12 साल बाद छठ पर्व पर बना अद्भुत संयोग, जानिए अर्घ्य का शुभ समय

12 साल बाद छठ पर्व पर बना अद्भुत संयोग, जानिए अर्घ्य का शुभ समय
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 विद्वान् पंडितों के अनुसार इस वर्ष छठ महापर्व का पहला अर्घ्य रविवार को होने तथा चंद्रमा के गोचर में रहने से सूर्य आनंद योग का दुर्लभ संयोग लगभग 12 वर्षों के बाद बन रहा है।

इंदौर। दीपावली के समापन के पश्चात देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश एवं मालवांचल के विभिन्न क्षेत्रों में रह रहे हजारों, लाखों अप्रवासी बिहार, उत्तर प्रदेश एवं  अन्य पूर्वोत्तर के परिवारों के बीच लोक आस्था के महापर्व छठ पूजा की तैयारियाँ जोरों से चल रही हैं।

इस वर्ष कार्तिक शुक्ल षष्ठी को खास संयोग बनने के कारण छठ महापर्व का विशेष महत्व है। विद्वान् पंडितों के अनुसार इस वर्ष छठ महापर्व का पहला अर्घ्य रविवार को होने तथा चंद्रमा के गोचर में रहने से सूर्य आनंद योग का दुर्लभ संयोग लगभग 12 वर्षों के बाद बन रहा है, जिसके कारण लंबे समय से बीमार चल रहे व्यक्ति का स्वास्थ्य बेहतर होगा और संतान की भी प्राप्ति होगी।

चार-दिवसीय छठ महापर्व की शुरुआत  4 नवंबर (शुक्रवार) को  नहाय खाय से होगी।  इसके अंतर्गत,  छठ  उपासक  अपने-अपने  घरों  की  सफाई  करने  के  पश्चात  पूर्ण  पवित्रता के साथ  घर में  बने शुद्ध शाकाहारी कद्दू, चने की दाल, चावल एवं अन्य  शाकाहारी  पदार्थों से बना भोजन  ग्रहण करेंगे।


छठ  पर्व  के  दूसरे  दिन  शनिवार (5 नवंबर) कार्तीक  शुक्ल  पंचमी को खरना का आयोजन होगा।  इस दिन व्रतधारी दिन भर का उपवास रखने के बाद शाम को गन्ने के रस में बने हुए चावल की खीर के साथ दूध, चावल का पि_ा और घी चुपड़ी रोटी का प्रसाद भगवान सूर्य को भोग लगाने के पश्चात  भोजन करेंगे।  तत्पश्चात शुरू होगा व्रतधारियों द्धारा 36 घंटे  निर्जला उपवास।  छठ पर्व के तीसरे दिन  6 नवंबर (रविवार) को अस्ताचलगमी सूर्य को व्रतधारियों द्वारा जलकुण्ड में खड़े रह कर अघ्र्य दिया जाएगा तथा  छठ महापर्व का समापन  7  नवंबर (सोमवार) को व्रतियों द्वारा उगते हुए सूर्यदेव को अघ्र्य देने के पश्चात होगा।

80 से अधिक स्थानों पर देंगे अघ्र्य
पिछले वर्षों की तरह इस वर्ष भी शहर में  बसे  बिहार, उत्तर प्रदेश एवं अन्य पूर्वोत्तर  क्षेत्रों के लोगो द्धारा 80  से अधिक स्थानों पर सूर्यदेव को अध्र्य दिया जाएगा।  शहर में छठ महापर्व का मुख्य आयोजन विशेष रूप से  स्कीम नंबर 54 (विजय नगर ), स्कीम नंबर  78, तुलसी नगर, सुखलिया,  श्याम नगर,  बाणगंगा, पिपलियापाला, समर पार्क, निपनिया, एरोड्रोम क्षेत्र में, सिलिकॉन सिटी, राउ इत्यादि जगहों पर किया जा रहा है।


पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान के प्रदेश अध्यक्ष ठाकुर जगदीश सिंह, महासचिव एवं विद्यापति परिषद् के सचिव के  के  झा, प्रदेश सचिव अजय कुमार झा, उपाध्यक्ष निर्मल दुबे, पूर्वोत्तर सांस्कृतिक संस्थान के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के अमजद खान, सादिक खान, मूसा भाई ने जानकारी देते हुए कहा कि दिवाली  की तैयारियों के साथ ही शहर में फैले छठ आयोजन समितियों  द्धारा छठ घाटों की सफाई शुरू कर दी गई है।  

आसान नहीं होता छठ महापर्व का उपवास
छठ पर्व या छठ कार्तिक शुक्ल की षष्ठी को मनाया जाने वाला एक हिन्दू पर्व है। सूर्योपासना का यह अनुपम लोकपर्व मुख्य रूप से पूर्वी भारत के बिहार, झारखण्ड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में मनाया जाता है। छठ उत्सव के केंद्र में छठ व्रत है जो एक कठिन तपस्या की तरह है।

यह प्राय: महिलाओं द्वारा किया जाता है किंतु कुछ पुरुष भी यह व्रत रखते हैं। व्रत रखने वाली महिला को परवैतिन भी कहा जाता है। चार दिनों के इस व्रत में व्रती को लगातार उपवास करना होता है। भोजन के साथ ही सुखद शैय्या का भी त्याग किया जाता है।

पर्व के लिए बनाए गए कमरे में व्रती फर्श पर एक कंबल या चादर के सहारे ही रात बिताई जाती है। इस उत्सव में शामिल होने वाले लोग नए कपड़े पहनते हैं। पर व्रती ऐसे कपड़े पहनते हैं, जिनमें किसी प्रकार की सिलाई नहीं की होती है। महिलाएं साड़ी और पुरुष धोती पहनकर छठ करते हैं। 'शुरू करने के बाद छठ पर्व को सालों साल तब तक करना होता है, जब तक कि अगली पीढ़ी की किसी विवाहित महिला को इसके लिए तैयार न कर लिया जाए। घर में किसी की मृत्यु हो जाने पर यह पर्व नहीं मनाया जाता है।'
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