इंदौर में भी है शिर्डी वाले का धाम, 45 साल से लग रही भक्तों की भीड़

इंदौर में भी है शिर्डी वाले का धाम, 45 साल से लग रही भक्तों की भीड़
sai baba

अगर शिर्डी वाले सांई बाबा के भक्तों की संख्या का कोई रिकार्ड रखा जाए तो इंदौर टॉप फाइव में ही शुमार होगा। इंदौर से शिर्डी आने-जाने वाले यात्रियों की रोज की संख्या हजारों में है।

इंदौर. अगर शिर्डी वाले सांई बाबा के भक्तों की संख्या का कोई रिकार्ड रखा जाए तो इंदौर टॉप फाइव में ही शुमार होगा। इंदौर से शिर्डी आने-जाने वाले यात्रियों की रोज की संख्या हजारों में है। जो नहीं जा पाते, उनके लिए उतना ही अद्भुत और अलौकिक मंदिर छत्रीबाग में मौजूद है। यहां करीब 45 साल पुराने इस मंदिर के प्रति लोगों में अगाध श्रद्धा है।

लोग इसे शिर्डी के प्रतिनिधि मंदिर के रूप में ही पूजते है। यहां हर गुरुवार को शाम के समय श्रद्धालुओं का मजमा लगता है। गुरुवार को सांई बाबा का दिन माना जाता है। इस लिहाज से हफ्ते के इस दिन शाम सात बजे भव्य आरती का आयोजन किया जाता है।

मंदिर के संचालन ट्रस्ट में शामिल वीरेंद्र उपाध्याय बताते हैं कि लोग इस मंदिर से भी भावनात्मक रूप से उसी तरह जुड़े हैं, जैसे शिर्डी वाले मंदिर से। ट्रस्ट भी इंदौर और शिर्डी दोनों जगह अपने पारमार्थिक कार्य चला रहा है। 

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सांई भक्त निवास
इंदौर शहर सांई भक्त निवास के नाम से शिर्डी में इंदौर और मप्र के यात्रियों के लिए रूकने की उत्तम व्यवस्था है। मंदिर से सिर्फ आधा किमी दूर इस भक्त निवास में केवल 300 रुपए देकर ठहरा जा सकता है। अगर यहां ग्रुप जाए तो उसके लिए बड़े हॉल है। इसका किराया 1250 रुपए है।

शिर्डी में इतने कम किराए में होटल, लॉज भी नहीं मिलते हैं। सबसे अच्छी सुविधा यह है कि शिर्डी जाने के इच्छुक लोग कमरों की बुकिंग छत्रीबाग मंदिर से ही कर सकते हैं। ट्रस्ट सालभर स्वस्थ्य शिविर, रक्तदान शिविर जैसी गतिविधियां संचालित करता है।



यह है व्रत की विधि:-

1. यह व्रत 1, 9, 11 या 21 गुरूवार को करने से इच्छुक फल की प्राप्ति होती है।

2. इस व्रत को साईंबाबा का नाम लेकर आरंभ करना चाहिए। चाहे स्त्री हो या पुरूष यह व्रत कोई भी कर सकता है।

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3. पूजन विधि प्रारंभ करने से पहले आसन पर पीला कपडा बिछाकर साईंबाबा की तस्वीर उस पर रखें।

4. इसके पश्चात तस्वीर पर चंदन व कुम-कुम लगाकर पीले फूल या हार चढाऐं और भोग लगाऐं। 

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5. इसके बाद व्रत कथा पढें और साईंबाबा की आरती करें।

6. पूजा के पश्चचात हर गुरूवार को साईंबाबा के मंदिर अवश्य जाऐं।

7. इस व्रत को आप फलाहार लेकर भी कर सकते हैं।

8. इस व्रत के उद्यापन के वक्त गरीबों को भेजन करवाऐं और अपने पडोसियों व सगे-संबंधियों को यथाशक्ति अनुसार व्रत कथा की पुस्तक भेंट दें।
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