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PFI सदस्यों को नहीं मिली जमानत, कोर्ट ने कहा- भारत को इस्लामिक देश बनाने की रची थी साजिश

PFI Case : केंद्र सरकार द्वारा बैन किए गए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के तीन कथित सदस्यों को कोर्ट ने जमानत देने से इनकार कर दिया है।

मुंबईJun 12, 2024 / 12:34 pm

Dinesh Dubey

PFI news
बॉम्बे हाईकोर्ट ने प्रतिबंधित पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के तीन कथित सदस्यों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। तीनों को आपराधिक बल से सरकार को उखाड़ फेंकने की साजिश रचने के आरोप में 2022 में महाराष्ट्र आतंकवाद विरोधी दस्ते (एटीएस) ने गिरफ्तार किया था। हाईकोर्ट ने मंगलवार को तीनों की जमानत याचिका खारिज कर दी।  
जस्टिस अजय गडकरी और जस्टिस श्याम चांडक की खंडपीठ ने मंगलवार को रजी अहमद खान (37), उनैस उमर खैय्याम पटेल (32) और कय्यूम अब्दुल शेख (50) की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं। हाईकोर्ट ने माना कि उनके खिलाफ प्रथम दृष्टया सबूत मौजूद हैं।

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खंडपीठ ने कहा कि सबूतों से संकेत मिलता है कि आरोपी भारत को 2047 तक इस्लामिक राष्ट्र में बदलने की साजिश में शामिल थे और आपराधिक बल का इस्तेमाल करके भारत सरकार के खिलाफ साजिश रचने में संलिप्त हैं। केंद्र सरकार ने 2022 में पीएफआई को प्रतिबंधित कर दिया था।

पुणे जिले के पीएफआई के पूर्व उपाध्यक्ष शेख और पीएफआई के पदाधिकारी खान और पटेल सभी नासिक जेल में बंद हैं। उन्होंने पिछले साल विशेष अदालत द्वारा उनकी जमानत याचिका खारिज होने के बाद जमानत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, प्रथम सूचना रिपोर्ट में यह बात स्पष्ट रूप से कही गई है कि उन्होंने 2047 तक भारत को इस्लामिक देश बनाने की साजिश रची थी। आरोपी देश के खिलाफ नफरत फैलाने और विभिन्न प्रचार माध्यमों से राष्ट्र विरोधी एजेंडे को आगे बढ़ाने में शामिल थे। उनके खिलाफ प्रथमदृष्टया सबूत मौजूद हैं। इसलिए उनकी जमानत याचिका खारिज की जाती है।
जांच एजेंसी ने दावा किया है कि आरोपियों ने मुस्लिम समुदाय के लोगों के मन में नफरत पैदा करने और उन्हें भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने के लिए उकसाने के लिए कई बैठकें की थी। तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के विभिन्न प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया गया है।

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