अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में नहीं, जो इस गुरुद्वारे में है, जानें क्या

अमृतसर के स्वर्ण मंदिर में नहीं, जो इस गुरुद्वारे में है, जानें क्या
hoshangabad gurudwara

गुरुनानक देव जी का 548 वे प्रकाशोत्सव पर विशेषः मध्यप्रदेश को धरती को भी पावन कर चुके हैं गुरुनानक देव...। इंदौर, भोपाल और होशंगाबाद को निहाल करते हुए जबलपुर गए थे गुरुनानकदेव जी।


भोपाल/होशंगाबाद। सिख धर्म के संस्थापक गुरुनानक देव द्वारा लिखित ऐतिहासिक गुरु ग्रंथ साहिब आज भी होशंगाबाद के मंगलवारा घाट स्थित गुरुद्वारा में सुरक्षित है। यह ग्रंथ शहर में वर्ष 1973 में एक परिवार को मिला था। बाद में इसी स्थान पर गुरुद्वारे का निर्माण किया गया।

देश भ्रमण के दौरान गुरुनानक होशंगाबाद में रुके थे। माना जाता है कि संभवत: इसी दौरान उन्होंने ग्रंथ यहां रखा था। कहा जाता है कि यह ग्रंथ स्वर्ण मिश्रित स्याही से लिखा गया है। इतने पुराने सिर्फ दो ग्रंथ और हैं, जो हुजूर साहिब नांदेड़ और पंजाब के कीरतपुर में सुरक्षित रखे गए हैं।


इस संबंध में होशंगाबाद के सरदार राजपाल चड्ढा बताते हैं कि यह ग्रंथ उनके पिता सरदार जोगेन्द्रर सिंह चड्ढा और कुंदन सिंह चड्ढा को वर्ष 1973 में मंगलवारा घाट स्थित एक घर के कक्ष में एक संदूक में मिला था। उसके साथ एक कृपाण भी थी। इसके बाद ग्रंथ और कृपाण को संरक्षित करके गुरुद्वारा बनाया गया।


पवित्र है यह ग्रंथ
गुरुद्वारे में सुरक्षित यह ग्रंथ ऐतिहासिक है। यह करीब 400 साल पुराना माना जाता है। ग्रंथ साहिब में कई समाज की वाणी के नाम दिए हुए हैं। इसमें हरि नाम 8344 बार, प्रभु 1371, गोविंद 473, ठाकुर 210, राम 2533, गोपाल 421, नारायण 85, अल्लाह 49, खुदा 12 वाहे गुरु 16, करतार 220 बार आया है। 1430 पन्नों वालों इस ग्रंथ में शब्दों, सवैयों और श्लोकों की संख्या 5 हजार 894 और 10 लाख 24 हजार अक्षर हैं, जिसमें 3 प्रमुख रागों की साक्षी वाणी है।


इंटरनेट पर है पूरी जानकारी
मंगलवारा घाट स्थित गुरुद्वारे को इंटरनेट पर भी सर्च किया जा सकता है। इसमें गुरुद्वारे की फोटो को भी देखा जा सकता है।

2007 में हुआ था ऐतिहासिक घोषित
मध्यप्रदेश शासन ने वर्ष 2007 में गुरुद्वारे को ऐतिहासिक घोषित कर दिया था। इसमें तत्कालीन गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सचिव ने शासन से गुरु ग्रंथ साहिब के बारे में जानकारी दी। इसके बाद गुरुद्वारे को ऐतिहासिक घोषित किया गया।

भोपाल से होशंगाबाद गए थे गुरुनानक देव
माना जाता है कि बेटमा, इंदौर, भोपाल होते हुए होशंगाबाद आए थे। एक सप्ताह रुकने के बाद वे नरसिंहपुर, जबलपुर होते हुए दक्षिण दिशा की ओर गए थे। गुरुद्वारे के सूचना पटल पर इस बात का भी उल्लेख है कि प्राचीन नगर होशंगाबाद की स्थापना मालवा के राजा होशंगशाह ने की थी।



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