अगहन मास में ऐसे करें शंख की पूजा, महालक्ष्मी कर देगी मालामाल

श्रीमद्भागवत के अनुसार, श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है 'मासानां मार्गशीर्षोंहम्' अर्थात् सभी महिनों में मार्गशीर्ष श्रीकृष्ण का ही स्वरूप है। इस महीने में शंख की साधाना करने से श्रीकृष्ण के साथ ही लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।

सतना। अगहन मास की शुरूआत 15 नवंबर मंगलवार से हो गई है, जो 13 दिसंबर, मंगलवार तक रहेगा। धर्म ग्रंथों के अनुसार, ये महीने भगवान श्रीकृष्ण को बहुत प्रिय है। श्रीमद्भागवत के अनुसार, श्रीकृष्ण ने अर्जुन से कहा है 'मासानां मार्गशीर्षोंहम्' अर्थात् सभी महिनों में मार्गशीर्ष श्रीकृष्ण का ही स्वरूप है। इस महीने में शंख की साधाना करने से श्रीकृष्ण के साथ ही लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं।

विष्णु पुराण में बताया गया है कि देवी महालक्ष्मी समुद्र की पुत्री है और शंख को लक्ष्मी का भाई माना गया है। इन्हीं कारणों से शंख की पूजा भक्तों को सभी सुख देने वाली गई है। ज्योतिष के अनुसार, यदि इस महीने में शंख से संबंधित कुछ विशेष उपाय किए जाएं तो धन से संबंधित अनेक समस्याएं समाप्त ही सकती हैं।

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मार्गशीर्ष मास का महत्व
समस्त महिनों में मार्गशीर्ष मास श्रीकृष्ण का स्वरूप है। मार्गशीर्ष माह के संदर्भ में कहा गया है कि इस माह का संबंध मृगशिरा नक्षत्र से होता है। इस माह की पूर्णिमा मृगशिरा नक्षत्र से युक्त होती है। जिस कारण से इस मास को मार्गशीर्ष मास कहा जाता है। इसके अतिरिक्त इस महीने को मगसर, अगहन या अग्रहायण माह भी कहा जाता है।

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नदी स्नान का विशेष महत्व
ज्योतिष के अनुसार, मार्गशीर्ष के महीने में स्नान एवं दान का विशेष महत्व होता है। श्रीकृष्ण ने गोपियां को मार्गशीर्ष माह की महत्ता बताई थी तथा उन्होंने कहा था कि मार्गशीर्ष के महीने में यमुना स्नान से मैं सहज ही प्राप्त हो जाता हूं अत: इस माह में नदी स्नान का विशेष महत्व माना गया है।

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इस तरह करें पूजा
- अगहन मास में मोती शंख में साबूत चावल भरकर रखें, बाद में इसकी पोटली बनाएं और तिजोरी में रख लें।
- अगहन मास में दक्षिणावर्ती शंख में दूध भरकर भगवान विष्णु का अभिषेक करें।
- भगवान विष्णु के मंदिर में शंख का दान करें, इससे भी धन संबंधित समस्याओं में लाभ होगा।
- जिस स्थान पर पीने का पानी रखते है वहां दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल भरकर रखें, इससे पितृदोष कम होगा।
- अपने पूजन स्थान पर दक्षिणावर्ती शंख की स्थापना करें और रोज विधि-विधान से इसकी पूजा करें।
- दक्षिणावर्ती शंख में गंगाजल व केसर मिलाकर माता लक्ष्मी का अभिषेक करें, तो धन लाभ होगा।
- किसी पवित्र नदी में शंख प्रवाहित करें और माता लक्ष्मी से मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करें।
- पानी की टंकी में शंख रखें इससे घर में बरकत बढ़ती है और माता लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।
- एक सफेद कपड़े में सफेद शंख चावल व बताशे लपेटकर नदी में बहाएं। इससे शुक्र के दोष दूर होंगे।
- अगहन मास में रोज तुलसी के साथ दक्षिणावर्ती शंख की भी पूजा करें। शुद्ध घ्ज्ञी का दीपक लगाएं।

इनका कहना है:
श्रीमद्भागवत गीता में भगवान विष्णु ने अर्जुन से कहा था कि 'मासानां मार्गशीर्षोंहम्' अर्थात् सभी महिनों में मार्गशीर्ष मास श्रेष्ट है। ये महीना श्रीकृष्ण के नाम से जाना जाता है। भगवान विष्णु कार्तिक मास की एकादशी को जागते है। उसी दिन से विष्णु का मास   की शुरूआत हो जाती है।
- आचार्य जगन्नाथ मिश्रा, जोतिषाचार्य, वासुदेव संस्थान सरैया मानिकपुर (उप्र)
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gaurav nauriyal
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