नेपाल के रास्ते पाकिस्तान भागने की फिराक में था डॉक्टर बम

  • बीएमसी ( BMC )के हॉस्पिटल में था डॉक्टर, आतंकियों को देता था बम बनाने की ट्रेनिंग
  • कानपुर ( KANPUR )की मस्जिद से बाहर निकलते ही उत्तर प्रदेश ( UTTAR PRADESH ) पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया

नागमणि पांडेय

मुंबई. राजस्थान के जयपुर ( Rajsthan ) सीरियल बम धमाकों का दोषी डॉ. जलीस अंसारी ( Dr jalis ansari )कानपुर से गिरफ्तार कर लिया गया है। महाराष्ट्र एटीएस ( Maharashtra Ats )की मुस्तैदी के चलते यूपी एटीएस उसे गिरफ्तार करने में सफल रही। अंसारी उत्तर प्रदेश से नेपाल भागने वाला था। नेपाल के रास्ते पाकिस्तान ( Pakistan )जाने की योजना उसने बनाई थी। यूपी पुलिस ( UP Police )ने कानपुर (Kanpur )की एक मस्जिद से बाहर निकलते ही उसे गिरफ्तार कर लिया। उल्लेखनीय है कि एमबीबीएस की पढ़ाई करने के बाद अंसारी बीएमसी हॉस्पिटल में डॉक्टर था। आतंकी अंसारी देश के अलग-अलग हिस्सों में 50 से ज्यादा बम धमाकों में शामिल था। इसके ही चलते उसे 'डॉक्टर बम' कहा जाने लगा।
बीएमसी में डॉक्टर रहा अंसारी अयोध्या में बाबरी मस्जिद ढहाए जाने के बाद आतंकी करीम तुंडा के संपर्क में आया। तुंडा की मदद से वह पाकिस्तान गया जहां उसे बम बनाने की ट्रेनिंग मिली। भारत लौटने पर सबसे पहले अंसारी ने राजधानी एक्सप्रेस में बम रखा। इस मामले में सीबीआई ने उसे गिरफ्तार किया था। जलीस पर सबसे बड़ा आरोप राजस्थान में पांच अलग-अलग जगहों पर 5 और 6 दिसंबर, 1993 को हुए बम धमाकों का लगा था।


अजमेर ब्लास्ट में दोषी
अजमेर बम विस्फोट मामले में उसकी गिरफ्तारी के बाद कोर्ट ने उसे उम्र कैद की सजा सुनाई थी। तभी से वह अजमेर जेल में बंद था। उसपर 5 और 6 दिसंबर, 1993 को ही हैदराबाद में सीरियल ब्लास्ट के आरोप में भी केस चला, लेकिन उसमें वह 2015 में बरी कर दिया गया। हैदराबाद में कम तीव्रता वाले धमाके आईईडी से किए गए थे। वह पुणे के ब्लास्ट में भी आरोपी है। आरोप है कि यहां 1992 में बाबरी मस्जिद कांड के बाद उसने अपने साथियों के साथ मिल कर बम लगाए थे।

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मालेगांव कोर्ट ने सुनाई 10 साल की सजा
गिरणा नदी में बम धमाके का प्रयोग करने के अपराध में उसे मालेगांव की एक कोर्ट ने 2018 में 10 साल जेल की सजा सुनाई थी। उसके बाद अजमेर जेल में उम्र कैद की सजा काटते हुए वहां से 21 दिन की पैरोल पर बाहर आया था। मुंबई आने के बाद प्रति दिन सुबह 10.30 से 12 बजे के बीच आग्रीपाड़ा पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाता था। लेकिन, 16 जनवरी को सुबह घर से नमाज पढऩे के बहाने निकलने के बाद अचानक गायब हो गया। जब वह घर नहीं लौटा तो परिवार वालों ने उसकी गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। इसके बाद क्राइम ब्रांच और एटीएस उसकी तलाश में जुट गईं।

यूपी पुलिस को किया अलर्ट
यूपी पुलिस ने जलीस के पास से 47 हजार 780 रुपए, एक पॉकेट डायरी, मोबाइल फोन और आधार कार्ड बरामद किया गया। महाराष्ट्र एटीएस ने अंसारी के गायब होने के बाद सबसे पहले यूपी पुलिस को सतर्क किया था। संभावना जताई थी कि वह उत्तर प्रदेश से नेपाल के रास्ते पाकिस्तान भाग सकता है। इससे पहले भी वह इसी रास्ते से बम बनाने की ट्रेनिंग लेने पाकिस्तान गया था।


कई आतंकी संगठनों से संबंध

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कई आतंकी संगठनों से ताल्लुक रखने वाले कुख्यात अंसारी के खिलाफ बम धमाकों के 6 गंभीर आरोप हैं। 1993 के अजमेर बम धमाके के मामले में दोषी मानते हुए अदालत ने उसे उम्र कैद की सजा सुनाई है। अजमेर जेल में वह वही सजा काट रहा है। अंसारी का इंडियन मुजाहिद्दीन सहित कई आतंकी संगठनों से संबंध है।

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मुंबई में भी कई मामले दर्ज

आतंकी जलीस अंसारी ने 16 जनवरी को आग्रीपाड़ा पुलिस स्टेशन में लगाई थी हाजरी
IMAGE CREDIT: patrika

देश में अशांति फैलाने के लिए अंसारी ने शिवसेना भवन, गुरुद्वारा, रेलवे स्टेशन, पुलिस स्टेशन में बम लगाने की योजना बनाई थी। 1990 में कामगार नेता डॉ. दत्ता सामंत के परेल स्थित कार्यालय में विस्फोट किया था, जिसमें एक पुलिस उप-निरीक्षक की मौत हुई थी। इसके बाद पुलिस को टार्गेट करते हुए आजाद मैदान, गांवदेवी ,भोईवाड़ा पुलिस स्टेशन के साथ ही स्टेट सीआईडी कार्यालय, नायगांव पुलिस हेडक्वार्टर, क्राइम ब्रांच की कई यूनिट में विस्फोट किया। नायगांव में एक पुलिस कर्मी के बेटे की मौत हो गई थी। कल्याण, रे रोड, चर्चगेट जैसे कई स्टेशनों पर उसने बम प्लांट किया था, जिनमें से कल्याण और चर्चगेट स्टेशन पर ब्लास्ट हुआ था। इसके बाद अंसारी ने दादर के चित्रा सिनेमा के सामने गुरुद्वारा में विस्फोट कराए। 1989 से 1994 के बीच अंसारी ने 52 जगहों पर बलास्ट किया। यह धमाके महाराष्ट्र गुजरात, कर्नाटक, राजस्थान और मध्य प्रदेश में किए गए थे।

फोन टैपिंग के बाद कसा सीबीआई का शिकंजा
1994 में सीबीआई को फोन टैपिंग के दौरान जलीस का लोकेशन मिला। सीबीआई ने आग्रीपाडा से उसके घर से गिरफ्तार किया था। उसके पास एक रिवाल्वर भी मिली थी। तत्कालीन क्राइम ब्रांच डीसीपी राकेश मारिया ने जलीस से पूछताछ की थी। लंबी पूछताछ में उसने 52 धमाके करने का गुनाह कबूल किया था।

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Nagmani Pandey Reporting
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