Mumbai News : मुंबई एयरपोर्ट पर 705 करोड़ का घोटाला

जीवीके ग्रुप के चेयरमेन, पुत्र, एएआई अधिकारियों और नौ कंपनियों के खिलाफ सीबीआई में मामला दर्ज, हवाईअड्डे के विकास में बड़े पैमाने पर भष्ट्राचार, सीबीआई ने आरोप लगाया है कि 2012 से 2018 के बीच जीवीके और अन्य कंपनियों ने लगभग 705 करोड़ रुपए का गोलमाल किया है।

By: Binod Pandey

Published: 03 Jul 2020, 04:44 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
मुंबई. मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास के नाम पर 705 करोड़ का घोटाला सामने आया है। इस मामले में सीबीआई ने जीवीके ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमेन जी वेंकट कृष्णा रेड्डी, उनके बेटे संजय रेड्डी, एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के कुछ अधिकारियों और नौ कंपनियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सीबीआई का दावा है कि मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के विकास में बड़े पैमाने पर भष्ट्राचार हुआ है। सीबीआई ने आरोप लगाया है कि 2012 से 2018 के बीच जीवीके और अन्य कंपनियों ने लगभग 705 करोड़ रुपए का गोलमाल किया है। सीबीआई को अंदेशा है कि इन लोगों ने विकास के नाम पर हवाई अड्डे के क्षेत्र में 200 एकड़ जमीन भी हड़प ली है।

निजी-सार्वजनिक साझेदारी में विकसित
गौरतलब है कि सहार स्थित मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे को जीवीके ने निजी-सार्वजनिक साझेदारी में विकसित किया था। इसके लिए मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (एमआईएलए) की स्थापना की गई थी। चार अप्रैल 2006 को भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) ने मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया था । जीवीके एयरपोर्ट होल्डिंग के पास कंपनी की 50.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है। केंद्र सरकार के भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण का स्वामित्व 26 प्रतिशत है और शेष विदेशी कंपनियों के पास है।

अनुबंध केवल कागजों पर
सीबीआई ने संदेह व्यक्त किया है कि हवाई अड्डे के विकास में कुछ अनुबंध केवल मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किए गए थे। सीबीआई की एफआईआर के अनुसार निजी कंपनियों को दिए गए अनुबंध केवल कागजों पर थे। दरअसल वो काम पूरे हुए नहीं थे। इसके अलावा लगभग &95 करोड़ रुपए अवैध रूप से निजी वित्तीय संस्थानों को दिए गए। इससे भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण को नुकसान हुआ।

नकली बोर्ड की मीटिंग
एफआईआर के अनुसार जीवीके ने फर्जी अनुबंधों को लागू करके करोड़ों रुपए का गबन किया है। अब तक की सीबीआई जांच से पता चला है कि जीवीके में नकली बोर्ड मीटिंग की जाती थी। इनमें कई प्रस्तावों को मंजूरी दी गई थी। इसके चलते फर्जी कॉन्ट्रैक्ट पूरा करने के बहाने प्रोजेक्ट ने अन्य कंपनियों के लिए लगभग &10 करोड़ रुपए डायवर्ट कर दिए

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