तीन वर्षो में रेलवे ट्रैक पर मानव रहित रेल फाटक को बंद करने की घोषणा की है। इससे रेलवे में इस प्रकार के फाटक पर होने वाली दुर्घटना समाप्त होगी। प्रदेश में करीब 10000 से अधिक रेल फाटक है। इनमें से प्रदेश में करीब 2158 रेल फाटक मानवरहित है।

इनमें रतलाम मंडल के धोंसवास व माननखेड़ा फाटक पर 2016 में ही दुर्घटना हुई थी। इसी प्रकार खंडवा, बेतुल, छिदवाडा आदि में आए दिन अलग-अलग तरह से ट्रेन दुर्घटना होती रहती है। इस प्रकार के फाटक नहीं होने पर रेलवे के साथ यात्रियों को भी लाभ होगा। इस तरह होगा मंडल में इनसे लाभप्रदेश के रतलाम, इंदौर, उज्जैन, इंदौर, जबलपुर, ग्वालियर, भोपाल,आदि शहरों में प्रतिमाह एक लाख से अधिक ई टिकट की बुकिंग व इससे ट्रेन में यात्रा होती है।

इस पर करीब 14 प्रतिशत सर्विस चार्ज लगता था। अब इसको स्थायी रुप से समाप्त करने की घोषणा की गई है। इससे अब प्रदेश में ट्रेन से ऑनलाइन टिकट की यात्रा के टिकट के यात्रियों के द्वारा दिए जाने वाले भुगतान में करीब 14 प्रतिशत कम किराया देना होगा। उदाहरण के लिए अगर कही का टिकट 100 रुपए का है तो वो 114 रुपए में यात्री को मिलता था। अब ये टिकट 100 रुपए में उपलब्ध होगा। इससे यात्रियों को लाभ होगा।

सोलर लाइट से बिजली की बचत
रेल बजट में देश के 7 हजार रेलवे स्टेशन पर सोलर लाइट लगाने की घोषणा की गई है। इसमे प्रदेश में इंदौर, उज्जैन, भोपाल, रतलाम, खंडवा, उमरिया, कटनी के अलावा अन्य पांच रेलवे स्टेशन शामिल किए गए है। सोलर बिजली का उद्देश्स रेलवे में बिजली की खपत को कम करना व इसकी बचत कर स्वयं का उत्पादन करना है। हालाकि इसके लिए निविदा होने से लेकर लगने तक में छह से आठ माह का समय लगेगा।

दुर्घटना में आएगी कमी
मानव रहित रेल फाटक समाप्त होने से मंडल में ट्रेन दुर्घटना में कमी आएगी। प्रदेश में भोपाल, ग्वालियर, सतना, सागर, उज्जैन, रतलाम, इंदौर-मक्सी सेक्शन में सबसे अधिक मानवरहित रेल फाटक है। इनमे से रतलाम-नामली सेक्शन व जावरा-मंदसौर सेक्शन में 2016 में ट्रेन दुर्घटना हुई थी। दोनों बार की दुर्घटना में इंजन चालक आदि को चोट आई थी। मानव रहित रेल फाटक नहीं होने से मंडल में ट्रेन दुर्घटना में कमी आएगी व सुरक्षित यात्रा का लाभ मिलेगा। हालाकि ये काम तीन वर्ष में करने की बात कही गई है। पिछले रेल बजट में भी इसी बात को कहा गया था।

उज्जैन ले सकता बड़ा लाभ
तीर्थ दर्शन के लिए ट्रेन चलाने की बात बजट में कही गई है। प्रदेश में सबसे अधिक तीर्थ यात्री उज्जैन में महाकाल दर्शन के लिए आते है। इसके अलावा मय्या मैहर वाली के दर्शन को आते है। रेलवे के अनुसार देश के चारों कोनों से उज्जैन को जोडऩे से जहां तीर्थ यात्री बढे़ंगे वहीं रेलवे के साथ-साथ उज्जैन का राजस्व भी बढेग़ा। इस समय उज्जैन को दक्षिण व उत्तर के अलावा पुर्वी राज्यों से जोडऩे की जरूरत है। यहां मंगलनाथ मंदिर में होने वाली भात पुजा के लिए असम से लेकर त्रिपुरा तक के श्रद्धालु आते है। 

ये आस रही अधूरी
प्रदेश के रुप में देखे तो इंदौर-मनमाड़ लाइन के लिए बजट, इंदौर-देवास-उज्जैन लाइन का डबलीकरण, रतलाम-बांसवाड़ा-डूंगरपुर रेल लाइन के लिए फिलहाल कुछ सामने नहीं आया है। भोपाल में एेस्क्ेलेटर से लेकर लिफ्ट, ग्वालियर में स्टेशन का विकास व जबलपुर- भोपाल लाइन पर तीसरी लाइन के लिए प्रस्ताव के बाद भी कुछ नहीं कहा गया। इतना ही नहीं, 500 स्टेशनों को दिव्यांगों के लिए सुविधाजनक बनाने की बात तो कही गई, लेकिन उसमे प्रदेश के सिर्फ दो रेलवे स्टेशन का शामिल किया गया, लेकिन इस कार्य की शुरुआत सबसे पहले उत्तर प्रदेश से होगी। इसका मतलब मध्यप्रदेश को अभी इंतजार करना होगा।

इस बारे में नहीं कहा कुछ
गत बजट तक स्वच्छता पर जोर दिया गया था। इस बार के बजट में ये गायब हो गया है। इसके अलावा संरक्षा, सुरक्षा व सुविधा याने के ट्रिपल एस को गायब कर दिया गया है। सुरक्षा के लिए अलग से राशि की बात तो कही गई है, लेकिन पुरानी हो गई पटरियों व 1960 से चल रहे संसाधन से दुर्घटनाओं को कैसे कम किया जाएगा, इस बारे में कुछ साफ नहीं किया गया है। रेलवे में पटरी की सुरक्षा, सुरक्षित यात्रा के बारे फिलहाल साफ नहीं बताया गया है। इसके अलावा स्टेशनों के विकास के बारे में पिछले बजट में कहा गया था। इसकी शुरुआत भी हुई, लेकिन वित्तीय वर्ष की समाप्ती तक सिर्फ दो स्टेशन का विकास हो पाएगा, उनमे भी मध्यप्रदेश का एक भी स्टेशन शामिल नहीं है।

नई ट्रेन से बेहतर सुधार
बजट काफी बेहतर है। नई ट्रेन की घोषणा से बेहतर ट्रैक का सुधार है। सभी को इस बजट में कुछ न कुछ दिया गया है।
- मनोज सिन्हा, रेल राज्य मंत्री

आमजन को दूर कर दिया
इस बजट ने आमजन को खुद से दूर कर दिया है। अब तक जो सामने आया है इससे ये साफ है कि रेलवे को तेजी से नीजिकरण की और ले जाया जा रहा है।
- कांतिलाल भूरिया, संसद सदस्य, रतलाम

रेल कर्मचारी गायब है बजट में
रेल बजट में कर्मचारी के हित को गायब कर दिया गया है। लंबित मांग पर कुछ नहीं कहा गया। इसका मतलब साफ हैं कि सरकार सिर्फ पंजीपतियों के लिए बजट बनाई है। राशि देने से क्या होता है। उसकी घोषणा हर बार होती है, लेकिन काम कितना होता है, उस पर निर्भर है।
- गोविंदलाल शर्मा, प्रदेश महामंत्री, हिंद मजदूर सभा
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