scriptHow to follow the path of Shri Krishna? | कृष्ण के मार्ग पर कैसे चलें? | Patrika News

कृष्ण के मार्ग पर कैसे चलें?

एक कृष्ण होने का क्या मतलब?

भोपाल

Updated: August 31, 2021 09:47:00 am

श्रीमद-भगवत् गीता, बाइबिल, कुरान, उन्होंने जो कुछ भी लिखा, वह कुछ इस प्रकार है - एक दिन कोई आदमी समुद्रतट पर सुबह-सुबह गया, और वहां बयार इतनी जबरदस्त थी कि वह बहुत आनंदित हो गया। जब आप कोई वाकई सुंदर चीज अनुभव करते हैं, तो आप उसे किसी से साझा करना चाहते हैं, है न? अगर आप एक अच्छा चुटकुला भी सुनते हैं, तो आप उसे, खुद को कंबल में ढंककर, अपने आप को ही नहीं सुनाने वाले हैं। आप उसे किसी दूसरे को सुनाना चाहते हैं।

shri krishan marg
follow the path of Krishna

तो यह आदमी उस बयार को एक खास व्यक्ति से साझा करना चाहता था जिसे वह अपने जीवन में प्रेम करता है। वह खास व्यक्ति अस्पताल में बीमार पड़ा था और समुद्रतट पर नहीं आ सकता था। लेकिन यह व्यक्ति साझा करने को बहुत उत्सुक था, तो वह ताबूत जितना बड़ा एक डिब्बा ले आया, उसमें बयार बंद की ताकि हवा बाहर न निकल सके, और एक पत्र के साथ उसे अस्पताल भेज दिया।

Shri krishna

वह डिब्बा अस्पताल पहुंचा। मान लीजिए कि आप वह व्यक्ति हैं जो अस्पताल में है। अब आप दो चीजें कर सकते हैं। आप बहुत सावधानी से डिब्बा खोलें, डिब्बे में घुसकर अंदर से बंद करें और उस शानदार बयार को अनुभव करें। या आप उस संदेश को ले लें, और जब आप पर्याप्त स्वस्थ हो जाएं, तो आप उस मार्ग पर चलें जिस पर वह चला था, उस जगह पर पहुंचें, और शानदार बयार का आनंद लें। आपके पास यह दो विकल्प हैं।

सारे धर्मग्रंथ बस ये डिब्बे हैं। किसी को अपने भीतर एक जबरदस्त अनुभव हुआ, और वह उसे साझा करना चाहता था। साझा करने की अपनी उत्सुकता में, उन्होंने या तो बोला, या लिखा, या कोई चीज की। लेकिन अब आप उस किताब को ‘पवित्र चीज’ के रूप में अपने सिर पर ढो रहे हैं और किताब के नाम पर अधिक मूर्ख होते जा रहे हैं।

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अगर आप उस मार्ग पर चलते हैं जिस पर कृष्ण चले - तब यह कितनी सुंदर बात होगी! लेकिन अगर आप भगवत् गीता को सिर पर ढोते हैं, तो आप एक मूर्ख बन जाते हैं। बहुत से लोग हैं जो गीता को अपने तकिए के नीचे रखकर सोते हैं, ताकि वह सीधे उनके सिर में प्रवेश कर जाए! अगर आप गीता को अपने तकिए के नीचे रखते हैं, तो आपकी गरदन में दर्द हो जाएगा। आप एक कृष्ण नहीं बन जाएंगे।

अगर आप उस मार्ग पर चलते हैं जिस पर वह चले, अगर आप वह संभावना पैदा करते हैं जो उन्होंने अपने अंदर पैदा की, तब गीता एक हकीकत होगी। तब तक, किसी चीज में विश्वास मत कीजिए, जो किसी ने कहा है। इसका मतलब यह नहीं है कि आपको अविश्वास करना चाहिए। इसका मतलब यह कहना नहीं है कि ‘कृष्ण बकवास हैं।’ नहीं। आप नहीं जानते; वे ऐसी चीजों की बातें कर रहे हैं जो आपके लिए अभी तक हकीकत नहीं हैं। अगर आपके अंदर इतना खुलापन है कि ‘यह आदमी बहुत सी चीजें कह रहा है, चलो देखते हैं कि वो क्या हैं,’ तब संभावना मौजूद होगी।

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तो, एक कृष्ण होने का क्या मतलब है? ‘क्या मुझे रोमांस करना चाहिए या युद्ध शुरू करना चाहिए?’ मुद्दा यह नहीं है। उन्होंने अपने जीवन में जो कुछ किया वह इसलिए किया क्योंकि वे उस तरह की परिस्थितियों में पहुंच गए थे। पूरी महाभारत एक तीव्र नाटक है जिसमें लोगों के लिए हर तरह की असाधारण परिस्थितियां थीं।
वहां अच्छे लोग थे, बुरे लोग थे, वहां बहुत अधिक दुष्ट लोग थे, और असाधारण मानव भी थे। लेकिन जब भी स्थितियां तीव्रता के एक खास स्तर से आगे गईं, उन सब ने दुःख झेले। अच्छे लोगों ने दुःख झेले, बुरे लोगों ने दुःख झेले। यही महाभारत है। हर कोई - अच्छा और बुरा - जिस भी नाटक से वो गुजरा, उसने पीड़ा सही। लेकिन एकमात्र कृष्ण ही थे जो इस पूरी चीज से बिना किसी पीड़ा की भावना के गुजरे।
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तो कृष्ण के मार्ग पर चलने का मतलब बस वही है। अगर आप अपने नाटक से बिना किसी पीड़ा की भावना के गुजर सकते हैं, तो आप कृष्ण के मार्ग पर हैं। अगर आप अपने पड़ोसी से रोमांस करते हैं, तो वह कृष्ण का मार्ग नहीं है; अगर आप किसी के साथ लड़ाई शुरू करते हैं, तो वह कृष्ण का मार्ग नहीं है। कृष्ण का मार्ग है - किसी भी तरह के नाटक से अछूते गुजरना। वही उनका मार्ग है।
- सद्गुरु, ईशा फाउंडेशन
एक योगी और दिव्यदर्शी सद्गुरु, एक आधुनिक गुरु हैं। विश्व शांति और खुशहाली की दिशा में निरंतर काम कर रहे सद्गुरु के रूपांतरणकारी कार्यक्रमों से दुनिया के करोड़ों लोगों को एक नई दिशा मिली है। 2017 में भारत सरकार ने सद्गुरु को उनके अनूठे और विशिष्ट कार्यों के लिए पद्मविभूषण पुरस्कार से सम्मानित किया है।

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